Depression के ऐसे कारण जिनके बारे में सुनकर चौंक जाएंगे आप !

क्या आप जानते हैं कि सोशल मीडिया भी आपको डिप्रेशन दे सकता है?

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Written By: Editorial Team | Updated : March 9, 2018 3:37 PM IST

अवसाद एक दीर्घकालिक मानसिक समस्या है जो पसंदीदा खाने, फिल्म देखने या गाना सुनने से कम नहीं होती है। यह आपकी ब्रेन की केमिस्ट्री के बदलने के

कारण होती है। यह आपकी लाइफ खराब कर सकता है। अवसाद के मुख्य कारणों में जेनेटिक, हार्मोनल, मेडिकल और स्ट्रेस रिलेटेड फैक्टर शामिल हैं। लेकिन

आपको जानकार हैरानी होगी कि इसके कुछ ऐसे कारण भी हैं जिनकी जानकारी बहुत से लोगों को नहीं है। चलिए जानते हैं वो कारण क्या-क्या हैं।

1) मैग्नीशियम की कमी

जर्नल न्यूरोफर्माकोलॉजी में प्रकाशित एक अध्ययन में कहा गया है कि मैग्नीशियम की कमी हाइपोथैलेमिक-पिट्यूटरी-एड्रीनल एक्सिस के साथ गड़बड़ कर चिंता का

लेवल बढ़ा सकती है, जो स्ट्रेस, मूड और इमोशन पर आपके शरीर की प्रतिक्रिया को नियंत्रित करती है।

2) स्मोकिंग

लोग जब स्मोकिंग करते हैं, जब वो तनाव में होते हैं और लंबे समय तक स्मोकिंग करने से चिंता और अवसाद की समस्या हो सकती है। एक अध्ययन के अनुसार,

हालांकि निकोटिन शोर्ट टर्म में एक एंटीडिप्रेंटेंट के रूप में कार्य कर सकता है, लेकिन लंबे समय तक इसके इस्तेमाल से स्थिति गंभीर भी हो सकती है।

3) मौसम

सर्दियों में खासकर सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर का खतरा बढ़ जाता है लेकिन अध्ययनों से पता चलता है कि गर्मी भी आपकी मनोदशा पर प्रतिकूल प्रभाव डाल

सकती है। सर्दियों में आप सुस्त हो जाते हैं जबकि गर्मी में आपका व्यवहार में चिड़चिड़ापन आ जाता है।

4) एनिवर्सरी इफेक्ट

कुछ लोग एनिवर्सरी के आसपास गहरा दुख और चिंता महसूस करते हैं। यह पीटीएसडी से पीड़ितों और गर्भपात का अनुभव करने वाली महिलाओं में अधिक देखा

जाता है। ऐसे लोग वर्षगांठ पर अपनी दुर्दशा का अनुभव करते हैं।

5) विटामिन डी में कमी

अध्ययनों से पता चलता है कि विटामिन डी की कमी और अवसाद के बीच गहरा संबंध है। अध्ययन यह भी बताते हैं कि ठंडे प्रदेशों में रहने वाले अवसाद से अधिक

पीड़ित होते हैं।

6) सोशल मीडिया

आजकल सोशल मीडिया के कारण भी चिंता और अवसाद के मामले बढ़ रहे हैं। खासकर इनस्टाग्राम ज्यादा जिम्मेदार है। यूनाइटेड किंगडम की रॉयल सोसाइटी

फॉर पब्लिक हेल्थ द्वारा प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, इनस्टाग्राम एक 'तुलना और निराशा' जैसे स्थिति पैदा करता है। इससे लोग खुद के जीवन को दूसरे लोगों

के जीवन से तुलना करने लगते हैं और चिंता करने लगते हैं।

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अनुवादक – Sadhana Tiwari

चित्र स्रोत - Shutterstock

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