
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : October 12, 2023 10:01 PM IST
एचपीवी या ह्यूमन पैपिलोमावायरस (Human papillomavirus) एक सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन है जो रिप्रॉडक्टिव ट्रैक्ट (reproductive tract) में होता है। ऐसा अनुमान है कि एचपीवी की वैक्सीन ना लेने वाले 80 प्रतिशत लोगों में इंफेक्शन होने का रिस्क (risk of HPV infection in unvaccinated adults ) होता है। हालांकि, अधिकांश मामलों में एचपीवी इंफेक्शन 1 से 2 वर्ष में खुद ब खुद ठीक हो जाता है। लेकिन, कुछ मामलों में गम्भीर परिणाम देखने मिल सकते हैं और एचपीवी इंफेक्शन महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का कारण बन सकता है। डॉ. महेश सुलक्षणे (Dr. mahesh sulakshane,Dr.Sulakshane Multispeciality Clinic ,Hinjewadi, Pune) बता रहे हैं कि भारत में एचपीवी वैक्सीन्स कितनी कारगर हैं और क्यों कम उम्र में ही लड़कियों को एचपीवी की वैक्सीन लेनी चाहिए।
एक्सपर्ट्स के अनुसार, एचपीवी से बचाव के लिए इसका टीका लगवाना सबसे कारगर और सुरक्षित तरीका है। महिलाओं और लड़कियों को जल्द से जल्द यह वैक्सीन लेने की सलाह एक्सपर्ट्स द्वारा दी जाती है। दरअसर, एचपीवी इंफेक्शन गर्भाशय के कैंसर का एक बड़ा कारण है और वैक्सीन लगवाने से लड़कियों में इस प्रकार के कैंसर के रिस्क को कम किया जा सकता है। आंकडों के अनुसार,
सर्वाइकल कैंसर के लगभग 98.4% केसेस में एचपीवी इंफेक्शन (Human papillomavirus and cervical cancer cases ) देखा गया है।
अनल कैंसर ( anal cancer cases) के 73% मामलों में एचपीवी इंफेक्शन कारण हो सकता है।
वल्वा के कैंसर (vulvar precancer cases) के 90% हाई रिस्क मामलों में एचपीवी इंफेक्शन एक बड़ा कारण हो सकता है।
दुनियाभर में महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर के मामलों में पिछले कुछ वर्षों में बहुत तेजी से इजाफा हुआ है। वहीं, भारत दुनिया में सर्वाइकल कैंसर से पीड़ित महिलाओं की संख्या के आधार पर पांचवें नंबर पर आता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत में हर साल लगभग 123,907 महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर होता है। वहीं, लगभग 77,348 महिलाओं की मृत्यु सर्वाइकल कैंसर की वजह से हो जाती है।
कुछ स्थितियों को छोड़कर जेनाइटल एचपीवी इंफेक्शन्स को आसानी से रोका जा सकता है। नियमित सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग ( cervical cancer screening) कराने और वैक्सीनेशन की मदद से एचपीवी और इससे जुड़े अन्य इंफेक्शन्स से बचाव किया जा सकता है और इस तरीके को सबसे कारगर स्ट्रेटजी (effective strategy to prevent HPV-related infections) भी पाया गया है। एचपीवी का टीका लगाने के बाद शरीर में इंफेक्शन से सुरक्षा देने वाली एंटीबॉडीज का निर्माण होता है। भारत में उपलब्ध वैक्सीन्स, टीका लगाने के बाद होने वाले साइड-इफेक्ट्स को भी कंट्रोल करने में सक्षम हैं। 12 वर्षों तक किए गए विश्लेषण में इस वैक्सीन को सौ प्रतिशत इफेक्टिव पाया गया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि एचपीवी वैक्सीन लगवाने के बाद लगभग 14 वर्षों की सुरक्षा कवरेज मिलती है और 14 साल तक इंफेक्शन होने की आशंका कम से कम रहती है।