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Written By: Yogita Yadav | Updated : February 2, 2021 10:30 AM IST
यह शरीर को एनर्जी देने का काम करते हैं। पर इनकी संतुलित मात्रा 150 से कम होनी चाहिए। © Shutterstock
हृदय संबंधी ज्यादातर बीमारियों का कारण ट्राइग्लिसराइड्स का बढ़ना (High Triglycerides) है। इससे न केवल धमनियां ब्लॉक हो जाती है, बल्कि स्ट्रोक का खतरा भी पैदा हो जाता है। डॉक्टर इसे नियंत्रण में रखने (High Triglycerides) की सलाह देते हैं। पर क्या आप जानते हैं कि ट्राइग्लिसराइड्स भी हमारे शरीर के सही तरह से काम करने के लिए जरूरी है। बस जरूरत है इसे नियंत्रण में रखने की।
ट्राइग्लिसराइड्स एक तरह का फैट होता है, जो रक्त में पाया जाता है। हमारा शरीर इस फैट को इस्तेमाल करके ऊर्जा पैदा करता है। बेहतर सेहत के लिए कुछ ट्राइग्लिसराइड्स ज़रूरी हैं। लेकिन, इसकी ज़्यादा मात्रा (High Triglycerides) शरीर को नुकसान पहुंचा सकती है। विशेषज्ञों के मानें तो ट्राइग्लिसराइड्स (High Triglycerides) के एक सीमा से अधिक बढ़ने पर धमनियां ब्लॉक हो जाती हैं। जिससे जान जाने का भी जोखिम रहता हे।
रक्त में फैट के रूप में पया जाने वाला ट्राइग्लिसराइड्स भी शरीर के लिए जरूरी हैं। यह शरीर को एनर्जी देने का काम करते हैं। पर इनकी संतुलित मात्रा 150 से कम होनी चाहिए। जबकि 150-199 को बॉर्डरलाइन पर माना जाता है। इससे अधिक होने को यानी 200-499 के बीच ट्राइग्लिसराइड्स लेवल हाई माना जाता है। और वेरी हाई वेल्यू होने पर स्वास्थ्य संबंधी खतरे हो सकते हैं। तब जब इनकी संख्या 500 या उससे भी ज्यादा हो जाती है।
इसके बढऩे से दिल की बीमारी का खतरा पैदा हो सकता है।
साथ ही हाई ब्लड प्रेशर और हाई ब्लड शुगर भी एक साथ हो सकते हैं।
इससे कमर पर फैट जमने लगती है और गुड कोलेस्ट्रॉल लेवल कम हो जाता है और ट्राइग्लिसराइड्स का लेवल बढ़ जाता है।
इस संयोजन को मेटाबॉलिक सिंड्रोम कहते हैं। मेटाबॉलिक सिंड्रोम से डायबिटीज़, स्ट्रोक और दिल की बीमारियां होने का खतरा बढ़ता है।
अगर आपके आहार में फैट की मात्रा ज्यादा है और आप निष्क्रिय जीवन शैली जीते हैं तो आपको ट्राइग्लिसराइड्स टेस्ट (High Triglycerides) जरूर करवना चाहिए। निष्क्रिय जीवन शैली का अर्थ है कि आपकी रूटीन लाइफ में शारीरिक श्रम न के बराबर है। आप लंबे समय तक बैठने की जॉब में हैं या आप सैर, वर्कआउट, योग या व्यायाम कुछ भी नहीं करते हैं। जिस ब्लड टेस्ट से कोलेस्ट्रॉल लेवल चेक होता है, उसी से ट्राइग्लिसराइड्स की मात्रा का भी पता लगाया जा सकता है। इसलिए समय रहते यह टेस्ट करवाते रहना चाहिए।
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