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Written By: Yogita Yadav | Published : August 17, 2019 2:07 PM IST
तांबा सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद धातु है। असल में यह हमारे शरीर में मौजूद तत्वों में से एक है। जब इसकी कमी होने लगती है तो कई तरह की समस्याएं महसूस होने लगती हैं। आप इन तरीकों से अपने दैनिक जीवन में तांबे का इस्तेमाल कर सकते हैं। © Shutterstock
आयुर्वेद में विटामिन के साथ ही खनिजों को भी शरीर के लिए बहुत जरूरी माना गया है। उनके अनुसार हमारे शरीर में प्राकृतिक रूप से कुछ धातु (Copper vessels benefits) तत्व मौजूद रहते हैं। शरीर के सही तरीके से काम करने के लिए इनका मौजूद होना जरूरी भी है। पर जैसे ही ये कम होने लगते हैं, शरीर में असंतुलन पैदा हो जाता है। जिससे कई तरह की समस्याएं होने लगती हैं। ऐसी ही एक खास धातु है तांबा। आइए जानते हैं हमारी सेहत के लिए कितना जरूरी है तांबा (Copper vessels benefits) और उसे कैसे कर सकते हैं अपने दैनिक जीवन में शामिल।
तांबा हमारे जीवन में प्रयोग होने वाली एक मुख्य धातु है। ताम्बे को औषधीय धातु माना जाता है। यह विद्युत् का सुचालक है और अग्नि तत्व से भरपूर है। यह शरीर के पित्त और वात को नियंत्रित करता है। आप अलग-अलग तरीकों से तांबे का इस्तेमाल कर सकते हैं। कापर इंजाइम सिस्टम में भी उपयोगी है साथ ही यह हमारी ऊर्जा बढ़ाने में भी सहायक है। इतना ही नहीं तांबा हमारी त्वचा की रंगत भी बेहतर करता है।
तांबे में ऐंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो शरीर में दर्द, ऐंठन और सूजन की समस्या नहीं होने देते। ऑर्थराइटिस की समस्या से निपटने में भी तांबे का पानी फायदेमंद होता है। अनीमिया की समस्या में भी तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने से लाभ मिलता है। इसके लिए आप रात भर तांबे के बर्तन में रखा पानी पी सकते हैं।
तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने से शरीर की अतिरिक्त चर्बी पिघलती है। जिससे वजन को नियंत्रित करने में भी मददगार होता है। तांबे को ऐंटीमाइक्रोबीयल और ऐंटीवायरल गुणों के कारण जल्द ही घावों को भरने वाला भी माना जाता है। इससे हीट स्ट्रोक से भी बचाव होता है।
आप तांबे के बर्तन में खाना पकाकर भी इसका लाभ ले सकते हैं। तांबे के बर्तनों में खाना पकाने से इनमें मौजूद कॉपर भी खाने के साथ मिलकर शरीर में जाता है जो शरीर को कई तरह से फायदे पहुंचाता है। इसमें पका खाना खाने से जोड़ों में दर्द और सूजन की समस्या कम होती है। साथ ही शरीर के विषैले पदार्थ बाहर निकल जाते हैं जिससे किडनी और लीवर स्वस्थ रहते हैं।
कॉपर और पीतल के बर्तन हीट के गुड कंडक्टर होते हैं। इनका इस्तेमाल पुराने जमाने में ज्यादा होता था। ये एसिड और सॉल्ट के साथ प्रक्रिया करते हैं। नेशनल इंस्टीटय़ूट आफ हेल्थ के अनुसार खाने में मौजूद ऑर्गेनिक एसिड, बर्तनों के साथ प्रतिक्रिया करके ज्यादा कॉपर पैदा कर सकता है, जो शरीर के लिए नुकसानदेह होता है। इससे फूड प्वॉयजनिंग भी हो सकती है। इसलिए इनकी टिन से कोटिंग जरूरी है। जिसे कलई भी कहते हैं।
तांबे को आप आभूषण के रूप मे भी इस्तेमाल कर उसका फायदा ले सकते हैं। गठिया रोग से निजात पाने के लिए तांबे का कड़ा या ब्रेस्लेट पहनने की सलाह दी जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि तांबे का ब्रिस्लेट पहनने से इसके छोटे छोटे कण हमारी त्वचा से रगड़ खाते हैं। परिणामस्वरूप तांबा हमारी त्वचा के अंदर तक घुस जाता है। ये गठिया के कारण हमारी कमजोर हुई हड्डियों को फिर से विकसित होने में मदद करता है। यही नहीं तांबे का ब्रिस्लेट दर्द में राहत प्रदान करता है।
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