क्रैनबेरी है लाजवाब ! महिलाओं में UTI के दोबारा होने के जोखिम को करती है कम
क्रैनबेरी को सामान्य रूप से स्वस्थ महिलाओं में यूटीआई की पुनरावृत्ति को रोकने के नॉन-एंटीबायोटिक विकल्प के रूप में उपयोग में लाया जा सकता है।
मूत्रप्रणाली के किसी भी हिस्से में होने वाले इंफेक्शन को मूत्र पथ में संक्रमण कहा जाता है और इसे अंग्रेजी में यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन और यूटीआई के नाम से जाना जाता है। मूत्राशय में होने वाले संक्रमण यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन का सबसे आम प्रकार होता है और इसके मामले भी काफी देखे जाते हैं। वहीं किडनी में होने वाला संक्रमण जिसे पायलोनेफ्राइटिस भी कहा जाता है, वह भी मूत्र पथ में संक्रमण का एक प्रकार है और इसके मामले भी काफी कम देखे जाते हैं। यूटीआई एक आम समस्या है और विशेष रूप से महिलाओं में इसके मामले काफी देखे जाते हैं। लगभग आधी से ज्यादा महिलाओं को अपने जीवन में एक बार मूत्र पथ में संक्रमण जरूर होता है। मूत्र पथ में संक्रमण के बारे में माना जाता है, कि यह समस्या ठीक हो जाती है लेकिन कई बार इससे गंभीर जटिलताएं भी पैदा हो सकती हैं।
आंकड़ों के अनुसार यूटीआई एक प्रचलित प्रसारित संक्रमण है, जो हर साल लगभग 15 करोड़ लोगों को प्रभावित करता है। हर तीन में से एक महिला 24 साल की उम्र से पहले ही मूत्र पथ में संक्रमण से संक्रमित हो जाती है और वहीं लगभग 50 फीसद महिलाएं 35 साल से पहले जीवन में एक बार यूटीआई से ग्रसित हो जाती हैं। वहीं मूत्र पथ में संक्रमण से संक्रमित होने वाली 30 प्रतिशत महिलाएं ऐसी भी हैं, जिन्हें यह संक्रमण फिर से हो जाता है जिसे आरयूटीआई (rUTI) कहा जाता है।
संक्रमण ने आपके मूत्र पथ का कौन सा हिस्सा प्रभावित किया है, उसके आधार पर मूत्र पथ में संक्रमण को चार अलग-अलग प्रकारों में रखा गया है -
पेशाब करते समय तीव्र जलन व दर्द महसूस होना मूत्र पथ में संक्रमण का सबसे मुख्य प्रकार है। इसके साथ-साथ पेट के किसी हिस्से में दर्द होना और कभी-कभी पीठ में दर्द भी महसूस हो सकता है। पेशाब करने की तीव्र इच्छा होना और सिर्फ कुछ ही बूंदें निकल पाना भी मूत्र पथ में संक्रमण एक महत्वपूर्ण लक्षण हो सकता है। इसके अलावा आपको शरीर में हल्का दर्द, बुखार और थकान जैसे लक्षण भी देखने को मिल सकते हैं। मूत्र पथ में संक्रमण होने पर विकसित होने वाले अन्य लक्षणों में आमतौर पर निम्न शामिल हैं -
सरल शब्दों में कहें तो मूत्र पथ में संक्रमण को ब्लैडर इंफेक्शन के रूप जाना जाता है। यह आमतौर पर संक्रमण फैलाने वाले सूक्ष्म जीव मूत्र पथ में घुस जाने के कारण होता है। मूत्र पथ में घुस कर ये रोगाणु अपनी संख्या बढ़ाने लग जाते हैं और फिर उसके बाद संक्रमण फैलना शुरू हो जाता है। मूत्र पथ में संक्रमण काफी दर्दनाक और परेशान कर देने वाली समस्या है और अगर इसका समय रहते इलाज न किया जाए तो यह गुर्दों को प्रभावित कर सकती है।
मूत्र प्रणाली उन अंगों से मिलकर बनी है, जो पेशाब को शरीर से बाहर निकालने में मदद करते हैं इसमें मुख्य रूप से गुर्दे, मूत्रवाहिनी, मूत्राशय और मूत्रमार्ग शामिल हैं। मूत्र पथ में संक्रमण का कारण बनने वाले रोगाणु आमतौर पर मूत्रमार्ग के माध्यम से मूत्र प्रणाली तक पहुंचते है और फिर संक्रमण फैला देते हैं।
