टाइप 2 डायबिटीज (Type 2 diabetes)
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हमारे खून में शुगर (शर्करा) का स्तर इंसुलिन हार्मोन द्वारा नियमित किया जाता है और यह हार्मोन लिवर में बीटा कोशिकाओं की विशेष प्रक्रिया से बनता है। इंसुलिन हार्मोन का मुख्य कार्य फैट, लिवर और मांसपेशियों की कोशिकाओं को रिसेप्टर पर बाइंड करना (यानी जोड़ना) होता है, ताकि उनके अंदर ग्लूकोज के अणु जा सकें। ग्लूकोज कोशिकाओं के अंदर जमा होता है, जिसे शरीर आवश्यकता के अनुसार ऊर्जा के स्रोत के रूप में इस्तेमाल करता है। टाइप 2 डायबिटीज में फैट, लिवर और मांसपेशियों की कोशिकाएं इंसुलिन की मौजूदगी होने पर प्रतिक्रिया नहीं दे पाती हैं और इस कारण से ग्लूकोज कोशिकाओं में नहीं जा पाता है। इसका मतलब है इंसुलिन होने के बावजूद भी ग्लूकोज कोशिकाओं के अंदर प्रवेश नहीं कर पाता है। अन्य शब्दों में इस स्थिति को इंसुलिन रेजिस्टेंस के नाम से भी जाना जाता है और इस कारण से आपके रक्त में शर्करा का स्तर बढ़ने लगता है।
टाइप 2 डायबिटीज के लक्षण
ज्यादातर मामलों में टाइप 2 डायबिटीज से होने वाले लक्षण स्पष्ट नहीं होते हैं और इसी कारण से लाखों को लोग इस रोग से ग्रसित होने के बावजूद भी उन्हें इस बारे में पता नहीं चल पाता है। हालांकि, टाइप 2 डायबिटीज से निम्न लक्षण व संकेत हो सकते हैं -
- भूख बढ़ना - ऐसा इसलिए क्योंकि शरीर भोजन से ग्लूकोज को अवशोषित नहीं कर पाता है और इस कारण से व्यक्ति को अधिक भूख लगने लगती है।
- अधिक प्यास लगना - रक्त में शर्करा का स्तर बढ़ने के कारण शरीर में पानी की कमी होने लगती है और परिणामस्वरूप मरीज को अधिक प्यास लगती है।
- बार-बार पेशाब आना - अधिक प्यास लगने के कारण व्यक्ति को बार-बार पेशाब जाना पड़ सकता है।
- शरीर का वजन कम होना - टाइप 2 डायबिटीज में शरीर ग्लूकोज से ऊर्जा को अवशोषित नहीं कर पाता है और इस कारण से वह फैट से एनर्जी लेने लगता है और परिणामस्वरूप व्यक्ति का वजन कम होने लगता है।
- घाव ना भरना - टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों की रक्त वाहिकाएं कठोर हो जाती हैं और इस कारण से रक्त का बहाव कम हो जाता है। रक्त का बहाव कम होने के कारण प्रभावित हिस्से में रक्त के थक्के बनने की प्रक्रिया कमजोर पड़ जाती है और घाव को ठीक होने में अधिक समय लगता है।
टाइप 2 डायबिटीज से ग्रसित व्यक्ति को कुछ अन्य लक्षण भी महसूस हो सकते हैं, जैसे -
- धुंधला दिखाई देना
- हाथ व पैर सुन्न पड़ना या दर्द रहना
- डिप्रेशन जैसे मानसिक समस्याएं
- गुर्दे, मूत्राशय और त्वचा में बार-बार संक्रमण होना
डॉक्टर को कब दिखाएं?
