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बच्चों में भी बढ़ रहा है टाइप-2 डायबीटीज का खतरा,  जानें इसके कारण और बचाव के उपाय

डायबिटीज के जो आंकड़े सामने आ रहे हैं, उससे मालूम होता है कि स्थिति बहुत ही चिंताजनक है। विशेषज्ञों का मानना है कि जल्‍दी ही इस स्थिति को काबू नहीं किया गया तो वह दिन दूर नहीं जब भारत दुनिया भर में डायबिटीज कैपिटल बन जाएगा। ©Shutterstock.

डायबिटीज के जो आंकड़े सामने आ रहे हैं, उससे मालूम होता है कि स्थिति बहुत ही चिंताजनक है। विशेषज्ञों का मानना है कि जल्‍दी ही इस स्थिति को काबू नहीं किया गया तो वह दिन दूर नहीं जब भारत दुनिया भर में डायबिटीज कैपिटल बन जाएगा।

Written by Yogita Yadav |Published : April 27, 2019 6:09 PM IST

माता-पिता के लाइफस्‍टाइल का असर बच्‍चों पर आता ही है। यही वजह है कि जो बीमारियां माता-पिता को होती हैं, बच्‍चों में भी उनकी संभावना बढ़ जाती है। जिस तरह वयस्‍कों में डायबिटीज के आंकड़े बढ़ रहे हैं, उसी तरह बच्‍चे भी बहुत तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि भारत में भी बच्‍चों में टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ता जा रहा है।

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बन न जाए डायबिटीज कैपिटल

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डायबिटीज के जो आंकड़े सामने आ रहे हैं, उससे मालूम होता है कि स्थिति बहुत ही चिंताजनक है। विशेषज्ञों का मानना है कि जल्‍दी ही इस स्थिति को काबू नहीं किया गया तो वह दिन दूर नहीं जब भारत दुनिया भर में डायबिटीज कैपिटल बन जाएगा।

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लाइफस्‍टाइल के साथ बढ़ रही है डायबिटीज

यह लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारी है। जिसके शिकार सिर्फ वयस्क ही नहीं बल्कि अब बच्‍चे भी हो रहे हैं।  हालांकि खान-पान में जरूरी बदलाव कर इस बीमारी से बचा जा सकता है। पेरेंट्स के बिजी होने के साथ ही ज्‍यादातर बच्‍चे अब इनडोर गेम्‍स और स्‍मार्ट फोन में ही बिजी हो गए हैं। शारीरिक श्रम घटते जाने का असर उनके स्‍वास्‍थ्‍य पर टाइप 2 डायबिटीज के रूप में नजर आ रहा है।

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[caption id="attachment_663662" align="alignnone" width="655"]processed-food शुगरी ड्रिंक्स, प्रोसेस्ड फूड, रिफाइंड सिरिल्स में कटौती करनी चाहिए और उन्हें ताजा फल, सब्जियों और कई फलों वाले जूस दिए जाने चाहिए। ©Shutterstock.[/caption]

क्‍या कहते हैं आंकड़े

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ICMR के अनुसार यूथ डायबीटीज रजिस्ट्री के आंकड़े बताते हैं कि 25 वर्ष से कम आयु के हर 4 यानी में से 1 यानी 25 प्रतिशत भारतीय अडल्ट-ऑनसेट टाइप-2 डायबीटीज से पीड़ित है। भारत में लगभग 97 हजार बच्चे टाइप-1 डायबीटीज का शिकार हैं जो एक ऑटोइम्यून बीमारी है। इसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अग्न्याशय में इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं को नष्ट कर देती है जिससे बच्चों को जीवित रहने के लिए इंसुलिन इंजेक्शन पर निर्भर रहना पड़ता है।

पहचानें ये लक्षण

अगली बार अगर आपका बच्चा कहे कि उसे पेट में दर्द हो रहा है, उल्टी हो रही है, सिर में दर्द है, थकान महसूस हो रही है और बच्चा बार-बार पेशाब करने के लिए जा रहा हो तो बच्चे को तुरंत डॉक्टर के पास लेकर जाएं क्योंकि ये सभी लक्षण बच्चे में डायबीटीज की बीमारी विकसित होने की ओर इशारा करते हैं।

बचना है डायबिटीज तो आज ही से करें बदलाव

डायबीटीज काफी हद तक जीन से प्रभावित होता है। यदि माता-पिता को डायबिटीज है, तो उनके बच्चों को टाइप-2 डायबीटीज होने का खतरा ज्यादा होता है। सुस्त जीवनशैली डायबिटीज के लिए हाई रिस्क फैक्टर है। बच्चों में टाइप-2 डायबिटीज को टाला जा सकता है। छोटी उम्र से ही उनको हेल्दी और न्यूट्रिशंस से भरपूर खाना खिलाकर। समय से हेल्दी फूड इनटेक करने से बच्चों को ताउम्र फायदा होता है। डॉक्टर्स के मुताबिक, बच्चों को कई तरह का खाना दिया जाना चाहिए, जिसमें हेल्दी फैट, साबुत अनाज और लो-फैट डेयरी शामिल है।

हेल्‍दी फूड को लाना है वापिस

शुगरी ड्रिंक्स, प्रोसेस्ड फूड, रिफाइंड सिरिल्स में कटौती करनी चाहिए और उन्हें ताजा फल, सब्जियों और कई फलों वाले जूस दिए जाने चाहिए। बच्चे अक्सर अपने पैरेंट्स की लाइफस्टाइल फॉलो करते हैं। अगर माता-पिता हेल्दी फूड खाते हैं, तो उनके बच्चे भी हेल्दी फूड के ऑप्शन पर ही सोचते हैं। इसलिए घर में बच्चे के लिए हेल्दी फूड का ही ऑप्शन रखें।

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