मूत्र पथ में संक्रमण का कारण बनने वाले ज्यादातर प्रकार के रोगाणु आमतौर पर मानव मल में ही पाए जाते हैं। इसलिए ये रोगाणु किसी व्यक्ति की आंतों में या गुदा के आसपास होना भी एक सामान्य बात है। जब ये रोगाणु किसी तरह से मूत्र प्रणाली तक पहुंच जाते हैं, तो फिर संक्रमण फैलने लग जाता है।
पुरुषों से ज्यादा महिलाओं में यूटीआई के मामले देखे जाते हैं और ऐसा इसलिए क्योंकि महिलाओं के मूत्रमार्ग का आकार पुरुषों से काफी छोटा होता है। पुरुषों के मूत्रमार्ग की लंबाई लगभग 20 सेंटीमीटर होती है जबकि महिलाओं में सिर्फ 4 सेंटीमीटर का मूत्रमार्ग होता है और इसलिए महिलाओं के मूत्र पथ में रोगाणुओं का पहुंचना काफी आसान रहता है। वहीं बुजुर्ग व्यक्ति और बच्चों को भी यूटीआई होना का खतरा थोड़ा ज्यादा रहता है। अल्जाइमर रोग से ग्रसित व्यक्तियों में यूटीआई होने का खतरा काफी अधिक देखा गया है। मूत्र पथ में संक्रमण होने के निम्न जोखिम कारक हैं -
यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन का निदान आमतौर पर मरीज को महसूस हो रहे लक्षणों के आधार पर ही किया जाता है। यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन के निदान के दौरान डॉक्टर आपको सबसे पहले यूरिन टेस्ट कराने की सलाह देते हैं। इस टेस्ट की मदद से यूरिन में खून या पस की मौजूदगी का पता लगाया जा सकता है। आवश्यकता के अनुसार डॉक्टर आपको यूरिन कल्चर कराने की सलाह भी दे सकते हैं, जिसमें संक्रमण का कारण बनने वाले रोगाणु की पहचान की जाती है, जिसकी मदद से उसे नष्ट करने की दवाओं का चुना जाता है। संक्रमण के कारण मूत्र प्रणाली में हुई क्षति व अन्य समस्याओं का पता लगाने के लिए डॉक्टर आपको निम्न टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं -
यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन का इलाज में आमतौर पर एंटीबायोटिक, एंटीपायरेटिक और पेन किलर दवाओं को इस्तेमाल में लाया जाता है। गंभीर मामलों में कुछ गंभीर मामलों में एंटीबायोटिक दवाओं को इंट्रावेनस (नसों में सुई लगाकर) से दिया जा सकता है। हालांकि, मूत्र पथ में संक्रमण का इलाज उसके प्रकार पर भी निर्भर करता है, जिसके बारे में जानकारी निम्न दी गई है -
क्रैनबेरी को सामान्य रूप से स्वस्थ महिलाओं में यूटीआई की पुनरावृत्ति को रोकने के नॉन-एंटीबायोटिक विकल्प के रूप में उपयोग में लाया जा सकता है।
यूरिन के समय खून आना किसी संक्रमण की निशानी हो सकती है।
आपको जानकार हैरानी होगी की सेक्स के दौरान भी यूटीआई का इन्फेक्शन फैल सकता है!
पुरुषों में यूटीआई दुर्लभ है लेकिन आपको बार-बार UTI होने से रोकने के लिए अपने डॉक्टर की सभी बातें मानें।
क्रैनबेरी को सामान्य रूप से स्वस्थ महिलाओं में यूटीआई की पुनरावृत्ति को रोकने के नॉन-एंटीबायोटिक विकल्प के रूप में उपयोग में लाया जा सकता है।
यूरिन के समय खून आना किसी संक्रमण की निशानी हो सकती है।
आपको जानकार हैरानी होगी की सेक्स के दौरान भी यूटीआई का इन्फेक्शन फैल सकता है!
पुरुषों में यूटीआई दुर्लभ है लेकिन आपको बार-बार UTI होने से रोकने के लिए अपने डॉक्टर की सभी बातें मानें।