
किशोरी मिश्रा
किशोरी मिश्रा को डिजिटल मीडिया का लगभग 8+ वर्षों का व्यापक अनुभव है, जिसमें स्वास्थ्य (Health) और जीवनशैली ... Read More
Written By: Kishori Mishra | Updated : August 3, 2023 3:41 PM IST
Test for lungs for smokers :आधुनिक समय में लोगों को कई तरह की समस्याएं हो रही हैं, इन समस्याओं में फेफड़ों से जुड़ी परेशानी शामिल हैं। बता दें कि फेफड़े हमारे शरीर का महत्वपूर्ण अंग है, जिसका कार्य ऑक्सीजन को ब्लड सर्कुलेशन तक पहुंचाना है और कार्बन डाई ऑक्साइड को अवशोषित करते बाहर फेकना है। ऐसे में जीने के लिए फेफड़ों का स्वस्थ होना बहुत ही जरूरी है। लेकिन आज के समय में बढ़ते प्रदूषण और खराब लाइफस्टाइल की वजह से लोगों को फेफड़ों से जुड़ी समस्याएं काफी ज्यादा हो रही हैं। मुख्य रूप से अगर आप सिगरेट, बीड़ी जैसी चीजों का सेवन करते हैं, तो इस स्थिति में आपको अपने फेफड़ों की निगरानी करना बहुत ही जरूरी है। फेफड़ों की निगरानी के लिए आप कुछ जरूरी टेस्ट समय-समय पर ( lungs ke liye janch kaise hoti hai ) करवा सकते हैं।
इस बारे में जानकारी के लिए हमने न्यूबर्ग सेंटर के मॉलिक्यूलर ऑन्कोलॉजिस्ट डॉक्टर कुंजल पटेल (Dr Kunjal Patel, molecular oncopathologist, Neuberg Centre for Genomic Centre ) से बातचीत की है। डॉक्टर का कहना है कि फेफड़ों में किसी भी तरह की परेशानी महसूस होने पर सबसे पहले आपको पीएफटी और डीएलसीओ जैसे जांच की सलाह दे सकते हैं। आइए विस्तार से जानते हैं फेफड़ों की निगरानी के लिए किन जांच को समय-समय पर कराने की जरूरत होती है।
पीएफटी में आम तौर पर स्पिरोमेट्री शामिल है, जिसमें फेफडों की कार्य क्षमता की जांच की जाती है। इस जांच के माध्यम से पता लगाया जाता है कि कोई व्यक्ति कितनी हवा अंदर लेता है और छोड़ता है। इस परीक्षण के माध्यम से खराब फेफड़ों के कार्य का पता लगाने में मदद मिल सकती है।
डीएलसीओ (कार्बन मोनोऑक्साइड के लिए फेफड़ों की डिफ्यूजिंग क्षमता) परीक्षण के माध्यम से फेफड़ों और ब्लड के बीच ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड कितनी अच्छी तरह से चल रहे हैं, इसकी जांच की जाती है। यह एक तरह का पल्मोनरी फंक्शन ( Pulmonary function ) परीक्षण है। इस परीक्षण में आपके स्वास्थ्य स्थिति का पता लगाने में मदद की जा सकती है, जिसमें यह पता चलता है कि फेफड़े कितनी अच्छी तरह से कार्य कर रहा है। फेफड़े के प्रसार परीक्षण का उपयोग यह समझने के लिए किया जा सकता है कि मरीजों को किन कारणों से सांस लेने में परेशानी, खांसी या घरघराहट की समस्या हो रही है। साथ ही फेफड़ों के डैमेज का आकलन किया जाता है।
फेफड़ों की स्थिति को जानने के लिए डॉक्टर आपको एक अन्य परीक्षण की सलाह दे सकता है, जिसमें हाई-रिज़ॉल्यूशन कंप्यूटेड टोमोग्राफी स्कैन शामिल है। इस परीक्षण का आमतौर पर फेफड़ों की विस्तृत इमेज प्राप्त करने के लिए की जाता हैं। इसमें मुख्य रूप से वातस्फीति, फाइब्रोसिस और फेफड़े के नोड्यूल जैसे फेफड़ों के जुड़े डिजीज के लक्षणों को पहचानने में किया जाता है। अगर शुरुआत में इन समस्याओं का पता लग जाता है, तो मरीज की स्थिति में काफी हद तक सुधार किया जा सकता है।
इन नैदानिक परीक्षणों के अलावा डॉक्टर मरीज से उनके स्वास्थ्य से जुड़ी कुछ जानकारी ले सकता है, जैसे- मरीज धूम्रपान का कब और कितना सेवन करता हैं, पूरे दिन में कितनी सिगरेट पीता है, प्रदूषण से मरीजों का कितना संपर्क रहा है और फेफड़ों की बीमारियों का पारिवारिक इतिहास इत्यादि। इस तरह की जानकारी प्राप्त करके मरीज की स्वास्थ्य स्थिति में सुधार करने की कोशिश की जाती है।
ध्यान रखें कि अगर आप धूम्रपान कर रहे हैं, तो इन टेस्ट के माध्यम से अपने फेफड़ों की समय पर निगरानी करें, ताकि आपकी स्थिति में समय पर सुधार किया जा सके। इसके अलावा कोशिश करें कि अपनी जीवनशैली में बदलाव करें।