घंटों वीडियो गेम खेलने का शौक, आपको बना सकता है ''गेमिंग डिसऑर्डर'' का शिकार

जो बच्चे हद से ज्यादा वीडियो गेम खेलते हैं, उनमें काफी हद तक एकाग्रता में कमी की समस्या देखी जाती है।

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Written By: Anshumala | Published : June 19, 2018 11:21 AM IST

आज बड़े हों या बच्चे जिसे देखो वह वीडियो गेम पर घंटों लगा रहता है। इससे कई तरह की शारीरिक समस्याएं होने का खतरा रहता है। बच्चों का भी हद से ज्यादा पोर्टेबल डिवाइस पर या फिर टीवी या मोबाइल पर अधिक गेम खेलने की आदत, उनके जीवन को कई तरह से प्रभावित करता है। गेम खेलना बेशक आपके मूड को लाइट करता है, लेकिन इसकी लत बच्चों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। एक शोध में कहा गया है कि वीडियो गेम की लत भावनात्मक और शारीरिक दोनों रूप से ही प्रभावित करता है। अधिक वीडियो गेम खेलने से सामाजिक चीजों में भी बच्चे भाग नहीं लेते, दुनिया से कटे रहने की उनमें आदत विकसित हो जाती है।

वीडियो गेमिंग के बढ़ते इस्तेमाल से होने वाले खतरों को देखते हुए डब्लूएचओ ने अब गेमिंग डिसऑर्डर यानी इंटरनेट गेम से उत्पन्न होने वाले विकार को मानसिक स्वास्थ्य की अवस्था के रूप में अपने इंटरनेशनल क्लासिफिकेशन ऑफ डिजीज (आईसीडी) में शामिल किया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से प्रकाशित आईसीडी एक नियमावली है जिसे 1990 में अपडेट किया गया था। इसके नए संस्करण आईसीडी-11 में गेमिंग डिसॉर्डर को स्वास्थ्य की एक गंभीर अवस्था के रूप में शामिल किया गया है। इस विकृति में निगरानी की आवश्यकता होती है।

डब्लूएचओ ने एक बयान में कहा, "गेमिंग डिसऑर्डर को व्यसनकारी विकृति के खंड में शामिल किया गया है। मानसिक स्वास्थ्य और वस्तुओं के दुरुपयोग विभाग के सदस्य व्लादिमीर पोजींयाक का कहना है कि वर्गीकृत किए जाने से अभिप्राय यह है कि स्वास्थ्य सेवा प्रणाली और पेशेवर इस अवस्था की मौजूदगी के प्रति अधिक सावधान रहेंगे और इस विकार से पीड़ित लोगों को समुचित मदद मिलने की संभावना बढ़ जाएगी।

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उन्होंने कहा, "दुनिया भर के लाखों गेमर की पहचान गेमिंग डिसऑर्डर से पीड़ित होने के रूप में कभी नहीं होगी, भले ही वे गेमिंग से अत्यधिक आसक्त हों क्योंकि यह अवस्था बहुत कम पाई जाती है। उन्होंने कहा कि यह नैदानिक अवस्था है और नैदानिक रूप से रोग की पहचान तभी हो सकती है, जब स्वास्थ्य सेवा के कुशल पेशेवर यह काम करें।"

मई 2019 में आयोजित होने वाले विश्व स्वास्थ्य सम्मेलन में आईसीडी-11 प्रस्तुत किया जाएगा, जिसमें सदस्य इसे अपनाएंगे और यह एक जनवरी 2022 से लागू होगा। आईसीडी स्वास्थ्य की प्रवृत्ति की पहचान और दुनिया भर में इसके आंकड़ों का आधार है। इसमें जख्मों, बीमारियों और मौत के कारणों के करीब 55,000 यूनिक कोड हैं। यह स्वास्थ्य सेवा के पेशेवरों को एक समान भाषा प्रदान करता है, जिससे वे स्वास्थ्य संबंधी सूचनाओं को दुनिया भर में साझा कर सकें।

वीडियो गेम से होने वाले सेहत नुकसान

एकाग्रता में आती है कमी

जो बच्चे हद से ज्यादा वीडियो गेम खेलते हैं, उनमें काफी हद तक एकाग्रता में कमी की समस्या देखी जाती है। वे अपने किसी भी काम या पढ़ाई में एकाग्रता और रूची नहीं ले पाते हैं। यदि बच्चे देर तक वीडियो या मोबाइल पर गेम खेलते हैं, तो इससे उनकी पढ़ाई भी प्रभावित होती है।

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नींद नहीं आती है

बड़े भी आजकल रात में सोने से पहले वीडियो या मोबाइल गेम खेलते हैं। इस लत के कारण वे पर्याप्त नींद नहीं ले पाते हैं। रात में भरपूर नहीं सोने पर दिन भर किसी भी काम को ठीक ढंग से करने में समस्या महसूस होती है। आप सारा दिन आलस महसूस करते हैं। ऐसे में काम भी गड़बड़ होता है। लगातार ऐसा ही चलता रहा तो आपके पूरे स्वास्थ्य के लिए यह हानिकारक हो सकता है।

किसी से कोई मतलब नहीं

जिन बच्चों को गेम खेलने की लत लग जाती है, उन्हें बस गेम से मतलब होता है। घर में कौन आ रहा है, कौन जा रहा है, इससे उन्हें कोई मतलब नहीं रह जाता है। वे सामाजिक रूप से लोगों से अलग हो जाते हैं। किसी सोशल इवेंट में भी शामिल होने से कतराने लगते हैं। इस वजह से उनका मानसिक स्वास्थ्य पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाता है।

चिड़चिड़ापन महसूस होना

गेमिंग की लत सभी के व्यवहार पर असर डालती है फिर चाहे बच्चे हों या बड़े। इस लत के कारण बच्चे चिड़चिड़े हो जाते हैं। उन्हें हर छोटी-छोटी बातों पर भी गुस्सा आने लगता है।

(आईएएनएस से इनपुट)

चित्रस्रोत:Shutterstock.

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