
रश्मि उपाध्याय
रश्मि उपाध्याय साल 2014 से मीडिया क्षेत्र से जुड़ी हैं और TheHealthSite.Com में बतौर एडिटर काम कर रही हैं। इन्हें ... Read More
Written By: Rashmi Upadhyay | Updated : February 9, 2021 4:04 PM IST
Image credits by: खाना खाने के बाद या स्नैक्स लेने के बाद बच्चे कुल्ला नहीं करते हैं, ये भी बच्चों के दांतों में कीड़ा लगने का एक बड़ा कारण है।
अगर आज से 5-7 साल पहले की बात करें तो दांतों में दर्द (Toothache), मसूढ़ों में सूजन और दांतों में कीड़ा लगने जैसी समस्या अक्सर 10 साल की उम्र के बाद शुरू होती थी। लेकिन पिछले कुछ समय से दांतों से संबंधित परेशानियां छोटे बच्चों (Toothache In Children) को भी होने लगी है। डॉक्टर्स और एक्सपर्ट कहते हैं कि इन दिनों उनके क्लिनिक में कई ऐसे बच्चे आते हैं जिनकी उम्र 3 साल, 4 साल या 5 साल से छोटी होती है और वो दांतों से जुड़ी कई गंभीर परेशानियों का शिकार होते हैं। दांतों के प्रति जागरुकता और गंभीरता फैलाने के लिए 9 फरवरी को Toothache day मनाया जाता है। आज इस मौके पर दिल्ली के वंसत विहार की डेंटिस्ट डॉक्टर गुनिता सिंह (BDS MD Dental lasers and cosmetic surgeon) हमें 5 साल की उम्र से छोटे बच्चों को होने वाले दांत में दर्द (Toothache In Children) के कारण, इनके लक्षण और बचाव के बारे में बता रही हैं।
जब डॉक्टर गुनिता सिंह से बातचीत के दौरान जब 5 साल से छोटे बच्चों को होने वाले दांत दर्द (Toothache In Children) के कारणों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया "हम खुद अपने क्लिनिक में और आसपास नोटिस कर रहे हैं कि छोटे बच्चों को दांत में दर्द से जुड़ी परेशानियां काफी बढ़ गई हैं। पहले के समय में बच्चों को जहां कभी कभार दांत में कीड़ा लगने की समस्या होती थी वो आजकल काफी आम हो गई है।" डॉक्टर के मुताबिक ऐसा होने के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं।
मुंह में इरिटेशन होना
भूख लगने पर भी खाना न खाना
मसूढ़ों से खून आना
मुंह से लार का निकलना
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जब बच्चे रोते हैं तो अक्सर माएं या तो बच्चों को अपना दूध पिलाती हैं या फिर बच्चों के मुंह में दूध की बोतल डाल देती हैं। बच्चे आमतौर पर दूध पीते-पीते सो जाते हैं। ऐसे में बच्चों के मुंह में जमा दूध दांतों में कीड़ा लगने का सबसे बड़ा कारण बनता है। इसे मेडिकल लेंग्वेज में Rampant caries कहते हैं। इसके अलावा खाना खाने के बाद या स्नैक्स लेने के बाद बच्चे कुल्ला नहीं करते हैं, ये भी बच्चों के दांतों में कीड़ा लगने का एक बड़ा कारण है। ऐसे में पेरेंट्स की जिम्मेदारी बनती है कि वो बच्चों की ओरल हाइजीन पर ध्यान दें, उन्हें समय समय पर कुल्ला कराएं और बच्चों को दांतों को सही रखने के तरीके बताएं।
1. बच्चों को बैलेंस डाइट दें
2. बच्चों को दूध देने का एक समय तय करें। ऐसा न हो कि बच्चा किसी भी समय दूध पी रहा है। क्योंकि ऐसी स्थिति में आप बच्चे के मुंह को साफ नहीं कर पाएंगे।
3. डाइट मे ऐसे फूड्स शामिल करें जिनमें स्टार्च, शुगर और स्नेक्स की मात्रा कम हो।
4. दूध पीने के बाद बच्चों के मसूढ़ों को किसी सॉफ्ट टूथब्रश या पानी में भीगे हुए सूती कपड़े से साफ करें।
5. साल में 1 बार बच्चे को pediatric dentis के पास लेकर जाएं। ताकि वो बच्चे के दांतों का जायजा लेकर जरूर सुझाव दे पाएं।
6. बच्चों को ज्यादा से ज्यादा फल दें। क्योंकि इनसे बच्चों के दांतों को मजबूती मिलने के साथ ही दांत साफ भी होते हैं।
7. बच्चों को स्ट्राबेरी जरूर दें। इस फल में मेलिक एसिड (Malic acid) होता है जो दांतों के लिए वाइटनिंग एजेंट का काम करता है।
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डॉक्टर कहती हैं कि बच्चों के दांतों का दर्द अलग अलग तरीकों से किया जाता है। लेकिन हर स्थिति में पहले दांतों का एक्स रे करना जरूरी होता है। इससे पता चलता है कि दांत में किस तरह की दिक्कत है और इसका इलाज किस तरह से किया जा सकता है। बच्चों को दांतों के दर्द के लिए जो इलाज सबसे कॉमन है वो शॉर्ट सिडेशन (Short sedation) है। इसमें बच्चे को केटामिन (ketamine) नाम का इंजेक्शन दिया जाता है। इसके बाद बच्चा सो जाता है और फिर पूरी प्रक्रिया को अंजाम दिया जाता है। इस ट्रीटमेंट की खासियत यह है कि जब बच्चा होश में आता है तो उसे पता भी नहीं चलता कि उसके साथ कुछ हुआ है। हालांकि इसके अलावा भी कई तरह के इलाज उपलब्ध हैं, लेकिन डॉक्टर मरीज की स्थिति देखकर उन्हें देते हैं।
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