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मिडिल ईस्ट में लंबे समय से युद्ध चल रहा है। इस बात से हम सभी काफी अच्छे से वाकिफ हैं। लेकिन इन तनाव की खबरों के बीच ईरान के नए सुप्रीम लीडर के स्वास्थ्य को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। मीडिया में आई खबरों के मुताबिक, ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई की स्थिति काफी गंभीर है, तो वर्तमान में बेहोश हैं। बताया जा रहा है कि फिलहाल मोजतबा खामेनेई का कोम शहर में इलाज चल रहा है, वे अभी भी बेहोशी की हालत में हैं। हालांकि, आधिकारिक तौर पर उनके स्वास्थ्य को लेकर कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। इस खबर के सामने आते ही लोगों के मन में कोमा को लेकर कई तरह से सवाल उठ रहे हैं। कई लोग कोमा और गहरी नींद के बीच का फर्क नहीं समझ पाते हैं। इस विषय के बारे में विस्तार से जानने के लिए हमने हैदराबाद स्थित यशोदा हॉस्पिटल की सीनियर कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट और क्लिनिकल डायरेक्टर (PDMDRC) डॉ. रुक्मिणी मृदुला कंदादई से बातचीत की है। आइए डॉक्टर से जानते हैं कोमा क्या है और लोग कोमा में क्यों जानते हैं, इस विषय के बारे में विस्तार से जानते हैं-
हैदराबाद स्थित यशोदा हॉस्पिटल की सीनियर कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट और क्लिनिकल डायरेक्टर (PDMDRC) डॉ. रुक्मिणी मृदुला कंदादई का कहना है कि कोमा सिर्फ गहरी नींद नहीं है, बल्कि यह मस्तिष्क की कार्यप्रणाली का एक गंभीर और कॉम्प्लेक्स ऑब्सटेकल है। इस अवस्था में व्यक्ति को जगाया नहीं जा सकता और न ही वह किसी बाहरी उत्तेजना पर प्रतिक्रिया दे सकता है। कोमा में नींद और जागने का चक्र भी खत्म हो जाता है।
हमारा ब्रेन शरीर का कमांड सेंटर है और कोमा की स्थिति में यह एक तरह से सर्वाइवल मोड में चला जाता है। कोमा का मुख्य कारण मस्तिष्क के एक महत्वपूर्ण हिस्से में रेटिकुलर एक्टिवेटिंग सिस्टम (RAS) में गड़बड़ी होता है। यह सिस्टम ब्रेनस्टेम में स्थित होता है और हमें जागृत एवं सचेत बनाए रखने में मदद करता है।
डॉक्टर कहती हैं कि जब किसी कारण, जैसे- सिर में चोट, स्ट्रोक, संक्रमण या लो ब्लड शुगर जैसी मेटाबॉलिक समस्या, इस सिस्टम के कार्यों को बाधित करता है, तो मस्तिष्क के कॉर्टेक्स तक सिग्नल नहीं पहुंच पाता है, जिसकी वजह से व्यक्ति कोमा में चला जाता है।
डॉक्टर कहती हैं कि लंबे समय तक बेहोशी के दौरान हमारा ब्रेन आराम नहीं करता है, बल्कि वे लगातार संघर्ष करता है, जो निम्न हैं-
डॉक्टर कहती हैं कि अगर कोमा कई दिनों या हफ्तों तक बना रहता है, तो जोखिम और अधिक बढ़ जाते हैं, जिससे कुछ परेशानियां होने का खतरा रहता है, जैसे-
न्यूरोलॉजिस्ट कहती हैं कि आज के समय में आधुनिक तकनीकें डॉक्टर्स को कोमा के मरीजों की स्थिति को समझने और संभालने में काफी ज्यादा मदद करती हैं।
डॉक्टर कहती हैं कि कोमा से बाहर आने की संभावना हर मरीज में अलग-अलग होती है। कुछ लोग धीरे-धीरे ठीक होकर सामान्य जीवन में लौट आते हैं, जिसमें न्यूरोप्लास्टिसिटी यानि मस्तिष्क की खुद को दोबारा व्यवस्थित करने की क्षमता अहम भूमिका निभाती है। वहीं, कुछ मरीज वेजिटेटिव स्टेट या मिनिमली कॉन्शियस स्टेट में भी जा सकते हैं।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।