अगर आपको उपरोक्त में से किसी भी प्रकार के लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो आपको डॉक्टर से बात कर लेनी चाहिए। हालांकि, उपरोक्त कुछ लक्षण टाइप 2 डायबिटीज के अलावा किसी अन्य बीमारी का संकेत भी हो सकता है, ऐसे में डॉक्टर से बात करके ही इस बात की पुष्टि की जानी चाहिए।
टाइप 2 डायबिटीज के कारण
टाइप 2 डायबिटीज के प्रमुख कारणों में निम्न शामिल हैं -
- जीन - कुछ अध्ययनकर्ताओं के अनुसार डीएनए के अलग-अलग हिस्से आपके शरीर के इंसुलिन बनाने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं।
- लिवर द्वारा अधिक ग्लूकोज बनाना - अगर आपके शरीर में शुगर की कमी है, तो ऐसे में लिवर ग्लूकोज बनाकर रक्त में इसे स्रावित कर देता है और आपके खाना खाने के बाद लिवर इंसुलिन बनाना बंद कर देता है। लेकिन टाइप 2 डायबिटीज से ग्रस्त लोगों में कई बार ऐसा नहीं होता है और खाना खाने के बाद भी लिवर ग्लूकोज बनाता रहता है और इस कारण से रक्त में शुगर का स्तर बढ़ सकता है।
- कोशिकाओं के आपसी संचार में गड़बड़ी - कई बार आपकी कोशिकाएं गलत संकेत देने लगती हैं या फिर गलत सिग्नल ले लेती हैं। ऐसी स्थितियों में कोशिकाओं के इंसुलिन इस्तेमाल करने की प्रक्रिया प्रभावित हो जाती है और परिणामस्वरूप टाइप 2 डायबिटीज की समस्या विकसित हो जाती है।
टाइप 2 डायबिटीज के जोखिम कारक
टाइप 2 डायबिटीज को साइलेंट किलर भी कहा जाता है, क्योंकि यह शरीर में धीरे-धीरे विकसित होता है। कुछ कारक हैं, जो टाइप 2 डायबिटीज होने के खतरे को बढ़ा सकते हैं जैसे -
- परिवार में पहले किसी को यह रोग होना
- शरीर का वजन बढ़ना या मोटापा
- शारीरिक गतिविधियों की कमी (गतिहीन जीवन)
टाइप 2 डायबिटीज का निदान
अगर आपको टाइप 2 डायबिटीज से संबंधित कोई भी लक्षण महसूस हो रहा है, तो डॉक्टर से इसकी जांच कराना बेहद जरूरी है। निदान के दौरान डॉक्टर आपके शरीर के पिछली जानकारियां (मेडिकल हिस्ट्री) लेते हैं और साथ ही आपको कुछ अन्य टेस्ट कराने की सलाह दी जा सकती है -
- ए1सी टेस्ट - इसे ग्लाइकोहीमोग्रोबिन टेस्ट भी कहा जाता है, जिसकी मदद से व्यक्ति के शरीर में पिछले तीन महीनों की औसत रक्त शर्करा स्तर की जांच की जाती है।
- फास्टिंग प्लाज्मा ग्लूकोज टेस्ट - यह टेस्ट आमतौर पर 8 घंटे तक खाली पेट रहकर किया जाता है, जिसकी मदद से व्यक्ति के शरीर में फास्टिंग ग्लूकोज लेवल की जांच की जाती है। हालांकि पुष्टि करने के लिए यह टेस्ट एक ही समय में दो बार किया जा सकता है।
- पोस्टप्रांडियल प्लाज्मा ग्लूकोज टेस्ट - यह भी एक प्रकार का ब्लड टेस्ट है, जिसे व्यक्ति के खाना खाने के बाद किया जाता है। खाने की बजाए कई बार इस टेस्ट में मरीज को 75 ग्राम ग्लूकोज दी दी जाती है और 2 घंटे बाद यह टेस्ट किया जाता है। इस टेस्ट की मदद से यह जांच की जाती है कि आपके शरीर में खाना खाने के बाद कितना शुगर बढ़ता है।
टाइप 2 डायबिटीज की रोकथाम
टाइप 2 डायबिटीज की पूरी तरह से रोकथाम या बचाव करने का कोई सटीक तरीका नहीं है, हालांकि निम्न बातों का ध्यान रखकर यह रोग होने के खतरे को कम किया जा सकता है -
