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अपनी लाइफस्टाइल को बदलकर और अपनी डायट और व्यायाम पर ध्यान देकर वास्तव में आप अपनी हाई बीपी की समस्या को कंट्रोल में कर सकते हैं। लेकिन, कोई भी बीपी के एंटीबायोटिक उपचार की अनदेखा नहीं कर सकता। 5 में से 1 भारतीय व्यक्ति को बीपी की शिकायत होती है, अगर आपको अपना ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने में परेशानी हो रही है, तो हो सकता है कि डॉक्टर आपको दवाइयों की सलाह दे। डॉ. अतुल जोशी, फिजिशियन, इंटर्नल मेडिसिन, क्रिटिकल केयर, सह्याद्री हॉस्पिटल बता रहे हैं आपको हाई ब्लड प्रेशर की लेटेस्ट ट्रीटमेंट के बारे में। साथ ही उन्होंने बताया कि क्यों आपको बीपी कंट्रोल करनेवाली दवाइयां नहीं लेनी चाहिए, और इन दवाइयों को खाना क्यों सुरक्षित नहीं है।
हाई ब्लड प्रेशर का इलाज कैल्शियम चैनल ब्लॉकर्स की मदद से किया जा सकता है- यह आपकी रक्त वाहिकाओं को खोलकर ब्लड प्रेशर को कम करने में मदद करते हैं। यह कोशिका झिल्ली के कैल्शियम चैनलों के रुकावट के कारण रक्त वाहिकाओं को खोलने का कार्य करता है। यह बीपी कंट्रोल करने की सबसे पुरानी दवाइयों में से एक है। कुछ लोगों को, लम्बे समय तक इसके इस्तेमाल से पैरों में सूजन हो सकती है। इसीलिए सही डॉक्टरी सलाह के अंतर्गत ही इन दवाइयों का सेवन करना चाहिए।
डायूरेटिक्स बल्ड प्रेशर कंट्रोल करने में कैसे मदद करते हैं?
डायूरेटिक्स (Diuretics) ऐसी दवाइयां हैं जिनकी वजह से बहुत अधिक पेशाब महसूस होती है। दरअसल यह सर्कुलेटरी वॉल्यूम (circulatory volume) कम करता है जिसकी वजह से बीपी भी कम होने लगता है।
बीटा-ब्लॉकर ब्लड प्रेशर में मददगार होते हैं?
बीटा-ब्लॉकर (Beta-blockers) एक प्रकार की एंटी-हाइपरटेंसिव दवाइयां हैं जो बीटा रेसेप्टर्स को ब्लॉक करती हैं, पल्स रेट कम होती है और बीपी कम होता है। बीटा ब्लॉकर की नयी वेरायटी कार्डियो बीटा सिलेक्टिव (cardio selective) हैं और ब्रोन्कियल एयरवेज(bronchial airways) में बीटा रिसेप्टर्स पर प्रभाव नहीं डालते। ये आपकी हार्ट रेट को धीरे-धीरे और कम कर ब्लड प्रेशर को कम करने में सहायता करता हैं।
मेरी बीपी तेज़ी से ठीक करने के लिए, क्या डॉक्टर किसी दवा की खुराक बढ़ा नहीं सकते?
यह कितना प्रैक्टिकल है? बीपी रेट कम करने के लिए अचानक से किए गए बदलाव ठीक नहीं। दरअसल बीपी की दर बहुत तेज़ी से कम होने से स्ट्रोक (विशेषकर बड़ी उम्र में) का ख़तरा उत्पन्न होता है। आपका लक्ष्य धीरे-धीरे बीपी दर को कंट्रोल करना होना चाहिए, जो ज़्यादा दिनों तक असरदार रहे। दवा की एक खुराक बढ़ाने से शायद कुछ फायदा न हो और विभिन्न प्रकार की एंटी-हाइपरसेंसटिव दवाइयों के कॉम्बिनेशन की आवश्यकता पड़ सकती है। बीपी का मैनेजमेंट मरीज़ की ज़रूरत के आधार पर अलग-अलग होना चाहिए जिसमें दवाओं के क्रमिक अंशांकन और दवाओं के द्वितीय श्रेणी को शामिल किया जाना चाहिए।
क्या बीपी की अलग-अलग दवाइयां एक साथ लेना सुरक्षित है?
बीपी की दवाइयां आपके डॉक्टर की सलाह से ही लेनी चाहिए। ज़्यादातर एंटी-हाइपरसेंसटिव दवाएं 24 घंटों तक सक्रिय रहनेवाली दवाइयां होती हैं और दिन में इनकी एक खुराक लेनी चाहिए। लेकिन हो सकता है कि आपका डॉक्टर ने उन्हें बीपी पर अधिकतम नियंत्रण लेने की सलाह दी हो।
हमेशा बीपी 140/90 मिमी एचजी के नीचे रखने की कोशिश करें
यह साबित करने के लिए कई स्टडीज़ हैं जहां कहा गया है कि ब्लड प्रेशर 140/90 के नीचे रहने से आंखों, किडनी और हृदय जैसे अंगों को होनेवाले नुकसान की सम्भावना कम होती है। बेहतर बीपी नियंत्रण से स्ट्रोक और दिल के दौरे की घटनाएं भी कम होती हैं।
दवाएं ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने का एकमात्र तरीका नहीं हैं?
दरअसल बीपी की दवाइयों की सलाह आपकी बीपी की समस्या की गम्भीरता के आधार पर दी जाती हैं। अगर हाइपरटेंशन का पता शुरुआत में ही चल जाता है, ईसीजी और बीपी की दर बदलती नहीं है, तो खानपान में बदलाव, कसरत और वेट कंट्रोल जैसे बदलावों से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। लेकिन अगर शुरुआत में ही बीपी की दर ज़्यादा हों तो केवल जीवनशैली से जुड़े बदलाव काम नहीं आएंगे, और ये ख़तरनाक भी हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में दवाइयों की सलाह दी जाती है।
क्या मुझे पूरी ज़िंदगी ब्लड प्रेशर की दवाएं खानी पड़ेगी?
अगर रोगी को हाई ब्लड प्रेशर हो तो उसे आजीवन दवाइयां लेनी पड़ सकती हैं। प्रारंभिक नियंत्रण के बाद दवा की खुराक कम की जा सकती है लेकिन दवाओं को रोकना उचित नहीं होगा। अगर दवा से बीपी नॉर्मल रहे तो अचानक से दवाएं रोकने से हाइपरटेन्शन दोबारा उभरने और हार्ट फेलियर जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। जब बीपी अस्थायी हो, तनाव से प्रेरित या गर्भावस्था के दौरान, तो कारणों का सफाया होने के बाद दवाएं बंद की जा सकती हैं। लेकिन यह केवल डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही लेनी चाहिए।
क्या ब्लड प्रेशर की दवाइयों की लत लग सकती है?
सभी एंटी-हाइपरटेंसिव दवाओं के असर के समय की जांच करने के बाद इन्हें अनुमोदित किया जाता है, फिर इसके साइड-इफेक्ट से ज़्यादा इसके फायदे दिखाने वाला पर्याप्त डेटा मिलने पर ही इसे मंज़ूरी दी जाती है। ये साइड –इफेक्ट्स इन दवाइयों का सेवन करनेवाले हर व्यक्ति को नहीं होते पर 2-5% मरीज़ों में यह सम्भावना देखी गयी है।
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अनुवादक-Sadhana Tiwari
चित्रस्रोत- Shutterstock