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गर्भाशय का कैंसर क्या है? डॉक्टर बता रहे हैं- किन महिलाओं को रहता है सबसे ज्यादा खतरा

डॉ. अरुण कुमार गोयल बताते हैं कि अफसोस की बात यह है कि गर्भाशय कैंसर की जानकारी की कमी और शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करने के कारण कई महिलाएं इस बीमारी की पहचान देर से होती है।

गर्भाशय का कैंसर क्या है? डॉक्टर बता रहे हैं- किन महिलाओं को रहता है सबसे ज्यादा खतरा
VerifiedVERIFIED By: Dr Arun Kumar Goel

Written by Ashu Kumar Das |Published : February 17, 2026 2:24 PM IST

Uterine Cancer or Endometrial Cancer cause Symptoms and treatment: आज के समय में महिलाओं में कैंसर के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। भारत जैसे तमाम विकासशील देशों में ब्रेस्ट कैंसर और सर्वाइकल कैंसर के बाद गर्भाशय का कैंसर (Uterine Cancer) भी एक गंभीर और तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्या बनता जा रहा है।

हरियाणा के सोनीपत स्थित एंड्रोमेडा कैंसर हॉस्पिटल के सीनियर ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. अरुण कुमार गोयल बताते हैं कि अफसोस की बात यह है कि गर्भाशय कैंसर की जानकारी की कमी और शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करने के कारण कई महिलाएं इस बीमारी की पहचान देर से होती है।

गर्भाशय क्या होता है?

डॉ. अरुण कुमार गोयल का कहना है कि गर्भाशय (Uterus) महिला के प्रजनन तंत्र का एक बेहद महत्वपूर्ण अंग है। गर्भाशय उस जगह को कहा जाता है, जहां पर गर्भ ठहरता है और भ्रूण का विकास होता है। गर्भाशय के अंदर की परत को एंडोमेट्रियम (Endometrium) कहा जाता है, जो हर महीने हार्मोनल बदलावों के अनुसार मोटी और पतली होती रहती है।

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गर्भाशय का कैंसर क्या है?

मायो क्लिनिकपर छपी रिपोर्ट बताती है कि जब किसी महिला के गर्भाशय की कोशिकाएं असामान्य रूप से और अनियंत्रित तरीके से बढ़ने लगती हैं, तो उसे गर्भाशय का कैंसर कहा जाता है। 10 में से 7 मामलों में गर्भाशय कैंसर गर्भाशय की अंदरूनी परत यानी एंडोमेट्रियम से शुरू होता है। यही कारण है कि कुछ लोग गर्भाशय कैंसर को एंडोमेट्रियल कैंसर भी कहते हैं।

महिलाओं को गर्भाशय होने के कारण क्या हैं?

  1. महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का असंतुलन
  2. लंबे समय तक अनियमित पीरियड्स होना, जिस पर ध्यान न जाए
  3. उम्र के अनुसार शरीर का ज्यादा वजन और मोटापा होना
  4. कुछ मामलों में डायबिटीज के कारण भी गर्भाशय कैंसर देखा जाता है
  5. फैमिली हिस्ट्री के कारण भी महिलाओं में कैंसर का खतरा बढ़ता है

Fertility preservation

किन महिलाओं को गर्भाशय कैंसर का खतरा ज्यादा रहता है?

डॉ. अरुण कुमार गोयल कहते हैं कि यह सवाल बेहद महत्वपूर्ण है। गर्भाशय कैंसर एक ऐसा कैंसर जिसका खतरा हर महिला को नहीं होता है, लेकिन कुछ खास स्थितियों में महिलाओं में इस प्रकार के कैंसर का खतरा कई गुना ज्यादा होता है, इसमें शामिल हैः

