
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Written By: Vidya Sharma | Published : May 4, 2026 11:01 AM IST
अस्थमा डे
Gaon Aur Shehar Mai Asthma Kyu Badh Rha Hai: अस्थमा एक ऐसी बीमारी है जिसे पॉल्यूशन से जोड़कर देखा जाता है और यह सही भी है, क्योंकि जिस तरह प्रदूषण बढ़ा है लोगों में यह बीमारी होने की संभावना भी बढ़ रही है। यह एक बड़ी हेल्थ प्रॉब्लम बन चुकी है। यह सिर्फ शहरों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि गांव-कस्बों तक भी पहुंच गया है। लेकिन हमारे सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर अस्थमा ज्यादा कहां बढ़ रहा है? यानी कि गांवों में या शहरों में? यह कोई छोटा विषय नहीं है, यही कारण है कि इस ‘गांव या शहर: कहां ज्यादा तेजी से बढ़ रहा है अस्थमा?’ विषय पर PubMed और सेज जर्नल्स ने अपनी एक-एक स्टडी पब्लिश की है।
यह स्टडी बताती हैं कि शहरों में अस्थमा का खतरा अभी भी ज्यादा है, लेकिन गांव भी अब इससे अछूते नहीं रहे हैं। बदलती लाइफस्टाइल, पॉल्यूशन और एनवायरनमेंट की वजह से अर्बन और रूरल, दोनों एरिया में अस्थमा एक बड़ी चिंता बनता जा रहा है। इसलिए वर्ल्ड अस्थमा डे 2026 के मौके पर हमने इन दोनों ही रिसर्च को विस्तार से पढ़ा और जाना कि ऐसा क्यों हो रहा है।
PubMed द्वारा प्रकाशित ‘Minimal Difference in the Prevalence of Asthma in the Urban and Rural Environment’ नाम की स्टडी में बताया गया कि पहले अस्थमा को मुख्य रूप से अर्बन डिजीज माना जाता था, क्योंकि यह शहरों में अधिक होती है। जिसका कारण है शहरों में दिन ब दिन बढ़ता पॉल्यूशन, ट्रैफिक और इंडस्ट्रियर एक्सपोजर ज्यादा होता है। लेकिन स्टडी कहती है कि अब ग्रामीण इलाकों में भी अस्थमा के मामले बढ़ते दिख रहे हैं।
इसके अलावा सेज जर्नल में पब्लिश रिसर्च बताती है कि अर्बन एरिया में अस्थमा प्रीवलेंस गांवों के मुकाबले अधिक देखी गई है। इसकी सबसे बड़ी वजह तेजी से बढ़ता प्रदूषण और शहरीकरण है। रिसर्च में शहरों में अस्थमा बढ़ने के ये कारण बताए गए हैं-
इन सभी चीजों से लोगों के लंग्स लगातार प्रभावित हो रहे हैं। रिसर्च के अनुसार यही वजह है कि अर्बन पॉपुलेशन में सांस से जुड़ी समस्याएं अधिक पाई गई हैं। सिस्टमैटिक रिव्यू में शामिल ज्यादातर स्टडीज ने यही दिखाया है कि शहरों में रहने वाले लोगों में अस्थमा के लक्षण गांव के लोगों के मुकाबले ज्यादा थे।
PMC में उपलब्ध रिसर्च के मुताबिक गांव भी अब पूरी तरह से सुरक्षित नहीं रहे हैं। इसके पीछे कई कारण बताए गए हैं जैसे- लकड़ी और बायोमास ईंधन का धुआं, धूल-मिट्टी, खेतों में एक्सपोजर और हेल्थ केयर फैसिलिटी की कमी। रिसर्चर्स का कहना है कि ग्रामीण दिनचर्या में बदलाव आने के बाद अस्थमा का खतरा गांवों में भी बढ़ रहा है।
PMC में मौजूद एक क्रॉस-सेक्शनल स्टडी में पाया गया कि ग्रामीण इलाकों में बच्चों में अस्थमा की प्रसार शहरी बच्चों से कम था, लेकिन लक्षण अधिक गंभीर हो सकते हैं। थोड़ा विस्तार से बात करें तो स्टडी में यह सामने आया कि-
यानी गांवों में केस कम हो सकते हैं, लेकिन समस्या ज्यादा गंभीर हो सकती है।
बच्चों में भी शहरीकरण का प्रभाव साफ दिखाई देता है। रिसर्च के अनुसार शहरों में रहने वाले बच्चों में अस्थमा के कई मामलों में ग्रामीण बच्चों से ज्यादा रहे। एक्सपर्ट्स का मानना है कि छोटे बच्चों के विकासशील फेफड़ों पर पॉल्यूशन का असर ज्यादा होता है।(PMC)
डिस्क्लेमर- फिलहाल रिसर्च यही दिखाती है कि अस्थमा शहरों में ज्यादा तेजी से बढ़ रहा है। अर्बन पॉपुलेशन, खराब एयर क्वालिटी और बदलती लाइफस्टाइल इसकी सबसे बड़ी वजह हैं। आप जिस भी इलाके में रहते हैं, अपने स्वास्थ्य पर ध्यान दें और सांस से जुड़ी समस्या होने पर उसे अनदेखा न करें। एक्सपर्ट की सलाह लें।
शहरी इलाकों में अस्थमा (Asthma) के प्रमुख कारणों में उच्च वायु प्रदूषण (वाहनों का धुआं, धूल, निर्माण), कम हरित क्षेत्र, भीड़भाड़ वाले आवास में धूल के कण, फफूंद (mold), और पालतू जानवरों की एलर्जी शामिल हैं।
अस्थमा के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें राइनोसिनुसाइटिस, एलर्जी, जलन पैदा करने वाले पदार्थ, दवाएं (जैसे एस्पिरिन से होने वाली श्वसन संबंधी बीमारी में एस्पिरिन), और मोटापा शामिल हैं।
ग्रामीण इलाकों में अस्थमा (दमा) होने के मुख्य कारण घरेलू प्रदूषण, कृषि गतिविधियाँ, और प्राकृतिक एलर्जी के कारक हैं।
वायु प्रदूषण के कारण होने वाली सबसे आम बीमारियों में अस्थमा जैसी श्वसन संबंधी बीमारियाँ, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी), हृदय संबंधी विकार जैसे दिल का दौरा और स्ट्रोक, फेफड़ों का कैंसर और तंत्रिका संबंधी स्थितियाँ शामिल हैं।