- अपना वजन न बढ़ने दें - कुछ अध्ययनों के अनुसार अगर मोटापे से ग्रस्त कोई व्यक्ति अपने वजन को 7 से 10 प्रतिशत तक भी कम करता है, तो उसे टाइप 2 डायबिटीज होने का खतरा कम हो सकता है।
- रोजाना व्यायाम करें - एक अन्य अध्ययन में पाया गया है कि रोजाना 30 मिनट तक तेज चलने से भी टाइप 2 डायबिटीज होने के खतरे को 1 तिहाई तक कम किया जा सकता है।
- अच्छा व संतुलित आहार लें - ऐसे खाद्य पदार्थ न लें जिनमें अधिक मात्रा में मीठा या चिकना हो और इसकी बजाए आप अपने आहार में फल, सब्जियां व अधिक फाइबर वाले खाद्य पदार्थों को शामिल कर सकते हैं।
- धूम्रपान व शराब छोड़ दें - सिगरेट व शराब पीना टाइप 2 डायबिटीज होने के खतरे को बढ़ाता है और इनका उपयोग बंद करने से टाइप 2 डायबिटीज के खतरे को कम किया जा सकता है।
टाइप 2 डायबिटीज का इलाज
टाइप 2 डायबिटीज का कोई पक्का इलाज नहीं है, लेकिन इसके लिए उपलब्ध उपचार विकल्पों की मदद से बढ़ते शुगर लेवल को कम किया जा सकता है और टाइप 2 डायबिटीज से होने वाले अन्य लक्षण भी नियंत्रित किए जा सकते हैं। टाइप 2 डायबिटीज के उपचार विकल्पों में निम्न शामिल हैं -
- सल्फोनिलयूरिया - ये दवाएं अग्न्याशय (Pancreas) में इंसुलिन स्रावित होने की प्रक्रिया को तेज कर देती हैं, जिससे रक्त में बढ़े हुए शर्करा के स्तर को कम किया जा सकता है। हालांकि, इससे कई बार रक्त में शर्करा का स्तर सामान्य से भी नीचे चला जाता है, जो एक हानिकारक स्थिति हो सकती है।
- मेग्लिटिनाइड्स - ये दवाएं इंसुलिन बनने की प्रक्रिया के तेज कर देती हैं और इनका असर सल्फोनिलयूरिया दवाओं से जल्दी होता है।
- बिगुआनाइड्स - ये दवाएं लिवर द्वारा ग्लूकोज स्रावित हो रही ग्लूकोज की मात्रा को कम कर देती हैं और साथ ही आंतों द्वारा ग्लूकोज अवशोषित करने की प्रक्रिया को भी धीमा कर देती हैं। इनमें मेटफोर्मिन सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली दवाएं हैं।
- थियाजोलिडाइनियन्स - ये फैट और मांसपेशियों की कोशिकाओं की संवेदनशीलता को बढ़ा देती हैं, जिससे रक्त में शर्करा का स्तर कम होने लगता है। इन दवाओं को मेटफोर्मिन या सल्फोनिलयूरिया के साथ लिया जाात है।
- सोडियम-ग्लूकोज को-ट्रांसपोर्टर-2 (एसजीएलटी2) - ये दवाएं गुर्दों को उत्तेजित कर देती हैं, जिससे वे अतिरिक्त शर्करा को पेशाब के माध्यम से शरीर के बाहर निकाल देता है। साथ ही ये दवाएं हृदय रोग होने के जोखिम को कम करने में भी मदद करती हैं।
- इंसुलिन इंजेक्टर - अगर आहार में बदलाव, दवाओं या अन्य किसी उपचार विकल्प से इंसुलिन को कम नहीं किया जा रहा है, तो ऐसे में इंसुलिन इंजेक्टर का इस्तेमाल किया जा सकता है। इंसुलिन इंजेक्टर की मदद से आमतौर पर दो अलग-अलग प्रकार के इंसुलिन का इस्तेमाल किया जा सकता है, जो इस प्रकार हैं -
- जल्दी काम करने वाले इंसुलिन - जो 15 मिनट में असर दिखाना शुरू कर देते हैं और 3 से 5 घंटे तक इनका इसर रहता है।
- धीरे काम करने वाले इंसुलिन - इनका असर 30 से 60 मिनट में शुरू होता है और 5 से 8 घंटे तक रहता है।
- बेरिएट्रिक सर्जरी - जिन लोगों का वजन अत्यधिक बढ़ गया है और किसी अन्य तरीके या उपचार से वजन को कम नहीं किया जा रहा है, तो बेरिएट्रिक सर्जरी की जा सकती है। बढ़ते वजन को कम करके भी व्यक्ति के टाइप 2 डायबिटीज को नियंत्रित किया जा सकता है।
