
अंजू रावत
अंजू रावत एक अनुभवी हेल्थ, फिटनेस, रिलेशनशिप, ब्यूटी और लाइफस्टाइल लेखक हैं, जिन्हें इन विषयों पर लिखने ... Read More
Written By: Anju Rawat | Updated : March 24, 2025 9:43 AM IST
TB ki Janch Kaise Hoti Hai:टीबी को क्षय रोग भी कहा जाता है। आपको बता दें कि टीबी (Tuberculosis) एक संक्रामक बीमारी है। यानी यह एक से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है। जब संक्रमित व्यक्ति खांसता या छींकता है, तो इस दौरान टीबी के बैक्टीरिया फैल जाते हैं। अगर स्वस्थ व्यक्ति इन बैक्टीरिया के संपर्क में आता है, तो वह भी टीबी संक्रमण की चपेट (Tuberculosis in Hindi) में आ सकता है। यह बीमारी माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक बैक्टीरिया के कारण होती है। वैसे तो टीबी आमतौर पर फेफड़ों को प्रभावित करता है। लेकिन, यह शरीर के कई अन्य अंगों को भी अपनी चपेट में ले सकता है। एक समय था, जब टीबी की बीमारी बेहद गंभीर होती थी और इसका कोई इलाज नहीं था। हालांकि, आज के समय में टीबी का इलाज पूरी तरह से संभव है। अब टीबी की बीमारी को पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है। दुनियाभर के लोगों को टीबी रोग के बारे में जागरूक करने के उद्देश्य से हर साल विश्व टीबी दिवस (World TB Day) मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य टीबी के खिलाफ लड़ाई तेज करना है और दुनिया को टीबी मुक्त करना है।
आपको बता दें कि लंबे समय तक खांसी रहने पर डॉक्टर टीबी की जांच करवाने की सलाह दे सकते हैं। इसके अलावा, लगातार वजन कम होना, बुखार, रात में पसीना आना, खांसी के साथ खून निकलना और हर वक्त थकान रहना, इन लक्षणों (TB ke Lakshan) के नजर आने पर डॉक्टर टीबी की जांच करवा सकते हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि टीबी की जांच कैसे होती है? आइए, फैमिली फिजिशियन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष और जनरल फिजिशियन डॉ. रमन कुमार से जानते हैं टीबी की जांच के प्रकार (Types of TB Test in Hindi)-
टीबी की बीमारी की जांच ब्लड टेस्ट से किया जाता है। इसमें व्यक्ति का रक्त का नमूना (ब्लड सैंपल) लिया जाता है। फिर ब्लड सैंपल को टीबी के बैक्टीरिया (TB Bacteria) में पाए जाने वाले एंटीजन (Antigen) के साथ इंजेक्ट किया जाता है। अगर किसी व्यक्ति को टीबी की बीमारी होती है, तो उसकी कोशिकाएं इंटरफेरॉन-गामा का उत्पादन करती है। इसमें व्यक्ति की प्रतिरक्षा प्रणाली की प्रतिक्रिया को भी मापा जाता है।
सिर्फ ब्लड टेस्ट से ही नहीं, स्किन टेस्ट से भी टीबी की बीमारी का पता लगाया जा सकता है। यह टेस्ट बेहद सस्ता और आसान होता है। इससे भी टीबी संक्रमण का पता लगाया जा सकता है। इसमें ट्यूबरकुलिन नामक पदार्थ को स्किन में इंजेक्ट किया जाता है। फिर 2-3 दिन बाद, इंजेक्ट किए गए जगह पर इस पदार्थ के रिएक्शन की जांच की जाती है। अगर 10 मिलीमीटर या उससे ज्यादा की जगह पर रेडनेस या सूजन होती है, तो इसे पॉजिटिव माना जाता है।
एक्स-रे की मदद से भी टीबी की जांच का पता लगाया जा सकता है। अगर ब्लड टेस्ट और स्किन टेस्ट से टीबी का संक्रमण पॉजिटिव आता है, तो इसके बाद डॉक्टर छाती का एक्स-रे करवाने की सलाह दे सकते हैं। एक्स-रे की मदद से फेफड़ों की स्थिति का पता लगाया जाता है। अगर छाती में किसी तरह का बदलाव नजर आता है, तो यह टीबी का संकेत हो सकता है। एक्स-रे भी टीबी का पता लगाने में अहम भूमिका निभाता है।
कई बार डॉक्टर टीबी संक्रमण की जांच करवाने के लिए बलगम की जांच भी करवा सकते हैं। दरअसल, अगर किसी व्यक्ति को टीबी होता है, तो उसके बलगम में टीबी के बैक्टीरिया पाए जाते हैं। माइक्रोस्कोप की मदद से बलगम में टीबी के बैक्टीरिया को आसानी से देखा जा सकता है। इससे टीबी की बीमारी का पता लगाने में मदद मिलती है।
Disclaimer : प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।