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Written By: Pallavi Kumari | Updated : June 23, 2022 12:54 PM IST
विटामिन बी (vitamin b in hindi) पानी में घुलनशील विटामिन होते हैं जो कई शारीरिक कामों में जरूरी भूमिका (vitamin B function in body) निभाते हैं। ये सेलुलर मेटाबोलिज्म और रेड ब्लड सेल्स (RBC) को बनाने में मदद करते हैं। लेकिन विटामिन बी कई प्रकार हैं और इसके विभिन्न प्रकार के शरीर में अलग-अलग काम होते हैं। जैसे कि कोई विटामिन कार्बोहाइड्रेट को तोड़ने और न्यूरोट्रांसमीटर को सही रखने में मदद करता है। तो, कोई फैट के उत्पादन में मदद करता है। इसके अलावा विटामिन बी का एक प्रकार प्रेग्नेंसी के दौरान बच्चों में डीएनए बनाने और तंत्रिका संबंधी कार्यों के विकास में भी मदद करता है। तो आइए आज जानते हैं विटामिन बी के प्रकार और फायदे (vitamin b benefits in hindi)
विटामिन बी 1को थायमिन (Thiamin) कहते हैं। यह ग्लूकोज को ऊर्जा में बदलने में मदद करता है और तंत्रिका कार्य यानी कि न्यूरल फंक्शन को बेहतर बनाने में मदद करता है।
थायमिन की कमी आमतौर पर उन देशों में पाई जाती है जहां लोग ज्यादा सफेद चावल खाते हैं। साथ ही ये अत्यधिक शराब के सेवन और या बहुत खराब आहार के कारण होती है। ऐसे में शरीर में थायमिन की कमी के लक्षण (vitamin b1 deficiency symptoms) नजर आते हैं जैसे कि
-भ्रम होना
-चिड़चिड़ापन
-हाथ या पैर में समन्वय की कमी या चलने में कठिनाई
-सुस्ती
-थकान और मांसपेशियों में कमजोरी
-हाथों और पैरों में सनसनी
-बेरीबेरी रोग (Beriberi)
- हृदय, मांसपेशियों, जठरांत्र और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी दूसरी समस्याएं
विटामिन B1 की कमी को दूर करने के लिए अनाज, खमीर वाले फूड्स, बीन्स, नट्स और मीट का सेवन करें। इसके अलाला डॉक्टर विटामिन बी-कॉम्प्लेक्स विटामिन भी आपको दे सकता है।
विटामिन बी 2 को राइबोफ्लेविनम(Riboflavin) कहा जाता है और इसका काम मुख्य रूप से ऊर्जा उत्पादन करना है जो कि आंखों को स्वस्थ रखने और त्वचा के स्वास्थ्य में मदद करता है।
राइबोफ्लेविन की कमी वाले लोगों में वे लोग शामिल हैं जो अत्यधिक मात्रा में शराब का सेवन करते हैं और जो दूध या दूध उत्पादों का सेवन नहीं करते हैं। इसके अलावा जब व्यक्ति थायराइड जैसे अंतःस्रावी ग्रंथि विकारों से पीड़ित होता है, विटामिन बी2 की कमी से मुंह और गले में सूजन जैसी समस्याएं होती हैं। इसलिए शरीर में विटामिन बी2 की कमी को दूर करने के लिए दूध, दही, छेना,साबुत अनाज की ब्रेड और अनाज,अंडे का सफेद हिस्सा,पत्तेदार हरी सब्जियां और मीट आदि का सेवन करें।
विटामिन बी 3 को नियासिन (Niacin) भी कहते हैं। ये कार्बोहाइड्रेट, फैट और अल्कोहल को ऊर्जा में बदलने में मदद करता है। यह त्वचा के स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करता है और तंत्रिका और पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में जरूर भूमिका निभाता है।
नियासिन की कमी (पेलाग्रा) हो सकता है। दरअसल, जो लोग अत्यधिक मात्रा में शराब पीते हैं या लगभग विशेष रूप से मकई पर आधारित आहार पर रहते हैं, उन्हें पेलाग्रा का खतरा सबसे अधिक होता है। इसके कारण पाचन समस्याएं, डिमेंशिया, डायरिया और डर्मेटाइटिस जैसी बीमारियां हो सकती हैं। इसलिए शरीर में विटामिन बी3 की कमी को दूर करने के लिए नियासिन के अच्छे स्रोत यानी मांस,मछली, दूध, अंडे, साबुत अनाज, मशरूम और सभी प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करें।
