पेशाब में गंध आने का क्या कारण है? डॉक्टर से जानें किन संकेतों को नहीं करना चाहिए इग्नोर

पेशाब में हल्की-फुल्की या फिर कभी-कभार गंध आना नॉर्मल है। लेकिन क्या आपके पेशाब से ज्यादा गंध आती है? अगर हां, तो इसके पीछे के कारणों को जानना बहुत ही जरूरी है। आइए जानते हैं इस बारे में-

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Written By: Kishori Mishra | Published : June 4, 2026 9:27 AM IST

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Medically Verified By: Dr. Uday Beniwal

अक्सर यह देखा जाता है कि लोग पेशाब के रंग या मात्रा पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन उसकी गंध में होने वाले बदलाव को सामान्य मानकर अनदेखा कर देते हैं। हालांकि, पेशाब में आने वाली तेज या असामान्य गंध शरीर के भीतर चल रही कई प्रोसेस का संकेत देती है। कुछ मामलों में यह एक सामान्य और अस्थाई स्थिति रहती है, जबकि कुछ स्थितियों में यह किसी स्वास्थ्य समस्या की ओर इशारा करती है।

जयपुर स्थित नारायणा हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टें, यूरोलॉजिस्ट डॉ. उदय सिंह बेनीवाल का कहना है कि पेशाब की गंध मुख्य रूप से शरीर में मौजूद अपशिष्ट पदार्थों, पानी की मात्रा और खानपान पर निर्भर करती है। सामान्य परिस्थितियों में पेशाब की गंध हल्की होती है, लेकिन जब इसमें अचानक बदलाव दिखाई देता है, तो उसके कारणों को समझा जाना जरूरी होता है।

शरीर में पानी की कमी

पेशाब में तेज गंध आने का सबसे आम कारण शरीर में पानी की कमी माना जाता है। अगर हम पर्याप्त रूप से पानी नहीं पीते हैं, तो इससे पेशाब अधिक सघन हो जाती है। इस स्थिति में उसमें मौजूद अपशिष्ट पदार्थों की मात्रा बढ़ जाती है और गंध अधिक तीव्र महसूस होती है।

गर्मियों के मौसम में अधिक पसीना निकलने के कारण डिहाइड्रेशन की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे समय में यदि पानी का सेवन पर्याप्त नहीं किया जाता, तो पेशाब का रंग गहरा और उसकी गंध तेज हो सकती है।

कुछ खाने-पीने की चीजों से भी आ सकता है गंध

कई बार खानपान भी पेशाब की गंध को प्रभावित करता है। लहसुन, प्याज, शतावरी, कॉफी और कुछ मसालेदार खाद्य पदार्थों के सेवन के बाद पेशाब की गंध में बदलाव महसूस किया जाता है। यह एक सामान्य जैविक प्रक्रिया मानी जाती है और आमतौर पर किसी बीमारी का संकेत नहीं देती। कुछ विटामिन सप्लीमेंट्स, विशेषकर विटामिन बी कॉम्प्लेक्स और कुछ दवाओं के सेवन के बाद भी पेशाब में अलग प्रकार की गंध महसूस की जाती है।

यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन का संकेत

यदि पेशाब में दुर्गंध के साथ जलन, बार-बार पेशाब आना, पेशाब करते समय दर्द या बुखार जैसी समस्याएं भी दिखाई देती हैं, तो यह यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन यानी यूटीआई का संकेत हो सकता है।

इस संक्रमण में बैक्टीरिया मूत्र मार्ग में बढ़ने लगते हैं, जिससे पेशाब में तेज और अप्रिय गंध आने लगती है। महिलाओं में यह समस्या अपेक्षाकृत अधिक देखी जाती है, लेकिन पुरुष भी इससे प्रभावित हो सकते हैं।

डायबिटीज के कारण भी आती है बदबू

कुछ लोगों के पेशाब से मीठी या फल जैसी गंध महसूस की जाती है। यह स्थिति कभी-कभी डायबिटीज का संकेत देती है। जब ब्लड में शुगर का स्तर बहुत अधिक बढ़ जाता है, तब अतिरिक्त ग्लूकोज पेशाब के माध्यम से बाहर निकलने लगता है। इसी कारण से पेशाब में गंध आ सकती है।

यदि पेशाब में असामान्य गंध के साथ अत्यधिक प्यास, बार-बार पेशाब आना और अचानक वजन कम होना जैसे - लक्षण दिखाई देते हैं, तो डॉक्टर से एक बार अपनी जांच कराएं।

किडनी और लिवर से जुड़ी समस्याएं

कुछ मामलों में किडनी या लिवर की कार्यक्षमता प्रभावित होने पर भी पेशाब की गंध बदल सकती है। जब शरीर से विषैले पदार्थ सामान्य तरीके से बाहर नहीं निकल पाते, तब उनके प्रभाव पेशाब की गुणवत्ता और गंध में दिखाई देते हैं। हालांकि, यह स्थिति अपेक्षाकृत कम देखी जाती है, लेकिन लंबे समय तक बनी रहने वाली दुर्गंध को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

कब लें डॉक्टर से सलाह

डॉक्टर कहते हैं कि अगर पेशाब में गंध कुछ घंटों या एक-दो दिनों के अंदर सामान्य हो जाती है, तो आमतौर पर चिंता की आवश्यकता नहीं रहती। लेकिन यदि यह समस्या लगातार बनी रहती है या इसके साथ दर्द, जलन, बुखार, खून आना या बार-बार संक्रमण जैसी शिकायतें जुड़ जाती हैं, तो विशेषज्ञ से परामर्श लिया जाना चाहिए। समय पर जांच कराए जाने से संक्रमण, मधुमेह या अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान जल्दी की जा सकती है।

बचाव के लिए क्या किया जाना चाहिए?

पेशाब की गंध को सामान्य बनाए रखने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पिया जाना चाहिए। संतुलित आहार लिया जाना चाहिए और व्यक्तिगत स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। साथ ही, किसी भी असामान्य बदलाव को लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

पेशाब शरीर की सेहत का एक महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। इसलिए उसकी गंध, रंग और मात्रा में होने वाले बदलावों पर ध्यान दिया जाना चाहिए, ताकि किसी भी संभावित बीमारी की पहचान समय रहते की जा सके।

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