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Written By: Anshumala | Updated : January 17, 2020 9:50 AM IST
45 वर्षीय महिला के पेट से 11 सेन्टीमीटर का ट्यूमर निकला। © Shutterstock.
पारस हॉस्पिटल्स (गुरुग्राम) में एक 45 वर्षीय मरीज की जटिल ट्यूमर (tumour) सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। यह सर्जरी गुरूग्राम निवासी सन्ध्या की हुई, जिसके पेट की दाहिनी ओर 11 सेंटीमीटर का ट्यूमर होने के कारण भयंकर दर्द रहता था। यह ट्यूमर जो उप्पर वेनाकेवा (शरीर के निचले आधे हिस्से से रक्त लेने वाली एक रक्त वाहिनी) से महाधमनी (Aorta) जो पूरे शरीर में रक्त की आपिर्त करती है, इसे मुख्य रक्तवाहिका भी कहते हैं और दाहिने गुर्दे की तरफ बढ़ रहा था।
लेयोमायोसाकोरमा प्राथमिक तौर पर घातक ट्यूमर (tumour) है और उप्पर वेनाकावा (आईवीसी) को प्रभावित करता है और यह आंशिक मांसपेशी कोशिकाओं से उत्पन्न होता है। आईवीसी के लगभग 74 प्रतिशत लियोमीसोर्कोमास 40 से 60 वर्ष (15) के बीच की महिलााओं को प्रभावित करते हैं। इस तरह के कैंसर के सर्जिकल प्रबंधन के लिए अग्रिम सुविधाओं की आवश्यकता होती है। इस अस्पताल में ऑन्कोलॉजिस्ट, यूरोलॉजिस्ट, ऑनकोसर्जन और वैस्कुलर सर्जन की एक टीम रोगी के बचाव में जुटी।
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इस बारे में चीफ ऑफ यूरोलॉजी डॉ. अनुराग खेतान, जो कि इस टीम का नेतृत्व कर रहे थे ने बताया, ‘‘यह बहुत ही दुर्लभ ट्यूमर में से एक है। जैसा कि इस ट्यूमर का स्थान शरीर के बहुत कठिन हिस्से में था और सर्जरी बहुत जटिल थी, उसे कई अस्पतालों में सर्जरी से मना कर दिया गया था। बाद में हमारे हॉस्पिटल के यूरोलॉजी विभाग में सम्पर्क किया गया। हमारे पास पीईटी स्कैन और सीटी गाइडेड बायप्सी जैसी आधुनिक जाचं सुविधाए होने के कारण हमने मरीज की जाचं इन उपकरणों से की जिसमे उच्च श्रेणी का सरकोमा पाया गया। चूंकि, इस प्रकार के ट्यूमर कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी के लिए बहुत प्रतिरोधी हैं, इसलिए मरीज के जीवित रहने की एकमात्र संभावना सर्जरी थी। हमने सर्जरी की, जो छह घंटे तक चली और इस तरह ट्यूमर को पूरी तरह से हटा दिया। मरीज ने सर्जरी को बहुत अच्छी तरह से सहन किया और अब उसकी स्थिति में काफी सुधार है।