  1. बढ़ती उम्र की महिलाएं- 45 वर्ष के बाद महिलाओं में गर्भाशय कैंसर का खतरा बढ़ता है। वैश्विक स्तर पर हुई रिसर्च में यह बात सामने आई है कि मेनोपॉज के बाद महिलाओं में गर्भाशय कैंसर का खतरा बढ़ता है।
  2. मेनोपॉज के बाद असामान्य ब्लीडिंग- जिन महिलाओं को मेनोपॉज के बाद भी खून आए, हल्की-फुल्की स्पॉटिंग हो, तो यह गर्भाशय कैंसर का सबसे शुरुआती और अहम संकेत हो सकता है। मेनोपॉज के बाद असामान्य ब्लीडिंग को सामान्य नहीं मानना चाहिए। डॉ. अरुण कहते हैं मेनोपॉज के बाद असामान्य ब्लीडिंग होने पर महिलाओं को डॉक्टर से बात करनी चाहिए।
  3. मोटापा- जिन महिलाओं का उम्र के हिसाब से वजन ज्यादा होता है, उनमें गर्भाशय कैंसर होने की संभावना ज्यादा रहती है। मोटापे से शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर बढ़ जाता है। इससे हार्मोनल संतुलन बिगड़ जाता है। जिससे गर्भाशय की अंदरूनी परत ज्यादा मोटी होने लगती है और गर्भाशय के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
  4. डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर- नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की वेबसाइट पर छपी रिपोर्ट बताती है कि जिन महिलाओं को टाइप-2 डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर होता है। उनमें गर्भाशय कैंसर का खतरा सामान्य महिलाओं से ज्यादा होता है।
  5. हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी- मेनोपॉज के बाद हार्मोन संतुलन बनाने के लिए जो महिलाएं हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी लेती हैं, उनमें भी गर्भाशय कैंसर का खतरा ज्यादा रहता है।
  6. फैमिली हिस्ट्री- जिन महिलाओं के परिवार में मां, बहन और दादी को पहले से गर्भाशय या कोलन कैंसर का इतिहास रहा है, तो उनमें भी गर्भाशय कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।

गर्भाशय कैंसर के शुरुआती लक्षण

हमारे साथ बातचीत के दौरान डॉक्टर बताते हैं कि गर्भाशय कैंसर के शुरुआती लक्षण अक्सर हल्के होते हैं, जिन्हें महिलाएं नजरअंदाज कर देती हैं। गर्भाशय कैंसर के शुरुआती लक्षण जिन पर महिलाओं को गौर करना चाहिए, उसमें शामिल है

  • मेनोपॉज के बाद ब्लीडिंग
  • पीरियड्स के बीच खून आना
  • बहुत ज्यादा या लंबे समय तक पीरियड्स
  • निचले पेट में दर्द रहना या दर्द होना
  • संभोग के दौरान दर्द महसूस करना
  • बदबूदार या असामान्य डिस्चार्ज

गर्भाशय कैंसर के एडवांस लक्षण

डॉक्टर का कहना है कि जो महिलाएं शुरुआती स्टेज में गर्भाशय कैंसर के लक्षण पर गौर नहीं कर पाती हैं, उन्हें अक्सर इस बीमारी का पता एडवांस स्टेज में चलता है। गर्भाशय कैंसर के एडवांस लक्षणों में शामिल है-

  1. बिना किसी कारण से लगातार पेट दर्द
  2. वजन तेजी से घटना (बिना डाइटिंग और एक्सरसाइज के)
  3. हमेशा शारीरिक थकान महसूस करना
  4. एनीमिया (शरीर में खून की कमी होना)
  5. पेशाब या मल त्याग में परेशानी

गर्भाशय कैंसर की जांच कैसे होती है?

किसी महिला को गर्भाशय कैंसर या नहीं, इसका पता लगाने के लिए डॉक्टर नीचे बताए गए टेस्ट करने की सलाह दे सकते हैं।

गर्भाशय कैंसर की जांच की प्रक्रिया डॉक्टर और मरीज के बीच बातचीत से शुरू होती है। डॉक्टर सबसे पहले महिला की पूरी मेडिकल हिस्ट्री लेते हैं। इसमें पीरियड्स से जुड़ी जानकारी, ब्लीडिंग का पैटर्न, मेनोपॉज़ की स्थिति, पहले कोई हार्मोनल इलाज हुआ है या नहीं, मोटापा, डायबिटीज़ जैसी बीमारियों की जानकारी ली जाती है। इसके साथ ही यह भी पूछा जाता है कि परिवार में पहले किसी को कैंसर रहा है या नहीं। यह सारी जानकारी डॉक्टर को यह समझने में मदद करती है कि महिला में गर्भाशय कैंसर का जोखिम कितना है।