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टाइप-2 डायबिटीज होने पर इंसुलिन प्रतिरोध स्ट्रोक से जुड़ा हुआ है। इंसुलिन प्रतिरोध तब होता है, जब शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के लिए ठीक से कम नहीं करती हैं और आसानी से रक्त से ग्लूकोज नहीं ले पाती हैं।
एक नयी स्टडी में कहा गया है कि, सुबह जल्दी जागने वाले लोगों में डायबिटीज की बीमारी का रिस्क बहुत कम होता है। (Tips to prevent diabetes )
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टाइप-2 डायबिटीज को पूरी तरह से खत्म नहीं किया जा सकता है, लेकिन ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल में रखा जाए, तो आप बहुत हद तक दूसरी शारीरिक समस्याओं से बचे रह सकते हैं। गिलोय हर्ब के सेवन से आप टाइप-2 डायबिटीज को काफी हद तक कंट्रोल कर सकते हैं।
करीब 80 प्रतिशत मामलों में धूम्रपान ही कैंसर के लिए जिम्मेदार पाया गया है। हालांकि, कुछ लोगों को यह जेनेटिक और अन्य कारणों से भी हो सकता है। पर्यावरणीय कारकों में रेडॉन, एस्बेस्टस, आर्सेनिक, बेरिलियम और यूरेनियम के संपर्क में आने से इस कैंसर का जोखिम बढ़ता है। इसके अलावा फैमिली हिस्ट्री, बॉडी, उम्र, छाती में रेडिएशन और फेफड़ों की बीमारी आदि भी फेफड़े के कैंसर का कारण बनती है।
दालचीनी कई औषधीय गुण प्रदान करती है और सबसे प्रमुख यह है कि यह डायबिटीज को नियंत्रित करने की क्षमता रखती है। रिसर्चर्स का मानना है कि दालचीनी में मौजूद Cinnamaldehyde नाम का कंपाउंड मौजूद होता है जो आपके स्वास्थ्य और मेटाबॉलिज्म का ध्यान रखता है। मधुमेह एक ऐसी बीमारी है जो शरीर में अचानक से शुगर लेवल को बढ़ा देती है। जिसके चलते शरीर पर्याप्त इंसुलिन का उत्पादन करने और ग्लूकोज की खपत को एडजस्ट करने में असमर्थ हो जाता है। दालचीनी में कुछ ऐसे खास गुण होते हैं जो शुगर लेवल को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।
मखाना एक हेल्दी स्नैक्स है, जिसे खाने से ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल (Blood sugar level) में रहता है। सेहत पर मखाना कई तरह से लाभ पहुंचाता है।
हाल ही में हुए एक शोध में यह बात सामने आई है कि जिन लोगों का ब्लड शुगर हाई (High blood sugar level) रहता है, उन्हें कोरोना से संक्रमित (Coronavirus infection) होने का खतरा अधिक रहता है।
लाइफस्टाइल और खानपान में बदलाव कर डायबिटीज को कंट्रोल किया जा सकता है। लेकिन यदि आपका लाइफस्टाइल बहुत बिजी है और आप किसी भी चीज को नियमित रूप से नहीं कर पाते हैं तो तेजपत्ते से बेहतर आपके लिए कुछ नहीं है। तेजपत्ते की सही सेवन से पुरानी से पुरानी डायबिटीज को कंट्रोल किया जा सकता है। तो आइए जानते हैं डायबिटीज में किस तरह फायदेमंद है तेजपत्ता।
