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Uterine Cancer or Endometrial Cancer cause Symptoms and treatment: आज के समय में महिलाओं में कैंसर के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। भारत जैसे तमाम विकासशील देशों में ब्रेस्ट कैंसर और सर्वाइकल कैंसर के बाद गर्भाशय का कैंसर (Uterine Cancer) भी एक गंभीर और तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्या बनता जा रहा है।
हरियाणा के सोनीपत स्थित एंड्रोमेडा कैंसर हॉस्पिटल के सीनियर ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. अरुण कुमार गोयल बताते हैं कि अफसोस की बात यह है कि गर्भाशय कैंसर की जानकारी की कमी और शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करने के कारण कई महिलाएं इस बीमारी की पहचान देर से होती है।
डॉ. अरुण कुमार गोयल का कहना है कि गर्भाशय (Uterus) महिला के प्रजनन तंत्र का एक बेहद महत्वपूर्ण अंग है। गर्भाशय उस जगह को कहा जाता है, जहां पर गर्भ ठहरता है और भ्रूण का विकास होता है। गर्भाशय के अंदर की परत को एंडोमेट्रियम (Endometrium) कहा जाता है, जो हर महीने हार्मोनल बदलावों के अनुसार मोटी और पतली होती रहती है।
मायो क्लिनिकपर छपी रिपोर्ट बताती है कि जब किसी महिला के गर्भाशय की कोशिकाएं असामान्य रूप से और अनियंत्रित तरीके से बढ़ने लगती हैं, तो उसे गर्भाशय का कैंसर कहा जाता है। 10 में से 7 मामलों में गर्भाशय कैंसर गर्भाशय की अंदरूनी परत यानी एंडोमेट्रियम से शुरू होता है। यही कारण है कि कुछ लोग गर्भाशय कैंसर को एंडोमेट्रियल कैंसर भी कहते हैं।

डॉ. अरुण कुमार गोयल कहते हैं कि यह सवाल बेहद महत्वपूर्ण है। गर्भाशय कैंसर एक ऐसा कैंसर जिसका खतरा हर महिला को नहीं होता है, लेकिन कुछ खास स्थितियों में महिलाओं में इस प्रकार के कैंसर का खतरा कई गुना ज्यादा होता है, इसमें शामिल हैः
हमारे साथ बातचीत के दौरान डॉक्टर बताते हैं कि गर्भाशय कैंसर के शुरुआती लक्षण अक्सर हल्के होते हैं, जिन्हें महिलाएं नजरअंदाज कर देती हैं। गर्भाशय कैंसर के शुरुआती लक्षण जिन पर महिलाओं को गौर करना चाहिए, उसमें शामिल है

डॉक्टर का कहना है कि जो महिलाएं शुरुआती स्टेज में गर्भाशय कैंसर के लक्षण पर गौर नहीं कर पाती हैं, उन्हें अक्सर इस बीमारी का पता एडवांस स्टेज में चलता है। गर्भाशय कैंसर के एडवांस लक्षणों में शामिल है-
किसी महिला को गर्भाशय कैंसर या नहीं, इसका पता लगाने के लिए डॉक्टर नीचे बताए गए टेस्ट करने की सलाह दे सकते हैं।
गर्भाशय कैंसर की जांच की प्रक्रिया डॉक्टर और मरीज के बीच बातचीत से शुरू होती है। डॉक्टर सबसे पहले महिला की पूरी मेडिकल हिस्ट्री लेते हैं। इसमें पीरियड्स से जुड़ी जानकारी, ब्लीडिंग का पैटर्न, मेनोपॉज़ की स्थिति, पहले कोई हार्मोनल इलाज हुआ है या नहीं, मोटापा, डायबिटीज़ जैसी बीमारियों की जानकारी ली जाती है। इसके साथ ही यह भी पूछा जाता है कि परिवार में पहले किसी को कैंसर रहा है या नहीं। यह सारी जानकारी डॉक्टर को यह समझने में मदद करती है कि महिला में गर्भाशय कैंसर का जोखिम कितना है।
इसके बाद डॉक्टर शारीरिक जांच करते हैं, जिसे पेल्विक एग्ज़ामिनेशन कहा जाता है। इस जांच में डॉक्टर हाथों की मदद से गर्भाशय, सर्विक्स और आसपास के अंगों को महसूस करके देखते हैं ताकि किसी असामान्य सूजन, गांठ या दर्द का पता लगाया जा सके। हालांकि इस जांच से कैंसर की पुष्टि नहीं होती, लेकिन यह आगे की जांच का रास्ता तय करने में मदद करती है।

