Add The Health Site as a
Preferred Source
Add The Health Site as a Preferred Source

ऑटिज्म कितने प्रकार का होता है? जानें क्या हैं इस बीमारी के लक्षण

ऑटिज्म वाले व्यक्ति को बातचीत करने में कठिनाई हो सकती है और व्यवहार में दोहराव हो सकता है। ऐसे बच्चे एक ही चीज या बात को बार-बार करते हैं।

ऑटिज्म कितने प्रकार का होता है? जानें क्या हैं इस बीमारी के लक्षण
ऑटिज्म के प्रकार
VerifiedMedically Reviewed By: Dr. Pavitra Shankar

Written by Anju Rawat |Published : April 2, 2026 4:13 PM IST

World Autism Awareness Day: ऑटिज्म (Autism Spectrum Disorder - ASD) एक आजीवन रहने वाली न्यूरो-डेवलपमेंटल स्थिति है। यह मस्तिष्क विकास से संबंधित है, जिसमें व्यक्ति को सामाजिक व्यवहार, संचार और बातचीत करने में काफी कठिनाई होती है। आपको बता दें कि यह कोई बीमारी नहीं है, बल्कि मस्तिष्क के अलग तरह से काम करने की स्थिति है। इसके लक्षण आमतौर पर जीवन के पहले 3 वर्षों में दिख सकते हैं। ऑटिज्म की वजह से बच्चों को दूसरों से बात करने में घबराहट हो सकती है, वे दूसरों से नजरें नहीं मिला पाते हैं और व्यवहार में दोहराव दिखाई देता है। आज भी कई लोग ऑटिज्म के संकेतों को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। यही वजह है कि ऑटिज्म के बारे में लोगों में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से हर साल 2 अप्रैल को विश्व ऑटिज्म दिवस मनाया जाता है। आइए, इस मौके पर आकाश हेल्थकेयर, द्वारका की एसोसिएट कंसल्टेंट और साइकेट्रिस्ट डॉ. पवित्रा शंकर (Dr. Pavitra Shankar, Associate Consultant, Psychiatrist, Aakash Healthcare, Dwarka) से जानते हैं ऑटिज्म कितने प्रकार का होता है?

ऑटिज्म कितने प्रकार का होता है?

1. क्लासिक ऑटिज्म

इसे ऑटिस्टिक डिसऑर्डर भी कहा जाता है। आपको बता दें कि यह न्यूरोडेवलपमेंटल स्थिति है, जो बचपन में शुरू हो जाती है। इस प्रकार के ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों को लोगों से बातचीत करने में मुश्किल होती है। उन्हें अपने व्यवहार से जुड़ी गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। क्लासिक ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों को अक्सर अकेले रहना पसंद होता है और वे दोहराव वाले व्यवहार करते हैं।

2. हाई-फंक्शनिंग ऑटिज्म

हाई-फंक्शनिंग ऑटिज्म को आमतौर पर लेवल 1 ऑटिज्म के रूप में समझा जाता है। इस प्रकार के ऑटिज्म वाले लोग सामाजिक संपर्क कर सकते हैं। वे अपने दैनिक कार्यों को भी कर सकते हैं। इसमें व्यक्ति की बुद्धि सामान्य या अधिक हो सकती है, लेकिन सामाजिक संकेतों को समझने में कठिनाई होती है।

Also Read

More News

3. एस्पर्जर सिंड्रोम

यह ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) का एक हिस्सा माना जाता है। यह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति को सामाजिक बातचीत करने में चुनौतियां आती है। लेकिन उनकी बौद्धिक क्षमता सामान्य होती है और वे सामान्य जीवन जी सकते हैं।

4. पेरवेसिव डेवलपमेंटल डिसऑर्डर

पेरवेसिव डेवलपमेंटल डिसऑर्डर ऑटिज्म के लक्षण आमतौर पर 3 साल की उम्र से पहले दिखाई देते हैं। वे बातों को दोहराव कर सकते हैं और उन्हें लोगों से बातचीत करने में कठिनाई हो सकती है।

ऑटिज्म के लक्षण क्या हैं?

  • ऑटिज्म के लक्षण आमतौर पर बचपन के शुरुआती वर्षों में ही दिखने लगते हैं। इसका सबसे आम लक्षण है- सामाजिक व्यवहार में बदलाव। यानी ऑटिज्म के बच्चों में लोगों के प्रति व्यवहार बदलने लगता है।
  • बच्चा आंखों में आंखें डालकर बात करने में हिचकिचाता है। अगर कोई उसका नाम पुकारता है, तो वह कोई प्रतिक्रिया नहीं देता है।
  • ऑटिज्म से पीड़ित बच्चे, दूसरों के साथ खेलने में रुचि नहीं दिखाते हैं। वे अलग-थलग रहना पसंद करते हैं।
  • बच्चे को बोलने में परेशानी होती है, वह शब्दों को दोहराने लगता है। बच्चे को बातचीत करने में मुश्किल होने लगती है।
  • आपको बता दें कि ऑटिज्म से पीड़ित बच्चे आमतौर पर काम या बात को दोहराने लगते हैं। वे बार-बार हाथ हिलाते हैं या एक ही चीज को बार-बार करने लगते हैं।
  • ऑटिज्म से पीड़ित कई बच्चों को तेज आवाज और रोशनी से दिक्कत होने लगती है।
  • कुछ मामलों में ऑटिज्म की वजह से एंग्जाइटी और ध्यान की कमी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। हालांकि, हर व्यक्ति में लक्षण अलग-अलग होते हैं और सभी को एक ही तरह की चुनौतियां नहीं होती हैं।

ऑटिज्म का इलाज क्या है?

ऑटिज्म का कोई इलाज पूरा नहीं हो पाता है। ऑटिज्म का इलाज करने के लिए डॉक्टर स्पीच थेरेपी और बिहेवियरल थेरेपी करवा सकते हैं। इसके अलावा, विशेष शिक्षा कार्यक्रम भी चलाए जाते हैं, जो बच्चों के विकास में मदद करते हैं।

अगर किसी बच्चे में ऑटिज्म के शुरुआती संकेत दिखाई दे तो उन्हें नजरअंदाज न करें। लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से तुरंत मिलें और बच्चे के जीवन को बेहतर दिशा में ले जाने का प्रयास करें।

Add The HealthSite as a Preferred Source Add The Health Site as a Preferred Source

Disclaimer : प्र‍िय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्‍य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसल‍िए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए ज‍िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।