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पिता के त्याग ने बचाई बच्चों की जान, किडनी दान कर बना मिसाल

इस बार फादर्स डे के मौके पर दो ऐसी कहानियां सामने आई हैं, जिसने हर किसी के दिल को छू लिया है। आइए जानते हैं इन कहानियों के बारे में।

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Written By: Ashu Kumar Das | Updated : June 22, 2026 6:59 PM IST

ऐसा कहा जाता है कि माता-पिता का प्यार किसी भी मुश्किल से बड़ा होता है। जब बात अपने बच्चों की जिंदगी बचाने की हो, तो एक पिता हर सीमा पार कर सकता है। इस फादर्स डे पर ऐसी ही दो प्रेरणादायक कहानियां सामने आई हैं, जहां दो पिताओं ने अपनी किडनी दान कर अपने बच्चों को नई जिंदगी दी।

राहुल के लिए पिता ने की बेटे को किडनी

हरियाणा के हिसार निवासी राहुल जिसकी उम्र में 34 साल है, वो लंबे समय से एंड-स्टेज किडनी डिजीज से जूझ रहे थे। पिछले 6 महीनों से वह डायलिसिस पर निर्भर थे, लेकिन समय के साथ उनकी हालत और बिगड़ती गई। कमजोरी, भूख न लगना, खाना सही तरीके से न खाने के कारण शरीर में एनर्जी की कमी, तेजी से वजन कम होना। राहुल को इस तरह देखकर उनके पेरेंट्स काफी परेशान थे। राहुल बताते हैं कि किडनी की बीमारी के कारण उनका वजन 6 महीनों में 75 किलो से घटकर 65 किलो रह गया था। उनका शरीर काम कर सके इसलिए उन्हें हफ्ते में तीन बार डायलिसिस करवाना पड़ता था और खाने-पीने पर भी सख्त पाबंदियां थीं। बीमारी की वजह से वह अपने काम पर भी ध्यान नहीं दे पा रहे थे, जिससे वह मेंटली काफी परेशान और निराश रहने लगे थे।

पिता ने किडनी देकर राहुल की जान बचाई पिता ने किडनी देकर राहुल की जान बचाई

राहुल की इस हालात के बारे में उनके पिता ने डॉक्टर से बात की। राहुल का इलाज करने वाले नोएडा के फोर्टिस अस्पताल के डॉ. अनुजा पोरवल, डॉ. शैलेंद्र गोयल और डॉ. पीयूष वार्ष्णेय ने बताया कि उनके लिए किडनी ट्रांसप्लांट का ऑप्शन बहुत अच्छा रहेगा। अगर परिवार में से मां या पिता कोई एक किडनी ट्रांसप्लाट में राहुल की मदद करे तो वो एक नॉर्मल लाइफ जी सकता है। तबीयत खराब रहने के कारण राहुल की मां किडनी नहीं दे सकती थीं। ऐसे में राहुल के पिता आगे आए और बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी किडनी दान करने का फैसला किया। ट्रांसप्लांट सफल रहा और आज राहुल लगभग एक नॉर्मल लाइफ में वापस आ चुके हैं।

बेटी के लिए पिता ने घटाया वजन, फिर दान की किडनी

पिता के प्यार को दिखाती दूसरी कहानी सामने आई अलीगढ़ की 26 साल की दिशा की। पेशे से दिशा लंबे समय से पेट के दर्द से परेशान थीं। जब उन्होंने पेट दर्द की गहराई से जांच करवाई तो पता चला कि उन्हें Polycystic Kidney Disease है। यह एक जेनेटिक बीमारी है, जो धीरे-धीरे किडनी को नुकसान पहुंचाती है और अंत में किडनी फेल होने का खतरा भी रहता है। दिशा की बीमारी के बारे में सुनने के बाद उनका परिवार घबरा गया। जब डॉ. अनुजा पोरवल ने इस उनकी जांच की तो पता चला कि दिशा को यह बीमारी उनकी मां से विरासत में मिली है, जबकि उनके पिता में यह जीन मौजूद नहीं था। इसके बाद डॉक्टर की सलाह पर दिशा के पिता ने किडनी दान देने का फैसला लिया।

किडनी ट्रांसप्लांट करने के लिए दिशा के पिता ने वजन कम किया। किडनी ट्रांसप्लांट करने के लिए दिशा के पिता ने वजन कम किया।

हालांकि एक चुनौती थी। दिशा के पिता का वजन ज्यादा था, जिसके कारण वह तुरंत किडनी दान नहीं कर सकते थे। डॉक्टरों की सलाह के बाद उन्होंने अपनी जीवनशैली बदली और काफी वजन कम किया, ताकि वह बेटी के लिए किडनी डोनर बन सकें। उनकी मेहनत रंग लाई और सफल किडनी ट्रांसप्लांट के बाद दिशा की हालत में तेजी से सुधार हुआ। केवल 8 दिनों में उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गई। आज वह पहले की तरह की एक आम जिंदगी जी रहे हैं।

दोनों मामलों पर क्या कहते हैं डॉक्टर?

इन दोनों केस पर बात करते हुए डॉ. अनुजा पोरबल ने बताया कि जिन मरीजों की किडनी पूरी तरह खराब हो जाती है, उनके लिए किडनी ट्रांसप्लांट सबसे अच्छा इलाज माना जाता है। इससे मरीज को डायलिसिस पर लंबे समय तक निर्भर नहीं रहना पड़ता और वह बेहतर तथा लंबी जिंदगी जी सकता है। उन्होंने कहा कि आमतौर पर परिवारों में महिलाओं को ज्यादा अंगदान करते हुए देखा जाता है, लेकिन इन दोनों मामलों ने दिखाया है कि पिता भी अपने बच्चों की जिंदगी बचाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।

ये कहानियां न सिर्फ पिता के प्यार को दर्शाती हैं, बल्कि अंगदान के महत्व को भी समझाती हैं। एक व्यक्ति का फैसला किसी की पूरी जिंदगी बदल सकता है। राहुल और दिशा की कहानियां हमें यह याद दिलाती हैं कि पिता सिर्फ बच्चों का हाथ पकड़कर चलना नहीं सिखाते, बल्कि जरूरत पड़ने पर अपनी जिंदगी का एक हिस्सा देकर भी उन्हें नया जीवन दे सकते हैं।