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Written By: Atul Modi | Published : March 24, 2023 2:15 PM IST
विटामिन डी हमारे शरीर की प्रतिरक्षा, त्वचा के स्वास्थ्य और हमारे पूरे शरीर के स्वास्थ्य के लिए बहुत आवश्यक है। भारतीय क्लाइमेट के अनुसार, हमें पूरे वर्ष सीधे सूर्य से पूरा विटामिन प्राप्त होता है। धूप इस विटामिन का सबसे अच्छा प्राकृतिक स्रोत है लेकिन हम पर्याप्त मात्रा में एक्सपोजर प्राप्त करने में सक्षम हैं तो यह ज्यादा हेल्दी रहता है। लेकिन जलवायु में बदलाव के साथ, अपने जीवन में बदलाव जैसे- ज्यादातर काम करना और घर के अंदर रहना, प्रदूषण के कारण बाहर न निकलना आदि के कारण हमारे शरीर में कम मात्रा में विटामिन डी रह जाता है। शोध में पाया गया है कि यह विटामिन डी की कमी का कारण बन रहा है जो बाद में हमारे शरीर के स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकता है।
लेकिन ज्यादा समय तक धूप या फिर गलत समय पर धूप में रहना हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक भी हो सकता है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण सूर्य में अल्ट्रा वायलेट किरणों की मात्रा दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है जो कि एक प्रकार का त्वचा कैंसर का कारण बन सकता है। कैंसर के अलावा यह हमारी त्वचा में कई बीमारियां भी पैदा कर सकता है। अन्य बीमारियों के रिस्क के बिना विटामिन डी की कमी को पूरा कैसे किया जा सकता है, आइए जानते हैं।
नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत की दो-तिहाई जनसंख्या विटामिन डी की कमी से पीड़ित है। इनमें से कुछ लोगों में इस विटामिन की बहुत कमी है इसके कारण हमारे देश में स्वास्थ्य आपात स्थिति पैदा हो गई है। विटामिन डी की कमी से डिप्रेशन, डायबिटीज, त्वचा का कैंसर, रूमेटाइड अर्थराइटिस जैसी बीमारियां हो सकती हैं। हार्ट रोग,और ट्यूबरक्यूलोसिस जैसे रोग भी विटामिन डी की कमी के कारण होते हैं। यदि शरीर में विटामिन डी का लेवल बहुत कम है, तो यह शरीर में गंभीर स्वास्थ्य संबंधी समस्या को भी जन्म दे सकता है या कुछ लोगों में पहले से मौजूद बीमारियो को और भी खराब कर सकता है।
कुछ लक्षण हमें शरीर में अपने आप पता चल जाते हैं और ये बाहरी लक्षण हैं जैसे शरीर में दर्द, मसल्स में दर्द, हड्डियों में दर्द और शरीर में थकान और बालों का झड़ना। कुछ लक्षणों का केवल टेस्ट करने के बाद पता चल सकता है। वे लक्षण हड्डी के घनत्व का नुकसान हैं जो बाहरी रूप से दिखाई नहीं दे सकता है लेकिन यह एक बुरी समस्या है और इससे फ्रैक्चर और ऑस्टियोपोरोसिस हो सकता है। इसके कारण बुजुर्गों में ऑस्टियोमलेशिया और बच्चों में रिकेट्स हो जाता है।
विटामिन डी की कमी से निपटने के दो तरीके हैं। पहले उपाय में सीधे सूर्य का संपर्क शामिल है। यह बहुत जरूरी है कि आप हर रोज सुबह जल्दी उठकर लगभग 15 से 20 मिनट के लिए धूप में बैठ सकते है। लेकिन कुछ लोगों के लिए उनके काम की वजह से यह संभव नहीं हो पाता है। इस मामले में ये लोग दूसरा विकल्प चुन सकते हैं जो विटामिन डी से भरपूर डाइट है। जिसमे अंडे की जर्दी, फैटी फिश, रेड मीट जो विटामिन डी की कमी को रोकने में मदद कर सकते हैं। पालक, केले, भिंडी, सोयाबीन, सफेद बीन्स जैसी सब्जियां विटामिन डी के अच्छे स्रोत हैं।
आखिरी ऑप्शन सप्लीमेंट लेना भी है। लेकिन एक्सपर्ट इस ऑप्शन पर निर्भर न रहने की सलाह देते हैं। विटामिन डी की कमी को दूर करने के लिए सप्लीमेंट्स को भी साथ लेना चाहिए। लेकिन केवल सप्लीमेंट्स लेने से इस समस्या का इलाज नहीं होगा। सप्लीमेंट लेने से पहले चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।