डायबिटीज कंट्रोल में ट्रिपल थेरेपी ज्यादा असरदार, स्टडी में बड़ा दावा

क्या आपका डायबिटीज मेटफॉर्मिन लेने से कंट्रोल में नहीं रहता है? अगर हां, तो आपके लिए एक खास तरह का रिसर्च हुआ है, जो आगे चलकर शायद आपके लिए प्रभावी हो सकता है। आइए जानते हैं इस रिसर्च के बारे में-

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Written By: Kishori Mishra | Published : April 30, 2026 11:07 AM IST

Triple Therapy Study: टाइप-2 डायबिटीज के इलाज में अब सिर्फ एक दवा पर निर्भर रहने की सोच बदल सकती है। एक नई स्टडी में सामने आई है, जिसमें यह दावा किया जा रहा है कि मेटफॉर्मिन मोनथेरेपी से ब्लड शुगर कंट्रोल नहीं होने वाले मरीजों में ट्रिपल थेरेपी ज्यादा असरदार साबित हुई। अच्छी बात यह है कि इस थेरेपी ने न सिर्फ HbA1c को बेहतर तरीके से कम किया, बल्कि इसका सेफ्टी प्रोफाइल भी काफी अच्छा साबित हुआ।

क्या है ट्रिपल थेरेपी?

इस स्टडी में तीन दवाओं के कॉम्बिनेशन, ग्लिमेपिराइड, वोग्लिबो और एक्सटेंडेड-रिलीज मेटफॉर्मिन का इस्तेमाल किया गया। शोधकर्ताओं ने इसकी तुलना दो अन्य कॉम्बिनेशन थेरेपी से की, जिसमें एक समूह को वोग्लिबोज + मेटफॉर्मिन और दूसरे ग्रुप को ग्लिमेपिराइड + मेटफॉर्मिन दिया गया। इस रिसर्च का यह उद्देश्य था कि शुगर कंट्रोल के मामले में कौन-सा इलाज ज्यादा प्रभावी है।

399 मरीजों पर हुई स्टडी

इस क्लीनिकल स्टडी में कुल 399 मरीजों को शामिल किया गया, जिनकी डायबिटीज सिर्फ मेटफॉर्मिन से कंट्रोल नहीं हो पा रही थी। मरीजों को अलग-अलग ग्रुप में बांटकर 24 सप्ताह तक उनकी निगरानी की गई। रिसर्च के दौरान डॉक्टर्स ने सबसे ज्यादा HbA1c लेवल में बदलाव को ट्रैक किया, क्योंकि यही डायबिटीज कंट्रोल का सबसे अहम पैमाना माना जाता है।

ट्रिपल थेरेपी से मिला अच्छा रिजल्ट

स्टडी के नतीजों में पाया गया कि ट्रिपल थेरेपी लेने वाले मरीजों में HbA1c में अधिक गिरावट देखी गई। इस थेरेपी को लेने से सिर्फ 12 सप्ताह में शुगर लेवल में काफी अच्छा सुधार देखने को मिला। 24 सप्ताह में इसका असर और अधिक बेहतर दिखाई दिया। यानी जिन मरीजों की शुगर एक दवा से कंट्रोल नहीं हो रही थी, उनके लिए तीन दवाओं का यह कॉम्बिनेशन काफी असरदार हो सकता है।

सुरक्षा के लिहाज से भी है बेहतर

डायबिटीज की कई दवाओं के साथ हाइपोग्लाइसीमिया का खतरा बना रहता है। लेकिन इस स्टडी में ट्रिपल थेरेपी लेने वाले मरीजों में कोई गंभीर साइड इफेक्ट्स नहीं देखे गए। बहुत कम मरीजों में हल्की हाइपोग्लाइसीमिया की शिकायत हुई, जिसे आसानी से मैनेज किया गया। कुल मिलाकर, इस थेरेपी को सुरक्षित बताया जा रहा है।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है ये रिसर्च?

भारत दुनिया में डायबिटीज मरीजों की सबसे बड़ी आबादी वाले देशों में शामिल है। ऐसे में अगर एक बेहतर और प्रभावी कॉम्बिनेशन थेरेपी उपलब्ध होती है, तो लाखों मरीजों को फायदा मिल सकता है। मुख्य रूप से उन लोगों के लिए, जिनका शुगर लेवल मेटफॉर्मिन लेने के बावजूद भी कंट्रोल में नहीं रहता है।

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