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किडनी में कौन-कौन सी बीमारियां होती हैं? जानें इनके लक्षण और कारण

Kidney Diseases in Hindi: किडनी हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है। इसका सही तरीके से काम करना बहुत जरूरी है। जब किडनी में गड़बड़ी आती है, तो कई रोग विकसित होने लगते हैं।

किडनी में कौन-कौन सी बीमारियां होती हैं? जानें इनके लक्षण और कारण
VerifiedMedically Reviewed By: Dr. Vikas Agarwal

Written by Anju Rawat |Published : March 10, 2026 9:32 AM IST

Kidney Diseases in Hindi: किडनी हमारे शरीर का एक बेहद महत्वपूर्ण अंग है, जो खून को फिल्टर करता है। किडनी शरीर से विषैले पदार्थों और अतिरिक्त पानी को बाहर निकालने का काम करती है। किडनी, शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखने, ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने और रेड ब्लड सेल्स के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। लेकिन, आज की बदलती जीवनशैली, अनियमित खान-पान और कई स्वास्थ्य समस्याओं के कारण किडनी से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। आपको बता दें कि किडनी की बीमारी धीरे-धीरे विकसित होती है और शुरुआती चरण में इसके लक्षण स्पष्ट नहीं दिखाई देते हैं। यही कारण है कि कई बार मरीज को बीमारी का पता तब चलता है, जब किडनी को काफी नुकसान पहुंच चुका होता है। इसलिए किडनी से जुड़ी आम बीमारियों, उनके लक्षणों और कारणों के बारे में जागरूक होना बहुत जरूरी है। आइए, आकाश हेल्थकेयर के डायरेक्टर एंड एचओडी-रोबोटिक यूरोलॉजी डॉ. विकास अग्रवाल (Dr. Vikas Agarwal, Director & HOD - Robotic Urology, Aakash Healthcare) से जानते हैं कि किडनी में कौन-कौन सी बीमारियां होती हैं? 

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1. क्रॉनिक किडनी डिजीज

क्रोनिक किडनी डिसीज, गुर्दे की एक गंभीर स्थिति है। इसमें किडनी की कार्यक्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है। यह किडनी की सबसे आम, लेकिन गंभीर बीमारी है। इस रोग की वजह से किडनी के कार्य करने की क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है। समय के साथ, किडनी खून को ठीक से फिल्टर नहीं कर पाती हैं। इसकी वजह से कई अन्य तरह के रोग भी विकसित होने लगते हैं। आपको बता दें कि यह रोग कई कारणों से हो सकता है, इसमें

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क्रोनिक किडनी डिजीज के लक्षण

  • इस रोग की वजह से पैरों और टखनों में सूजन आ सकती है। दरअसल, ऐसा शरीर में पानी का स्तर संतुलित न होने के कारण होता है।
  • क्रोनिक किडनी डिजीज की वजह से व्यक्ति को थकान और कमजोरी हो सकती है। ऐसा रक्त में विषाक्त पदार्थों जमा होने की वजह से होता है।
  • बार-बार पेशाब आना और पेशाब में झाग आना भी क्रोनिक किडनी रोग का संकेत हो सकता है।
  • इस रोग की वजह से जी मिचलाने और उल्टी आने जैसा महसूस हो सकता है। भूख में कमी की समस्या भी होने लगती है।
  • क्रोनिक किडनी डिजीज की वजह से फेफड़ों में तरल पदार्थ जमा हो जाता है। इससे रोगी को सांस लेने में मुश्किल हो सकती है।
  • इस रोग से पीड़ित व्यक्ति को त्वचा पर तेज खुजली और इरिटेशन हो सकती है। इस स्थिति में ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है।
इस रोग का समय पर इलाज बहुत जरूरी है। अन्यथा, यह स्थिति किडनी फेलियर तक पहुंच सकती है। फिर डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ सकती है।

2. किडनी में पथरी

किडनी स्टोन यानी पथरी एक आम समस्या है। यह समस्या तब होती है, जब शरीर में मौजूद खनिज और लवण जमा होकर क्रिस्टल का रूप ले लेते हैं। ये क्रिस्टल पेशाब के रास्ते में रुकावट पैदा करते हैं। इसलिए किडनी स्टोन की वजह से पेशाब से जुड़ी कई समस्याएं पैदा होने लगती हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, भारत में गर्म मौसम और कम पानी पीने की आदत की वजह से किडनी स्टोन के मामले काफी ज्यादा देखने को मिलते हैं। किडनी में स्टोन कई कारणों से हो सकते हैं, इसमें शामिल हैं-