कई बार ब्लड शुगर लेवल इतना हाई हो जाता है कि स्थिति इमरजेंसी में तब्दील हो जाती है। क्योंकि, ब्लड शुगर का बहुत ज़्यादा स्तर जानलेवा साबित हो सकता है। अगर, आप या आपके आसपास कोई व्यक्ति इस तरह की स्थिति का सामना कर रहा है। तो, तुरंत ब्लड शुगर लेवल कम करने के लिए इन तरीकों को अपना सकते हैं।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि जो लोग मोटापा (Obesity) और डायबिटीज (Diabetes) दोनों से ग्रस्त हैं, उनमें कई ऐसी गंभीर जानलेवा समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, यदि वो कोरोनावायरस से संक्रमित होते हैं। ऐसे में अपने ब्लड शुगर लेवल और डायबिटीज को कंट्रोल में रखने के लिए लाइफस्टाइल में कुछ हेल्दी आदतों को शामिल करें।
हाल ही में सेल मेटाबॉलिज्म जर्नल में छपी एक स्टडी में बताया गया कि कोविड इंफेक्टेड डायबिटिक्स में मौत का ख़तरा दूसरों की तुलना में अधिक है। इस स्टडी में पाया गया कि कोविड-19 इंफेक्टेड जिन डायबिटिक्स ने अपने ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रण में रखा था। उन्हें, एक्स्ट्रा मेडिकल हेल्फ या वेंटिलेटर सपोर्ट की ज़रूरत नहीं पड़ी। वहीं, इन लोगों को बाकी मरीज़ों की तुलना में हेल्थ प्रॉब्लम्स भी कम हुईं।
तापमान में होने वाले बदलाव से ब्लड शुगर लेवल में भी उतार-चढ़ाव हो सकता है। चूंकि, अब गर्मियों का मौसम शुरू हो गया है। इसीलिए, अपने ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रण में रखने की कोशिश करें। साथ ही अपने पैरों को हेल्दी रखने के लिए इन फुट केयर टिप्स को फॉलो करें।
जहां पूरा दिन आप डायबिटीज़ और ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने की कोशिश करते हैं। वहीं, आपको रात में भी एक विशेष रूटीन फॉलो करना चाहिए। जिससे, आपको किसी प्रकार के कॉम्प्लिकेशन्स ना हों। ऐसी ही कुछ बातों के बारे में लिख रहे हैं हम
अक्सर हाई ब्लड शुगर के लोगों के मन में डर होता है कि कहीं कोई मीठी चीज़ खाने से उनका ब्लड शुगर लेवल बढ़ ना जाए। जैसा कि, शहद मीठा होता है इसीलिए, डायबिटिक्स को इसके सेवन को लेकर हमेशा उलझन बनी रहती है।
मौसम में बढ़ती गर्मी से डायबिटीज़ के मरीज़ों को कई प्रकार की हेल्थ प्रॉब्लम्स भी हो सकती हैं। इससे, डायबिटीज़ मैनेजमेंट में परेशानी हो सकती है। डायबिटिक्स को ऐसे में किस तरह की सावधानियां बरतनी चाहिए,यही लिख रहे हैं हम यहां।
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एक्सपर्ट्स का कहना है कि हाई ब्लड शुगर वाले लोगों यानि डायबिटीज़ मरीज़ों को कोरोना वायरस का ख़तरा दूसरों से अधिक है। इसी तरह निमोनिया का ख़तरा भी इन लोगों को काफी अधिक है। जैसा कि हाई ब्लड शुगर की वजह से डायबिटिक्स का इम्यून सिस्टम पहले से ही कमज़ोर रहता है। इसीलिए, डायबिटिक्स को कोविड-19 (COVID-19) से बचने के लिए खास सावधानियां बरतनी चाहिए।
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Food for Diabetics: कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट्स की अधिक मात्रा रोटी को डायबिटिक्स के लिए नुकसानदायक साबित कर सकती है। ऐसे में, रोटी को ज़्यादा हेल्दी बनाने के लिए आप उसमें कुछ डायबिटीक फ्रेंडली फूड मिला सकते हैं। जो, ब्लड शुगर को बढ़ने से रोक सकता है। साथ ही, पेट भरने और शरीर का पोषण करने में भी मदद करता है।
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खास टिप्स जो डायबिटीज को रोगियों को खान-पान में अपनाना चाहिए।