बहरा बना सकता है ईयरफोन का इस्‍तेमाल, रखें इन बातों का ध्‍यान

लंबे समय तक और लगतार ईयरफोन लगाने से हो सकती है बहरेपन की समस्‍या।

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Written By: Yogita Yadav | Updated : October 25, 2019 6:49 PM IST

ईयरफोन अब सबकी जरूरत बन गया है। आज जिसे भी देखिए वह कानों में ईयरफोन लगाए नजर आता है।  ईयरफोन की दीवानगी इस हद तक है कि लोग उठते, बैठते, चलते-फिरते ईयरफोन साथ रखते हैं। ईयरफोन के जरिए युवा अपने मनपंसद संगीत सुनते हैं। लेकिन वे इस बात से अनजान हैं कि ईयरफोन के प्रति उनका इतना गहरा लगाव उन्हें बहरा बना सकता है।  आइए जानें कैसे ईयरफोन कानों के लिए नुकसानदायक है।

ईयरफोन से होने वाले नुकसान 

बहरापन 

इसका एक कारण है आधुनिक जीवनशैली। श्रवण क्षमता क्षीण होना आज एक आम समस्या है। लेकिन शुरू में इस बारे में कोई ध्यान नहीं देता और धीरे-धीरे यह समस्या स्थायी हो जाती है। बाद में यही समस्या बढ़कर बहरेपन का रूप ले लेती है या फिर कानों में हर समय दर्द की शिकयत भी रहने लगती है। हाल में हुए शोध इस बात का खुलासा करते हैं कि लंबे समय तक तेज ध्वनि सुनने के कारण सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। क्योंकि तेज ध्वनि ईयर ड्रम को क्षति पहुंचा कर उसे पतला कर देती है।

टिश्‍यूज को पहुंचता है नुकसान 

आमतौर पर लोगों के सुनने की क्षमता 50 साल की उम्र में प्रभावित होती है। लेकिन यह समस्या युवाओं में भी हो रही है और इसका कारण तेज वॉल्यूम में एमपी3 या आईपोड सुनना है। तेज ध्वनि के कारण, शुरू में कानों की रोम कोशिकाएं अस्थायी रूप से क्षतिग्रस्त होती हैं। या एक कान में सुनाई देना बंद हो जाता है। इन दिनों टाइनाइटस एक आम समस्या है, जिसमें रोम कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। लेकिन ये अपनी मरम्मत भी कर लेती हैं अथवा इलाज से इन्हें ठीक किया जा सकता है।

सुनने की क्षमता होती है प्रभावित 

आरंभ में तेज ध्वनि के कारण, कानों की रोम कोशिकाएं अस्थायी रूप से क्षतिग्रस्त होती हैं तो इसका प्रभाव बहुत ज्यादा कानों पर नहीं पड़ता। जिससे क्षति होने वाली कोशिकाओं का ठीक तरह से इलाज नहीं हो पाता नतीजन, ये कोशिकाएं ठीक नहीं हो पातीं और बहरापन स्थायी हो जाता है। ईयरफोन बहुत ऊंची आवाज में सुनने से धीमी आवाज नहीं सुनाई देती। इतना ही नहीं कोई जोर से बोलता है तभी आवाज साफ देती है।

हमेशा के लिए हो सकते हैं खराब 

अध्ययनकर्ताओं के अनुसार यदि कोई व्यक्ति प्रतिदिन एक घंटे से अधिक वक्त तक 80 डेसीबेल्स से अधिक तेज वॉल्यूम में संगीत सुनता है, तो उसे कम से कम 5 सालों में सुनने में कठिनाई से संबंधित समस्या का सामना करना पड़ सकता है या फिर वह स्थायी रूप से बहरा हो सकता है।

नींद न आना 

हैंड फ्री की मस्ती आपकी सुनने की ताकत तो छीनती ही है साथ ही इससे याददाश्त, बोलने की क्षमता भी प्रभावित होती है। इसके अलावा कई तरह की मानसिक समस्याएं भी पैदा होने लगती हैं। ऐसे में व्यक्ति इंसोमिनिया, डिप्रेशन व पल्पिटेशन (कांपना) जैसी दिक्कतों से भी जूझने लगता है। बहरेपन की समस्या के शुरुआती दिनों में नींद न आने, चक्कर व सिरदर्द जैसे लक्षण नजर आते हैं और आगे चलकर व्यक्ति को सुनना बंद हो जाता है।

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