  • कम मात्रा में पानी पीना
  • ज्यादा नमक और प्रोटीन वाले भोजन का सेवन करना
  • बार-बार मूत्र संक्रमण होना
  • आनुवंशिक कारण

किडनी स्टोन के लक्षण

  • किडनी में पथरी पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द का कारण बन सकता है।
  • इसकी वजह से पीठ और बगल एरिया में भी दर्द हो सकता है। यह दर्द जांघों तक पहुंच सकता है।
  • किडनी स्टोन की वजह से पेशाब में झाग (प्रोटीन) नजर आ सकता है।
  • बार-बार पेशाब आना, पेशाब करते समय जलन या दर्द होना भी किडनी स्टोन के संकेत हो सकते हैं।
  • अगर पेशाब का रंग गुलाबी, लाल या भूरा नजर आ रहा है, तो यह भी किडनी में पथरी का संकेत हो सकते हैं।
  • किडनी स्टोन की वजह से पेशाब से दुर्गंध आ सकती है।
  • किडनी स्टोन की वजह से व्यक्ति को जी मिचलाने या उल्टी आने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
छोटे स्टोन कई बार अपने आप निकल जाते हैं। लेकिन बड़े स्टोन के लिए दवाइयों या सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए अगर आपको किडनी स्टोन के संकेत नजर आ रहे हैं, तो डॉक्टर से जरूर मिलें।

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3. किडनी इंफेक्शन

किडनी इंफेक्शन आमतौर पर तब होता है, जब मूत्र मार्ग का संक्रमण ऊपर की तरफ फैलकर किडनी तक पहुंच जाता है। अगर इसका समय पर इलाज न किया जाए, तो यह गंभीर रूप ले सकता है और इस स्थिति में रोगी को कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं से जूझना पड़ सकता है। इतना ही नहीं, समय पर इलाज न मिलने पर यह जानलेवा भी हो सकता है। किडनी इन्फेक्शन को मेडिकल भाषा में पायलोनेफ्राइटिस कहा जाता है। यह एक गंभीर बैक्टीरियल इन्फेक्शन है, जो मूत्रमार्ग या ब्लैडर से शुरू होता है और एक या दोनों किडनी तक फैल जाता है। यह आमतौर पर E. coli बैक्टीरिया के कारण होता है। किडनी इंफेक्शन के कई कारण होते हैं-

  • बार-बार यूटीआई होना
  • कमजोर इम्युनिटी होना
  • डायबिटीज या हाई ब्लड शुगर
  • पेशाब को लंबे समय तक रोककर रखना

किडनी इन्फेक्शन के लक्षण

  • किडनी इंफेक्शन की वजह से आपको तेज बुखार आ सकता है। अगर तेज बुखार के साथ कंपकंपी महसूस हो रही है, तो इस संकेत को नजरअंदाज न करें। यह किडनी इंफेक्शन की वजह से हो सकता है।
  • किडनी इंफेक्शन होने पर आपको पीठ के निचले हिस्से और पसलियों के नीचे दर्द का अनुभव हो सकता है। अगर ये संकेत महसूस हो, तो डॉक्टर से जरूर मिलें और अल्ट्रासाउंड कराएं।
  • किडनी इंफेक्शन पेशाब से जुड़ी समस्याओं का कारण बन सकता है। इसकी वजह से बार-बार पेशाब आने, पेशाब में जलन, पेशाब में झाग और पेशाब में बदबू आने जैसे संकेत नजर आ सकते हैं।

    किडनी इंफेक्शन मतली और उल्टी जैसे संकेत भी पैदा करता है। अगर आपको पेशाब से जुड़ी समस्याओं के साथ ही, उल्टी या मतली जैसा

  • महसूस हो तो इन संकेतों की अनदेखी न करें।
  • बिना ज्यादा मेहनत के अगर थकान और कमजोरी का अनुभव हो रहा है, तो इस संकेत को नजरअंदाज न करें। यह किडनी इंफेक्शन की तरफ इशारा कर सकता है।
किडनी इंफेक्शन का इलाज आमतौर पर एंटीबायोटिक्स से किया जाता है। लेकिन, गंभीर मामलों में अस्पताल में भर्ती की जरूरत पड़ सकती है। कुछ दुर्लभ मामलों में किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ सकती है।