इसके बाद डॉक्टर शारीरिक जांच करते हैं, जिसे पेल्विक एग्ज़ामिनेशन कहा जाता है। इस जांच में डॉक्टर हाथों की मदद से गर्भाशय, सर्विक्स और आसपास के अंगों को महसूस करके देखते हैं ताकि किसी असामान्य सूजन, गांठ या दर्द का पता लगाया जा सके। हालांकि इस जांच से कैंसर की पुष्टि नहीं होती, लेकिन यह आगे की जांच का रास्ता तय करने में मदद करती है।

अगला और बहुत महत्वपूर्ण कदम पेल्विक अल्ट्रासाउंड होता है। यह जांच गर्भाशय की अंदरूनी स्थिति को देखने के लिए की जाती है। अल्ट्रासाउंड में गर्भाशय की दीवारों और खासतौर पर एंडोमेट्रियम की मोटाई को मापा जाता है। सामान्य स्थिति में मेनोपॉज़ के बाद गर्भाशय की परत पतली होती है, लेकिन अगर यह मोटी पाई जाती है तो यह कैंसर या अन्य गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है। कई मामलों में ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड किया जाता है, जिसमें योनि के रास्ते अल्ट्रासाउंड प्रोब डालकर ज्यादा स्पष्ट इमेज ली जाती है। यह जांच सुरक्षित होती है और इससे काफी हद तक स्थिति साफ हो जाती है।

अगर अल्ट्रासाउंड में कोई असामान्यता दिखती है, तो डॉक्टर एंडोमेट्रियल बायोप्सी की सलाह देते हैं। यह गर्भाशय कैंसर की सबसे भरोसेमंद जांच मानी जाती है। इस प्रक्रिया में गर्भाशय की अंदरूनी परत से थोड़ा सा टिश्यू निकाला जाता है। इस टिश्यू को लैब में माइक्रोस्कोप के नीचे जांचा जाता है, जिससे यह स्पष्ट हो जाता है कि कैंसर सेल्स मौजूद हैं या नहीं। बायोप्सी से न सिर्फ कैंसर की पुष्टि होती है, बल्कि यह भी पता चलता है कि कैंसर किस प्रकार का है और कितना गंभीर है। यह प्रक्रिया थोड़ी असहज हो सकती है, लेकिन अधिकतर मामलों में इसे बिना भर्ती हुए किया जा सकता है।

कुछ महिलाओं में साधारण बायोप्सी से स्पष्ट परिणाम नहीं मिल पाते। ऐसे मामलों में डॉक्टर हिस्टेरोस्कोपी करवाते हैं। हिस्टेरोस्कोपी एक ऐसी जांच है, जिसमें एक पतली कैमरे वाली ट्यूब को योनि के रास्ते गर्भाशय के अंदर डाला जाता है। इससे डॉक्टर सीधे स्क्रीन पर गर्भाशय की अंदरूनी परत को देख पाते हैं। अगर कहीं संदिग्ध हिस्सा दिखाई देता है, तो वहीं से टिश्यू का सैंपल लिया जाता है। यह जांच गर्भाशय के अंदर मौजूद पॉलिप, गांठ या असामान्य ग्रोथ को साफ-साफ दिखा देती है।

कुछ विशेष परिस्थितियों में डॉक्टर डी एंड सी यानी डाइलेशन एंड क्यूरेटेज़ प्रक्रिया की सलाह देते हैं। इस प्रक्रिया में गर्भाशय का मुंह थोड़ा खोलकर अंदर की परत को साफ किया जाता है और टिश्यू निकाला जाता है। यह जांच तब की जाती है जब अन्य तरीकों से पर्याप्त जानकारी न मिल रही हो। इस प्रक्रिया के बाद मिले टिश्यू की जांच से कैंसर की स्थिति स्पष्ट हो जाती है।

अगर बायोप्सी या अन्य जांचों से गर्भाशय कैंसर की पुष्टि हो जाती है, तो अगला कदम यह जानना होता है कि कैंसर किस स्टेज में है और शरीर में कितना फैल चुका है। इसके लिए सीटी स्कैन या एमआरआई जैसी जांचें की जाती हैं। इन स्कैन की मदद से यह पता लगाया जाता है कि कैंसर केवल गर्भाशय तक सीमित है या लिम्फ नोड्स और आसपास के अंगों तक फैल चुका है। इलाज की सही योजना बनाने में ये जांचें बहुत अहम भूमिका निभाती हैं।