विटामिन बी 5 को पैंटोथेनिक एसिड (Pantothenic acid) कहते हैं। ये पैंटोथेनिक एसिड कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, फैट और अल्कोहल के चयापचय के साथ-साथ लाल रक्त कोशिकाओं और स्टेरॉयड हार्मोन का उत्पादन करने के लिए जरूरी है।
विटामिन बी5 की कमी से अनिद्रा, सिरदर्द और चिड़चिड़े व्यवहार का अनुभव होता है। इसलिए विटामिन बी5 की कमी को दूर करने के लिए मांस, दूध, अंडे, फर्मेटेंड फूड्स, मूंगफली और फलियों का सेवन करें।
विटामिन बी6 (pyridoxine) कहा जाता है। ये प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट के मेटाबोलिज्म में मदद करती है और रेड ब्लड सेल्स के निर्माण और मस्तिष्क के कुछ कैमिकल फंक्शन में मदद करती है। यह मस्तिष्क की प्रक्रियाओं, विकास, प्रतिरक्षा कार्य और स्टेरॉयड हार्मोन गतिविधि को प्रभावित करता है।
विटामिन बी6 की कमी का गर्भनिरोधक गोली लेने वाली महिलाओं , बुजुर्गों और थायराइड रोग वाले लोगों को सबसे अधिक खतरा होता है। साथ ही ये तंत्रिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए विटामिन बी5 की कमी को दूर करने के लिए फलियां, हरी और पत्तेदार सब्जियां, मछली और फलों का सेवन करें।
Vitamin B7 को बायोटिन (Biotin) भी कहा जाता है। बायोटिन (Biotin) ऊर्जा चयापचय, फैट सिंथेसिस, अमीनो एसिड चयापचय और ग्लाइकोजन संश्लेषण के लिए जरूरी है। हाई बायोटिन का सेवन खून में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ाने में योगदान कर सकता है।
बायोटिन की कमी से बालों का पतला होना, पपड़ीदार रैश, आंखें और अवसाद जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसकी कमी को दूर करने के लिए फूलगोभी, अंडे की जर्दी,मूंगफली, मुर्गा और मशरूम आदि का सेवन करें।
विटामिन बी 9 को फोलेट या फोलिक एसिड(Folate or folic acid) भी कहा जाता है। फोलेट रेड ब्लड सेल्स (RBCs) को बनाने के लिए जरूरी होता है। फोलिक एसिड फूज फोर्टिफिकेशन में उपयोग किया जाता है, जो शरीर के चारों ओर ऑक्सीजन ले जाती है। प्रेगनेंसी के दौरान यह भ्रूण के तंत्रिका तंत्र के विकास के साथ-साथ डीएनए संश्लेषण और कोशिका वृद्धि में मदद करता है। बच्चे पैदा करने वाली उम्र की महिलाओं को इस कारण से फोलेट से भरपूर आहार की आवश्यकता होती है। ऐसे में डॉक्टर फोलेट से भरपूर आहार यानी हरे पत्ते वाली सब्जियां, फलियां, बीज, अंडे, अनाज और खट्टे फल खाने का सुझाव देते हैं।
विटामिन बी 12 को सायनोकोबालामिन (Cyanocobalamin) भी कहा जाता है। ये माइलिन के आसपास की तंत्रिका कोशिकाओं, मानसिक क्षमता, लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) के निर्माण और ऊर्जा पैदा करने के लिए कुछ फैटी एसिड और अमीनो एसिड के टूटने का उत्पादन और रखरखाव करने में मदद करता है। इसकी कमी से माताओं के स्तनपान करने वाले बच्चे सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। साथ ही बुजुर्गों में इसकी कमी से दिमागी समस्याएं देखी जाती हैं। इसकी कमी को दूर करने के लिए मांस,दूध, पनीर और अंडे आदि का सेवन करें।