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Written By: Atul Modi | Published : February 4, 2021 3:57 PM IST
Image credits by: दिन प्रतिदिन कैंसर की समस्या बढ़ती जा रही है। ऐसे में बहुत जरूरी है इसके प्रकार और कारणों को जानना।
महिलाओं में आजकल वजन बढ़ना, मासिक धर्म का अनियमित होना व पीसीओडी जैसी समस्याएं बहुत तेजी से फैलती जा रही हैं। इनके प्रति बहुत से लोग बात नहीं करते हैं परंतु यह कुछ गंभीर समस्याएं हैं जिनके बारे में महिलाओं को बहुत सचेत रहना चाहिए। यदि आपको इनमें से कोई समस्या पहले से ही है और आप उनको ज्यादा गम्भीरता से नहीं ले रही हैं तो आपको अब इनके प्रति गंभीर हो जाना चाहिए। असल में यदि आप इन्हें हल्के में लेती रहेंगी तो आपको गर्भाशय कैंसर होने की सम्भावना हो सकती है जोकि एक चिंताजनक विषय है।
गर्भाशय एक खाली नाशपाती के आकार का हमारे रिप्रोडक्टिव सिस्टम का एक हिस्सा होता है जिसमें भ्रूण ठहरता है। हो सकता है कि, गर्भाशय कैंसर के बारे में आपने ज्यादा नहीं सुना हो। दरअसल यह बाकी प्रकार के कैंसर जितना आम नहीं है। लेकिन पिछले कुछ सालों में इसके केस तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। इसलिए आपको सचेत हो जाना चाहिए।
क्या आप जानते हैं कि 4 फरवरी विश्व कैंसर दिवस (World Cancer Day 2021) के रूप में मनाया जाता है। आज इस दिवस पर हम गर्भाशय कैंसर (Uterine cancer) के बारे में जानेंगे।
जब गर्भाशय की सेल्स का विकास असामान्य रूप से होने लगता है और वह ट्यूमर का रूप ले लेती हैं तो इसे गर्भाशय कैंसर (Uterine cancer) के नाम से जाना जाता है। पहले यह ज्यादातर 50 साल से अधिक उम्र की महिलाओं में देखने को मिलता था। अब जैसे-जैसे हार्मोन्स असंतुलित होने की व पीसीओडी आदि जैसी समस्याएं बढ़ती जा रही हैं वैसे वैसे यह समस्या 30 से 35 साल की महिलाओं में भी देखने को मिल सकती हैं। जिन महिलाओं ने पहले कभी गर्भ धारण नहीं किया है या जो महिलाएं हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी से बहुत बार गुजर चुकी हैं उनमें गर्भाशय कैंसर होने के बहुत ज्यादा चांस होते हैं।
एंडोमेट्रियल कार्सेनोमा : इसको सरल भाषा में हम गर्भाशय कैंसर कह सकते हैं। हमारे गर्भाशय के अंदरूनी भाग में सेल्स के विकास को एंडोमेट्रियल कहा जाता है। इस भाग में कैंसर होने को ही एंडोमेट्रियल कार्सेनोमा कहा जाता है।
गर्भाशय सार्कोमा : इस प्रकार का कैंसर गर्भाशय की मसल्स वाली परत में होता है और इसके 2 से 4 प्रतिशत मामले ही सामने आते हैं।
वैसे तो इसका मुख्य कारण अभी पता नहीं है, पर डॉक्टर्स व विशेषज्ञ खराब लाइफस्टाइल के कारण होने वाली कुछ समस्याओं को जैसे मोटापा, पीसीओएस, हार्मोन्स का असंतुलित होना व टाइप 2 डिजीज, बांझपन आदि समस्याओं को इसके पीछे का एक कारण मानते हैं।
यदि आपको कोई भी लक्षण महसूस होता है तो आप डॉक्टर के पास जा सकते हैं। डॉक्टर बायोस्पी या अल्ट्रासाउंड के द्वारा आपकी कैंसर का पता लगा सकते हैं। यदि जरूरत पड़ती है तो आपका ब्लड टेस्ट या सीटी स्कैन भी हो सकता है। यदि आप में कैंसर पाया जाता है तो इसके बाद डॉक्टर आपको रेडियेशन थेरेपी या हिस्टरेक्टमी सर्जरी के द्वारा आपका इलाज कर सकते हैं। इसका इलाज करने के लिए आपको हार्मोन थेरेपी भी दी जा सकती है।
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