अगला और बहुत महत्वपूर्ण कदम पेल्विक अल्ट्रासाउंड होता है। यह जांच गर्भाशय की अंदरूनी स्थिति को देखने के लिए की जाती है। अल्ट्रासाउंड में गर्भाशय की दीवारों और खासतौर पर एंडोमेट्रियम की मोटाई को मापा जाता है। सामान्य स्थिति में मेनोपॉज़ के बाद गर्भाशय की परत पतली होती है, लेकिन अगर यह मोटी पाई जाती है तो यह कैंसर या अन्य गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है। कई मामलों में ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड किया जाता है, जिसमें योनि के रास्ते अल्ट्रासाउंड प्रोब डालकर ज्यादा स्पष्ट इमेज ली जाती है। यह जांच सुरक्षित होती है और इससे काफी हद तक स्थिति साफ हो जाती है।
अगर अल्ट्रासाउंड में कोई असामान्यता दिखती है, तो डॉक्टर एंडोमेट्रियल बायोप्सी की सलाह देते हैं। यह गर्भाशय कैंसर की सबसे भरोसेमंद जांच मानी जाती है। इस प्रक्रिया में गर्भाशय की अंदरूनी परत से थोड़ा सा टिश्यू निकाला जाता है। इस टिश्यू को लैब में माइक्रोस्कोप के नीचे जांचा जाता है, जिससे यह स्पष्ट हो जाता है कि कैंसर सेल्स मौजूद हैं या नहीं। बायोप्सी से न सिर्फ कैंसर की पुष्टि होती है, बल्कि यह भी पता चलता है कि कैंसर किस प्रकार का है और कितना गंभीर है। यह प्रक्रिया थोड़ी असहज हो सकती है, लेकिन अधिकतर मामलों में इसे बिना भर्ती हुए किया जा सकता है।
कुछ महिलाओं में साधारण बायोप्सी से स्पष्ट परिणाम नहीं मिल पाते। ऐसे मामलों में डॉक्टर हिस्टेरोस्कोपी करवाते हैं। हिस्टेरोस्कोपी एक ऐसी जांच है, जिसमें एक पतली कैमरे वाली ट्यूब को योनि के रास्ते गर्भाशय के अंदर डाला जाता है। इससे डॉक्टर सीधे स्क्रीन पर गर्भाशय की अंदरूनी परत को देख पाते हैं। अगर कहीं संदिग्ध हिस्सा दिखाई देता है, तो वहीं से टिश्यू का सैंपल लिया जाता है। यह जांच गर्भाशय के अंदर मौजूद पॉलिप, गांठ या असामान्य ग्रोथ को साफ-साफ दिखा देती है।
कुछ विशेष परिस्थितियों में डॉक्टर डी एंड सी यानी डाइलेशन एंड क्यूरेटेज़ प्रक्रिया की सलाह देते हैं। इस प्रक्रिया में गर्भाशय का मुंह थोड़ा खोलकर अंदर की परत को साफ किया जाता है और टिश्यू निकाला जाता है। यह जांच तब की जाती है जब अन्य तरीकों से पर्याप्त जानकारी न मिल रही हो। इस प्रक्रिया के बाद मिले टिश्यू की जांच से कैंसर की स्थिति स्पष्ट हो जाती है।
अगर बायोप्सी या अन्य जांचों से गर्भाशय कैंसर की पुष्टि हो जाती है, तो अगला कदम यह जानना होता है कि कैंसर किस स्टेज में है और शरीर में कितना फैल चुका है। इसके लिए सीटी स्कैन या एमआरआई जैसी जांचें की जाती हैं। इन स्कैन की मदद से यह पता लगाया जाता है कि कैंसर केवल गर्भाशय तक सीमित है या लिम्फ नोड्स और आसपास के अंगों तक फैल चुका है। इलाज की सही योजना बनाने में ये जांचें बहुत अहम भूमिका निभाती हैं।
ब्लड टेस्ट भी जांच प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं, हालांकि इनसे सीधे कैंसर की पुष्टि नहीं होती। ब्लड टेस्ट से यह देखा जाता है कि शरीर में खून की कमी तो नहीं है, कोई इंफेक्शन तो नहीं है और मरीज की सामान्य सेहत कैसी है। इलाज शुरू करने से पहले शरीर की स्थिति जानना बहुत जरूरी होता है।
गर्भाशय कैंसर की जांच से डरने की जरूरत नहीं है। आज की आधुनिक मेडिकल तकनीक के कारण अधिकतर जांचें सुरक्षित, कम दर्द वाली और जल्दी पूरी हो जाती हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अगर कैंसर शुरुआती स्टेज में पकड़ में आ जाए, तो सर्जरी, रेडिएशन या दवाओं की मदद से इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। देर करने से बीमारी जटिल हो जाती है और इलाज लंबा व महंगा हो सकता है।
डॉक्टर का कहना है कि मेनोपॉज के बाद डॉक्टर की सलाह पर महिलाएं ये टेस्ट करवाएं, तो गर्भाशय कैंसर को शुरुआती स्टेज में पकड़ा जा सकता है। इससे गर्भाशय कैंसर का इलाज आसान और तेजी से हो सकता है।
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Dr Sharma explains that a Pap smear test -- also known as a Pap test -- involves collecting cells from the cervix to look for abnormalities. Early detection, as mentioned earlier, can lead to treatment before cancer develops. With widespread testing, cervical cancer rates have significantly declined in the last few decades.[/caption]
इस सवाल का जवाब देते हुए डॉ. अरुण कहते हैं- नहीं। महिलाओं में होने वाले गर्भाशय कैंसर को पूरी तरह से रोकना काफी मुश्किल काम होता है। लेकिन महिलाएं कुछ चीजों को रोजमर्रा के जीवन में अपनाएं तो गर्भाशय कैंसर के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

डॉ. अरुण कुमार गोयल से बातचीत के आधार पर हम यह कह सकते हैं कि गर्भाशय का कैंसर एक गंभीर लेकिन समय पर पहचान होने पर इलाज योग्य बीमारी है। यह समस्या तब होती है जब महिलाएं शर्म, डर या जानकारी की कमी के कारण लक्षणों को नजरअंदाज कर देती हैं।