बच्चों में तेजी से बढ़ रही है टाइप 1 डायबिटीज, कुछ इस तरह दिखते हैं शुरुआती लक्षण

बच्चों में टाइप 1 डायबिटीज एक ऐसी स्थिति होती है जब बच्चे का शरीर एक बहुत ही महत्वपूर्ण हार्मोन यानि कि इंसुलिन बनाना बंद कर देता है। ये इंसुलिन नामक हार्मोन है जो ग्लूकोज को ग्लाइकोजन में परिवर्तित करता है। आपके बच्चे को स्वस्थ रहने या कह सकते हैं कि जीवित रहने के लिए इंसुलिन की आवश्यकता होती है जिसे हर हाल में पूरा करना होता है। यदि ऐसा नहीं किया गया तो बच्चे को भारी नुकसान हो सकता है। बच्चों में टाइप 1 डायबिटीज को जुवेनाइल डायबिटीज या इंसुलिन डिपें​डेंट डायबिटीज भी कहा जाता है।

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Written By: Rashmi Upadhyay | Updated : August 25, 2020 1:46 PM IST

बच्चों में टाइप 1 डायबिटीज एक ऐसी स्थिति होती है जब बच्चे का शरीर एक बहुत ही महत्वपूर्ण हार्मोन यानि कि इंसुलिन बनाना बंद कर देता है। ये इंसुलिन नामक हार्मोन है जो ग्लूकोज को ग्लाइकोजन में परिवर्तित करता है। आपके बच्चे को स्वस्थ रहने या कह सकते हैं कि जीवित रहने के लिए इंसुलिन की आवश्यकता होती है जिसे हर हाल में पूरा करना होता है। यदि ऐसा नहीं किया गया तो बच्चे को भारी नुकसान हो सकता है। बच्चों में टाइप 1 डायबिटीज को जुवेनाइल डायबिटीज या इंसुलिन डिपें​डेंट डायबिटीज भी कहा जाता है। आजकल बच्चों का खानपान और लाइफस्टाइल पूरी तरह से अस्त व्यस्त हो गया है, जो इस रोग को जन्म देने का सबसे बड़ा कारण है।

बच्चों में टाइप 1 डायबिटीज का पता चलने से माता पिता को चिंता हो सकती है। लेकिन यदि इस समस्या पर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो बच्चे को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। इसलिए बिना समय गवाएं बच्चों को इस स्थिति से बाहर निकालने में उनकी मदद करें। हो सकता है आप में से ज्यादातर लोगों के मन में ये सवाल आ रहा होगा कि बच्चों में टाइप 1 डायबिटीज की पहचान कैसे करें! तो आज हम आपको इसके लक्षण और इलाज के बारे में जानकारी दे रहे हैं।

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बच्चों में टाइप 1 डायबिटिज के शुरुआती लक्षण

  • प्यास का बढ़ना

    बार बार पेशाब आना

    छोटे बच्चों का बिस्तर में पेशाब कर देना

    भूख का बढ़ना

    तेजी से वजन कम होना

    थकान और कमजोरी

    चिड़चिड़ापन या व्यवहार में बदलाव आना

    सांस में बदबू आना

टाइप 1 डायबिटिज के जोखिम

1. फैमिली हिस्ट्री- बच्चे को टाइप 1 डायबिटीज जेनेटिक कारणों से भी हो सकती है। जिस बच्चे के माता-पिता या भाई-बहनों में से किसी को भी टाइप 1 डायबिटीज होती है, उस बच्चे को भी इस रोग के होने की संभावना बढ़ जाती है।

2. वायरल इन्फेक्शन- कुछ वायरल इन्फेक्शन ऐसे भी होते हैं जो बच्चों में टाइप 1 डायबिटीज का खतरा बढ़ा सकते हैं। क्योंकि वे इंसुलिन सेल्स को नष्ट कर देते हैं। हालांकि यह डायबिटीज का आम कारण नहीं है।

3. एक्सरसाइज की कमी- एक्सरसाइज यानि कि फिजिकल एक्टिविटी की कमी कारण इंसुलिन उत्पादन करने वाली सेल्स प्रभावित हो सकती हैं। इससे ब्लड शुगर लेवल प्रभावित हो सकता है जिससे डायबिटीज का खतरा होता है।

4. फास्ट फूड का अधिक सेवन- जब बच्चा फास्ट फूड का अधिक सेवन करता है तो तब भी टाइप 1 डायबिटीज का खतरा हो सकता है। कार्बोहाइड्रेट के अधिक सेवन से यह शरीर में फैट के रूप मर जमा हो सकता है। इसके अलावा शुगर, चॉकलेट और मिठाई आदि से पैन्क्रीऐटिक ग्लैंड पर भार बढ़ा सकते हैं। इंसुलिन सेल्स के क्रमिक थकावट से डायबिटीज हो जाता है।

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डायबिटीज का इलाज

यदि एक बार बच्चा डायबिटीज का शिकार हो गया तो उसे जीवन भर इसका इलाज करना होता है और अपना लाइस्टाइल सही करना होता है। बच्चों में डायबिटीज होने के बाद उनको इंसुलिन का इंजेक्शन जीवनभर लेना होता है ताकि शरीर में इंसुलिन की कमी न हो पाए। डॉक्टर मरीज की स्थिति देखकर दिन में दो या तीन बार इंसुलिन का इंजेक्शन लगाने की सलाह देते हैं। वैसे अब डायबिटीज के इलाज के लिए इंसुलिन पम्प या आर्टिफिशियल पैंक्रियाज भी आ गये हैं। बिना इंजेक्शन के भी इससे इंसुलिन की दवा दी जा सकती है।

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