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Written By: Editorial Team | Published : October 18, 2017 4:17 PM IST
अध्ययनों के अनुसार, भारत में लगभग 180 मिलियन लोग अर्थराइटिस से पीड़ित हैं, जो कैंसर, डायबिटीज और एड्स से भी अधिक है। एक आंकड़े के अनुसार, देश में हर साल 14 फीसदी लोग इस समस्या के इलाज के लिए डॉक्टर के पास जाते हैं। एसआईएल डायग्नोस्टिक्स ने 6.4 मिलियन नमूनों का विश्लेषण किया और बताया कि भारतीयों में अर्थराइटिस का प्रसार बढ़ रहा है। टेक्नोलॉजी एंड मैन्टर (क्लीनिकल पैथोलॉजी) के अध्यक्ष डॉक्टर अविनाश फडके के अनुसार, अगर यह ध्यान नहीं दिया गया, तो भारत में 2025 तक ओस्टियोअर्थराइटिस से 60 मिलियन से अधिक लोग प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए आपको अर्थराइटिस के प्रकार के बारे में जानने से आपको इसके जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।
1) ऑस्टियोअर्थराइटिस
यह अर्थराइटिस का सबसे प्रचलित रूप है और भारत में 22 से 39 फीसदी लोग इससे प्रभावित हैं। ऑस्टियोअर्थराइटिस हर साल 15 मिलियन वयस्कों को प्रभावित करता है। ज्यादातर भारतीय यह नहीं जानते हैं कि यह पुरुषों की तुलना में महिलाओं को ज्यादा प्रभावित करता है और उम्र के साथ जोखिम बढ़ता है। अध्ययनों से पता चला है कि 65 साल से अधिक आयु वाली 45 फीसदी महिलाओं में ऑस्टियोअर्थराइटिस के लक्षण देखे गया जबकि लगभग 70 फीसदी महिलाओं में रेडियोलॉजिकल के लक्षण देखे गए हैं जो ऑस्टियोअर्थराइटिस का संकेत देते हैं।
2) रूमटॉइड आर्थराइटिस
यह एक ऑटोइम्यून डिजीज है जो जॉइंट्स के आसपास के टिश्यू को प्रभावित करती है। हालांकि इस बीमारी का सही कारण ज्ञात नहीं है। हालांकि जल्दी पता चलने पर इस समस्या को रोका जा सकता है। आमतौर पर यह समस्या 35- 55 साल की आयु के लोगों में देखी जाती है। भारतीयों में इस रोग की दर आबादी का लगभग 0.5 से 1 फीसदी है। इसका अधिक जोखिम भी महिलाओं को होता है।
3) गाउट
यह इंफ्लेमेटरी के सबसे आम कारणों में एक है। गाउट की समस्या पुरुषों में तीन से चार गुना आम है। इसके अलावा 50 साल की आयु से अधिक वाले मोटापे से ग्रस्त लोगों को भी इसका अधिक खतरा होता है।
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अनुवादक – Usman Khan
चित्र स्रोत - Shutterstock