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अक्सर कुछ लोग पेशाब आने पर भी उसे रोके रहते हैं। बार-बार ऐसा करना आपकी सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। यूरीन यानी पेशाब करना शरीर की सामान्य प्रक्रिया है, जिसे महसूस होने पर एक से दो मिनट के अंदर निष्कासित कर देना चाहिए। पसीने की तरह यूरीन के माध्यम से भी शरीर के गैर जरूरी तत्व बाहर निकलते हैं। यदि वह थोड़े समय भी अधिक शरीर में रहते हैं तो संक्रमण होने की संभावना बढ़ जाती है। जानें, यूरीन रोकने से शरीर पर किस प्रकार का प्रभाव पड़ सकता है।
ज्यादा देर न रोकें
कुछ लोग रात में सोते समय या दिन में काम करने में व्यस्त होने के कारण यूरीन को लंबे समय तक रोक कर रखते हैं। यूरीन को आप जितना लंबे समय तक रोककर रखेंगे, आपका ब्लैडर बैक्टीरिया को अधिक विकसित कर कई प्रकार के स्वास्थ्य जोखिम का कारण बन सकता है।
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हो सकता है किडनी में स्टोन
यूरीन को एक से दो घंटे रोकने के कारण महिलाओं व कामकाजी युवाओं में यूरीन संबंधी दिक्कतें आती हैं जिसमें शुरुआत ब्लैडर में दर्द होता है। साथ ही 8 से 10 घंटे बैठ कर काम करने वाले युवाओं को यूरीन की जरूरत ही तब महसूस होती है, जबकि वह कार्य करने की स्थिति बदलते हैं। जबकि इस दौरान किडनी से यूरिनरी ब्लैडर में पेशाब इकठ्ठा होता रहता है। हर एक मिनट में दो एमएल यूरीन ब्लेडर में पहुंचता है, जिसे प्रति एक से दो घंटे के बीच खाली कर देना चाहिए। ब्लैडर खाली करने में तीन से चार मिनट की देरी में पेशाब दोबारा किडनी में वापस जाने लगता है, इस स्थिति के बार-बार होने से पथरी की शुरुआत हो जाती है क्योंकि पेशाब में यूरिया और अमिनो एसिड जैसे टॉक्सिक तत्व होते हैं।
यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन
यूरीन को रोकेंगे तो यूटीआई होने का खतरा बढ़ जाएगा। यूरीन रोकने के कारण यह संक्रमण फैलता है। मूत्र में तरह-तरह के द्रव होते हैं किंतु इसमें जीवाणु नहीं होते। यूटीआई से ग्रसित होने पर मूत्र में जीवाणु भी मौजूद होते हैं। जब मूत्राशय या गुर्दे में जीवाणु प्रवेश कर जाते हैं और बढ़ने लगते हैं तो यह स्थिति आती है।
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किडनी फेलियर
किडनी फेलियर एक मेडिकल समस्या है जो किडनी के अचानक ब्लड से विषाक्त पदार्थों और अवशेषों के फिल्टर करने में असमर्थ होने के कारण होती है। यूरीन से संबंधित हर तरह के इंफेक्शन किडनी पर बुरा असर डालते हैं। बॉडी में यूरिया और क्रियटिनीन दोनों तत्व ज्यादा बढ़ने की वजह से यूरीन के साथ बॉडी से बाहर नहीं निकल पाते हैं, जिसके कारण ब्लड की मात्रा बढ़ने लगती है। भूख कम लगना, मितली व उल्टी आना, कमजोरी लगना, थकान होना सामान्य से कम पेशाब आना, ऊतकों में तरल पदार्थ रुकने से सूजन आना आदि इसके लक्षण हैं।
यूरीन का बदलता है रंग
बहुत देर यूरीन को रोकने से यूरीन का रंग भी बदलने लगता है। ऐसा संक्रमण के कारण भी होता है। इसके अलावा बीटरूट, बेरीज, जामुन, शतवारी जैसे कुछ खाद्य पदार्थ के कारण भी यूरीन का रंग प्रभावित होता है। विटामिन बी यूरीन के रंग को हरे और शलजम लाल रंग में बदल देता है।
मांसपेशियां होती हैं कमजोर
दबाव के बाद भी यदि आप तीन से चार मिनट तक पेशाब रोकते हैं तो यूरिन के टॉक्सिक तत्व किडनी में वापस चले जाते हैं, जिसे रिटेंशन ऑफ यूरिन कहते हैं। इसके अलावा यूरीन बार-बार रोकने से ब्लैडर की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं। इससे यूरीन करने की क्षमता भी प्रभावित होती है।