ब्लड टेस्ट भी जांच प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं, हालांकि इनसे सीधे कैंसर की पुष्टि नहीं होती। ब्लड टेस्ट से यह देखा जाता है कि शरीर में खून की कमी तो नहीं है, कोई इंफेक्शन तो नहीं है और मरीज की सामान्य सेहत कैसी है। इलाज शुरू करने से पहले शरीर की स्थिति जानना बहुत जरूरी होता है।

गर्भाशय कैंसर की जांच से डरने की जरूरत नहीं है। आज की आधुनिक मेडिकल तकनीक के कारण अधिकतर जांचें सुरक्षित, कम दर्द वाली और जल्दी पूरी हो जाती हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अगर कैंसर शुरुआती स्टेज में पकड़ में आ जाए, तो सर्जरी, रेडिएशन या दवाओं की मदद से इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। देर करने से बीमारी जटिल हो जाती है और इलाज लंबा व महंगा हो सकता है।

डॉक्टर का कहना है कि मेनोपॉज के बाद डॉक्टर की सलाह पर महिलाएं ये टेस्ट करवाएं, तो गर्भाशय कैंसर को शुरुआती स्टेज में पकड़ा जा सकता है। इससे गर्भाशय कैंसर का इलाज आसान और तेजी से हो सकता है।

[caption id="attachment_1151673" align="alignnone" width="1200"]What does this test involve? Dr Sharma explains that a Pap smear test -- also known as a Pap test -- involves collecting cells from the cervix to look for abnormalities. Early detection, as mentioned earlier, can lead to treatment before cancer develops. With widespread testing, cervical cancer rates have significantly declined in the last few decades.[/caption]

क्या गर्भाशय कैंसर से बचाव संभव है?

इस सवाल का जवाब देते हुए डॉ. अरुण कहते हैं- नहीं। महिलाओं में होने वाले गर्भाशय कैंसर को पूरी तरह से रोकना काफी मुश्किल काम होता है। लेकिन महिलाएं कुछ चीजों को रोजमर्रा के जीवन में अपनाएं तो गर्भाशय कैंसर के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

  1. वजन को मैनेज करें- जैसा कि हमने ऊपर बात की गर्भाशय कैंसर होने का एक मुख्य कारण वजन का ज्यादा होना भी है। अगर आपका वजन किसी भी कारण से ज्यादा है, तो उसे मैनेज करने की कोशिश करें। वजन को मैनेज करने से सिर्फ गर्भाशय कैंसर ही नहीं, बल्कि अन्य कैंसर का खतरा भी कम करने में मदद मिलती है।
  2. एक्सरसाइज करें- रिसर्च बताती है कि मेनोपॉज के बाद जब महिलाएं एक्सरसाइज और विभिन्न प्रकार की फिजिकल एक्टिविटी नहीं करती हैं, उनमें गर्भाशय कैंसर का खतरा ज्यादा होता है। कैंसर से बचाव के लिए रोजाना एक्सरसाइज करना जरूरी है। एक्सरसाइज का ये मतलब बिल्कुल नहीं है कि आप घंटों तक जिम में वर्कआउट करें। दिन में सुबह या शाम के समय 30 मिनट की वॉक और रनिंग जैसी एक्सरसाइज भी आपके लिए मददगार साबित हो सकती है।
  3. मेनोपॉज के बाद ब्लीडिंग को सीरियस मानें- मेनोपॉज के बाद अक्सर जब महिलाओं को कभी- कभार ब्लीडिंग की समस्या होती है, तो वो उसे इग्नोर कर देते हैं, जो भविष्य गर्भाशय कैंसर बनकर उभरता है। इसलिए मेनोपॉज के बाद आपको हल्की या हैवी ब्लीडिंग की समस्या हो रही है, तो इसे गंभीरता से लें। ब्लीडिंग होने पर तुरंत डॉक्टर से बात करें और इलाज शुरू करें।

गर्भाशय का कैंसर कितने दिन में फैलता है?

गर्भाशय कैंसर से जुड़े मिथक और उनकी सच्चाई के लिए वीडियो देखें....

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निष्कर्ष

डॉ. अरुण कुमार गोयल से बातचीत के आधार पर हम यह कह सकते हैं कि गर्भाशय का कैंसर एक गंभीर लेकिन समय पर पहचान होने पर इलाज योग्य बीमारी है। यह समस्या तब होती है जब महिलाएं शर्म, डर या जानकारी की कमी के कारण लक्षणों को नजरअंदाज कर देती हैं।