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नई दवा से हो सकेगा बहरेपन का इलाज - रिसर्च

इस दवा से कानों के अंदर मौदूद बेहद खास रोंए जैसी कोशिकाओं को पुनः जीवित किया जा सकता है।

इंसान अगर सुनने की क्षमता खो देता है या पैदा होने के साथ ही इसका शिकार होता है तो वह उम्र भर जीवन का आनंद नहीं ले पाता है। मेडिकल के क्षेत्र में तरह-तरह के रिसर्च होते रहते है लेकिन अभी तक सुनने के लिए कोई खास खोज नहीं हो पायी थी।

हाल ही में हुए एक शोध में यह दावा किया गया है कि वो ऐसी दवा बनाने में सफल हुए हैं कि सुनने की क्षमता खो चुके लोग पुनः सुन सकते हैं। अमेरिकी विशेषज्ञों ने इस दवा को बनाने के बाद दावा किया है कि इस दवा से कानों के अंदर मौदूद बेहद खास रोंए जैसी कोशिकाओं को पुनः जीवित किया जा सकता है। कान के अंदर मौजूद रोएं के जींस को पुनः संचालित करने के लिए यह दवा कारगर है।

कहां हुआ यह शोध 

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इस शोध को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डेफनेस एंड अदर कम्यूनिकेशन डिसऑर्डर के विशेषज्ञों की टीम ने किया है। शोध में शोधकर्ताओं ने डीएफएनए27 नामक जीन की खोज की जो जेनेटिक बहरेपन के लिए उत्तरदायी होता है।

किस तरह का शोध

इस शोध को चूहों के ऊपर किया गया है। शोध के सह-लेखक थॉमस फ्रीडमैन की माने तो उनकी टीम ने चूहों का बहरापन पूरी तरह से दूर करने में सफल रही। शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि बहरेपन का 50 प्रतिशत कारण जेनेटिक होता है और इसका इलाज करना असंभव होता है। ज्यादातर लोग जेनेटिक कारणों से जन्मजात बहरेपन के शिकार होते हैं।

क्या कहते हैं शोधकर्ता 

शोधकर्ताओं की माने तो उनके द्वारा खोज की गयी दवा इस बहरेपन के इलाज के लिए एक नया आयाम होगी। उनका मानना है कि यह दवा एक स्विच की तरह काम करेगी जो सुनने की ताकत को वापस लाने में मददगार होगी। शोधकर्ताओं ने कहा कि बड़े पैमाने में अगर इस शोध का असर बेहतर आते हैं तो जेनेटिक कारण से होने वाले इस लाइलाज बीमारी का इलाज करना संभव हो पायेगा।

इस शोध का प्रकाशन प्रसिद्द पत्रिका सेल में किया जा चुका है।

चित्रस्रोत:Shutterstock.

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