
आशु कुमार दास
आशु कुमार दास एक अनुभवी हेल्थ कंटेंट स्पेशलिस्ट हैं। इन्हें हेल्थ कंटेंट राइटर के तौर पर काम करते हुए 6 ... Read More
Written By: Ashu Kumar Das | Updated : November 10, 2025 2:56 PM IST
Medically Verified By: Dr. Shailesh Sharma
Vaccination to prevent pneumonia in children: बदलते मौसम में सर्दी, खांसी, जुकाम जैसी समस्याएं बच्चों को होना आम बात है। बच्चों को होने वाली आम सी परेशानी तब मुश्किल का सबब बन जाती है, जब ये निमोनिया का रूप धारण कर लेती है। निमोनिया बच्चों में होने वाली एक गंभीर बीमारी है, जो फेफड़ों में संक्रमण के कारण होती है। यह बीमारी खासतौर पर 5 साल से छोटे बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, हर साल दुनियाभर में लाखों बच्चे निमोनिया के कारण अपनी जान गंवा देते हैं।
राहत की बात ये है कि समय पर वैक्सीनेशन करवाने से बच्चों को निमोनियो से काफी हद तक बचाया जा सकता है। 12 नवंबर को जब वर्ल्ड निमोनिया डे मनाया जा रहा है, तब हम आपको बताने जा रहे हैं बच्चों को निमोनिया से बचाने के लिए कौन-कौन सी वैक्सीन लगाई जाती हैं और इसे कब लगवाना चाहिए। इस बारे में अधिक जानकारी दे रहे हैं नई दिल्ली के मॉडल टाउन स्थित यथार्थ हॉस्पिटल के चाइल्ड केयर स्पेशलिस्ट डॉ. शैलेश कुमार शर्मा।
डॉ. शैलेश कुमार शर्मा अनुसार, निमोनिया एक ऐसा संक्रमण है जो फेफड़ों में सूजन पैदा करता है। यह संक्रमण बैक्टीरिया, वायरस या फंगस के कारण हो सकता है। जब बच्चे को निमोनिया होता है, तो उसके फेफड़ों की एयर सैक (alveoli) में म्यूकस या पस भर जाता है, जिससे सांस लेने में दिक्कत होती है।
अगर कोई बच्चा निमोनिया से पीड़ित होता है तो उसमें नीचे बताए गए लक्षण नजर आते हैंः
डॉक्टर बताते हैं कि बच्चों को अगर समय पर वैक्सीन लगवाई जाए, तो निमोनिया के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
भारत के यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम (UIP) के तहत ये वैक्सीन बच्चों को लगाई जाती है। ये वैक्सीन निमोनिया के प्रमुख कारण Streptococcus pneumoniae नामक बैक्टीरिया से बचाव करती है। केंद्र सरकार द्वारा तय किए मानकों के अनुसार, बच्चों को प्न्यूमोकोकल वैक्सीन का पहला डोज 6 सप्ताह की उम्र, दूसरा डोज 10 सप्ताह की उम्र में, तीसरा डोज 14 सप्ताह की उम्र में और बूस्टर डोज 12 से 15 महीने की उम्र में दिया जाता है। प्न्यूमोकोकल वैक्सीन बच्चों के इम्यूनिटी को मजबूत बनाकर निमोनिया से बचाव करने में मदद करती है।
हमारे साथ खास बातचीत के दौरान डॉ. शैलेश कुमार शर्मा ने बताया कि एचआईबी वैक्सीन बच्चों को Haemophilus influenzae type b बैक्टीरिया से बचाती है, जो निमोनिया, मेनिन्जाइटिस और गले के संक्रमण का प्रमुख कारण है। केंद्र सरकार द्वारा तय किए मानकों के अनुसार, बच्चों को एचआईबी वैक्सीन की पहली डोज 6 सप्ताह की उम्र में, दूसरा डोज 10 सप्ताह की उम्र में, तीसरा डोज 14 सप्ताह की उम्र में और इसका बूस्टर डोज 15 से 18 महीने की उम्र में दिया जाता है। बच्चों को एचआईबी वैक्सीन लगवाने से निमोनिया के साथ-साथ गले के संक्रमण से बचाव करने में भी मदद मिलती है।
इन्फ्लुएंजा या फ्लू वायरस से होने वाला संक्रमण भी कई बार गंभीर निमोनियाका कारण बन सकता है। बच्चों को इन्फ्लुएंजा वैक्सीन लगवाने से निमोनिया और बदलते मौसम में होने वाली बीमारियों से बचाव होता है। निमोनिया से बचाव के लिए आप बच्चों को इन्फ्लुएंजा वैक्सीन का पहला डोज 6 महीने की उम्र में दिलवा सकते हैं। इसके बाद हर साल सर्दियों का मौसम शुरू होने से पहले इन्फ्लुएंजा वैक्सीन बच्चों को लगवाई जा सकती है।
डॉक्टर का कहनाहै कि निमोनिया से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है समय पर वैक्सीन लगवाना। PCV, Hib और इन्फ्लुएंजा वैक्सीन बच्चों को इस गंभीर बीमारी से सुरक्षा प्रदान करती हैं। पेरेंट्स बच्चों को निमोनिया से बचाने के लिए ये वैक्सीन डॉक्टर की सलाह पर लगवा सकते हैं। ध्यान रहे कि बच्चों को कोई भी वैक्सीन लगवाने से पहले उसका वैक्सीनेशन कार्ड जरूर देखें, ताकि दो वैक्सीन के बीच गैप सही बन सके।