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Medically Verified By: Dr. Anubhav Jain
Fatty Liver vs Viral Hepatitis (Image credit : ChatGPT)
World Hepatitis Day 2026 : लिवर हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है, जो शरीर से डिटॉक्स पदार्थों को बाहर निकालने में मददगार साबित हो सकता है। इसके अलावा यह हमारे शरीर में पोषक तत्वों को स्टोर करने और मेटाबॉलिज्म को कंट्रोल करने जैसे सैकड़ों जरूरी काम करने में मददगार साबित हो सकता है। लेकिन समस्या यह है कि लिवर से जुड़ी कई बीमारियां शुरुआती चरण में बिना किसी स्पष्ट लक्षण के बढ़ती रहती हैं। इनमें फैटी लिवर डिजीज और वायरल हेपेटाइटिस सबसे आम हैं। गुरुग्राम स्थित मैक्स हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट एंड यूनिट हेड, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी डॉ. अनुभव जैन का कहना है कि फैटी लिवर और वायरल हेपेटाइटिस, दोनों ही लिवर को प्रभावित करते हैं, लेकिन इनके कारण, इंफेक्शन का तरीका, इलाज और बचाव पूरी तरह अलग हैं। आइए इस लेख में विस्तार से समझते हैं-
किसी भी व्यक्ति को फैटी लिवर तब होता है, जब लिवर में जरूरत से ज्यादा फैट जमा होने लगती है। यह समस्या मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल, शारीरिक एक्टिविटी की कमी और अधिक शराब पीने जैसी वजहों से हो सकती है। शुरुआती स्टेज में इसके लक्षण नजर नहीं आते, लेकिन समय रहते इलाज न मिलने पर यह लिवर में सूजन, फाइब्रोसिस, सिरोसिस और यहां तक कि लिवर कैंसर का कारण भी बन सकता है।

अच्छी बात यह है कि शुरुआती चरण में वजन कम करना, नियमित एक्सरसाइज, संतुलित आहार, शराब से दूरी और ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल रखना फैटी लिवर को काफी हद तक ठीक कर सकता है। अमेरिकल असोशिएशन फॉर द स्टडी लिवर डिजीज के अनुसार, 7-10 प्रतिशत वजन कम करने से फैटी लिवर और लिवर में सूजन में महत्वपूर्ण सुधार देखा जा सकता है।
वायरल हेपेटाइटिस लिवर में होने वाला एक संक्रमण है, जो हेपेटाइटिस वायरस के कारण होता है। यह वायरस लिवर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है और सूजन पैदा करता है। अगर समय पर पहचान और इलाज न किया जाए, तो कुछ प्रकार के वायरल हेपेटाइटिस लंबे समय तक रहकर लिवर सिरोसिस, लिवर फेलियर या लिवर कैंसर जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, हर साल लगभग 13 लाख लोगों की मौत हेपेटाइटिस B और C से जुड़ी जटिलताओं के कारण होती है।
फैटी लिवर और वायरल हेपेटाइटिस के बीच के अंतर के टेबल के जरिए समझते हैं-
| फैटी लिवर | वायरल हेपेटाइटिस |
| लिवर में जरूरत से ज्यादा वसा जमा होना, फैटी लिवर की स्थिति होती है। | हेपेटाइटिस A, B, C, D या E वायरस का संक्रमण वायरस हेपेटाइटिस होता हैष |
| यह संक्रामक नहीं होता है। | वायरल हेपेटाइटिस संक्रामक होता है। मुख्य रूप से हेपेटाइटिस A, B, C, D और E अलग-अलग तरीकों से फैलते हैं |
| मोटापा, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल, शराब का सेवन, कम शारीरिक गतिविधि के कारण यह स्थिति होती हैष | संक्रमित खून, दूषित भोजन-पानी, असुरक्षित यौन संबंध, संक्रमित सुई या मां से बच्चे में संक्रमण के कारण यह परेशानी हो सकती है। |
| फैटी लिवर के लक्षण अक्सर नहीं दिखाई देते हैंष | कई बार लक्षण नहीं होते, लेकिन पीलिया, बुखार, थकान और भूख कम लग सकती है। |
| वजन कम करना, एक्सरसाइज, संतुलित आहार और जोखिम कारकों को कंट्रोल करके फैटी लिवर की परेशानी को कम किया जा सकता है।। | वायरस के प्रकार के अनुसार एंटीवायरल दवाएं, निगरानी और कुछ मामलों में लंबे समय तक इलाज चलता है। |
| शुरुआती स्टेज में जीवनशैली सुधारने से काफी हद तक रिवर्स हो सकता है। | हेपेटाइटिस A और E अक्सर अपने आप ठीक हो जाते हैं। हेपेटाइटिस C का इलाज संभव है, जबकि हेपेटाइटिस B को दवाओं से कंट्रोल किया जा सकता है। |
| लंबे समय तक फैटी लिवर होने से NASH, फाइब्रोसिस, सिरोसिस और लिवर कैंसर का रिस्क बढ़ जाता है। | क्रॉनिक हेपेटाइटिस B और C से सिरोसिस और लिवर कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। |
डॉ. अनुभव जैन बताते हैं कि दोनों बीमारियां गंभीर हो सकती हैं, लेकिन खतरा इस बात पर निर्भर करता है कि बीमारी किस स्टेज में है। फैटी लिवर अगर वर्षों तक अनदेखा किया जाए, तो यह नॉन-अल्कोहॉलिक स्टीटोहेपेटाइटिस (NASH), फाइब्रोसिस और सिरोसिस में बदल सकता है। वहीं, क्रॉनिक हेपेटाइटिस B और C लंबे समय तक बिना लक्षण के लिवर को नुकसान पहुंचाते रहते हैं और लिवर कैंसर का जोखिम बढ़ा देते हैं।
फैटी लिवर से बचने के लिए स्वस्थ वजन बनाए रखना, रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम करना, प्रोसेस्ड और मीठे खाद्य पदार्थ कम खाना, शराब से बचना तथा डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखना जरूरी है।
वहीं, वायरल हेपेटाइटिस से बचने के लिए हेपेटाइटिस A और B का टीकाकरण, साफ भोजन और पानी, सुरक्षित यौन संबंध, संक्रमित सुई या ब्लेड का इस्तेमाल न करना और जरूरत पड़ने पर समय पर स्क्रीनिंग कराना बेहद जरूरी है।
Disclaimer : यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर की सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। लिवर से जुड़ी किसी भी समस्या, लक्षण या बीमारी के लिए योग्य चिकित्सक से परामर्श जरूर लें।