4.  किडनी फेलियर

किडनी फेलियर एक ऐसी स्थिति है, जिसमें किडनी पूरी तरह से काम करना बंद कर देती है। इस स्थिति में शरीर से अपशिष्ट पदार्थ बाहर नहीं निकल पाते हैं और शरीर में ही जमा रहते हैं। किडनी फेलियर अचानक हो सकता है या धीरे-धीरे विकसित हो सकता है। कई मामलों में किडनी की कार्यक्षमता इतनी कम हो जाती है कि व्यक्ति का जीवित रहना मुश्किल हो जाता है। किडनी फेलियर के कई कारण हैं, इसमें शामिल हैं-

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  • लंबे समय तक ब्लड शुगर लेवल का हाई रहना
  • लंबे समय तक हाई ब्लड प्रेशर रहना
  • गंभीर संक्रमण
  • किडनी में चोट
  • जहरीले पदार्थ या दवाइयों का असर

किडनी फेलियर के लक्षण

  • किडनी जब ठीक तरीके से काम नहीं करती हैं, तो इस स्थिति में शरीर में टॉक्सिंस जमा हो जाते हैं, जिसकी वजह से कई लक्षण महसूस होने लगते हैं।
  • किडनी खराब होने पर शरीर में अतिरिक्त पानी जमा हो जाता है। इसकी वजह से पैरों, टखनों या चेहरे पर सूजन दिखाई दे सकती है।
  • किडनी खराब होने पर पेशाब बहुत कम या ज्यादा आ सकता है। झागदार पेशाब आना भी किडनी फेलियर का संकेत हो सकता है।
  • किडनी खराब होने पर रक्त में अपशिष्ट जमा हो जाते हैं। इसकी वजह से शरीर को पर्याप्त पोषक तत्व नहीं मिल पाते हैं और थकान-कमजोरी जैसे लक्षण महसूस होने लगते हैं।
  • किडनी फेलियर होने पर आपको जी मिचलाने और भूख न लगने जैसे संकेत महसूस हो सकते हैं। आपको मतली और उल्टी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
  • किडनी खराब होने पर फेफड़ों में तरल पदार्थ जमा हो जाते हैं। इसकी वजह से व्यक्ति को सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। इतना ही नहीं, इसकी वजह से त्वचा पर रैशेज भी हो सकते हैं।
किडनी फेलियर के मामलों में डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट करवाना पड़ता है। इसलिए अगर ये संकेत नजर आए, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।

किडनी को हेल्दी रखने के लिए क्या करें?

  • किडनी को स्वस्थ रखने के लिए दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी जरूर पिएं। किडनी को हेल्दी बनाए रखने के लिए रोजाना 8 से 10 गिलास पानी पिएं। इससे किडनी में पथरी का खतरा काफी कम हो जाता है।
  • किडनी को हेल्दी बनाए रखने के लिए बैलेंस डाइट भी बहुत जरूरी है। अपनी डाइट में फल, सब्जियां और फाइबर अधिक मात्रा में शामिल करें। इससे किडनी को डिटॉक्स करने में मदद मिलेगी।
  • किडनी को स्वस्थ बनाए रखने के लिए ज्यादा नमक, प्रोसेस्ड फूड्स और ज्यादा प्रोटीन वाली चीजें खाने से बचें। ज्यादा सोडियम का सेवन किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है।
  • हाई ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर किडनी को नुकसान पहुंचाते हैं। इसलिए इनका कंट्रोल में रहना बहुत जरूरी है। समय-समय पर बीपी और शुगर लेवल की जांच करते रहें।
  • अगर आपके परिवार में किसी को किडनी की बीमारी का इतिहास है, तो समय-समय पर किडनी फंक्शन टेस्ट (KFT) जरूर कराएं।
  • कुछ दर्द निवारक दवाइयों का लंबे समय तक सेवन करने से किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए इनका अधिक मात्रा में सेवन करने से बचना जरूरी है। इसलिए डॉक्टर की सलाह के बिना इनका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
किडनी से जुड़ी बीमारियां होने पर शुरुआत में लक्षण महसूस नहीं होते हैं, लेकिन जब स्थिति गंभीर रूप ले लेती है तब इसके संकेत महसूस होते हैं। इसलिए अगर आपको शरीर में सूजन, पेशाब में बदलाव, लगातार थकान या पीठ के निचले हिस्से में दर्द जैसे संकेत दिखाई दें, तो इन्हें नजरअंदाज बिल्कुल न करें। 

Highlights:

  • किडनी रोग कई तरह के हैं, इसके लक्षणों पर गौर करना जरूरी है।
  • पेशाब से जुड़ी समस्याएं होने पर किडनी की जांच जरूर कराएं।
  • समय-समय पर किडनी को डिटॉक्स करना बेहद जरूरी है।

Disclaimer : प्र‍िय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्‍य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसल‍िए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए ज‍िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।