2030 तक हराना है एड्स को तो फॉलो करें ये टिप्‍स

एचआईवी और एड्स के लक्षण कई बार बहुत देर से दिखाई देते हैं। जिसे विंडो पीरियड कहा जाता है। इसमें व्‍यक्ति के शरीर में संक्रमण तो होता है पर वह टेस्‍ट में भी नहीं आ पाता।

WrittenBy

Written By: Yogita Yadav | Published : August 28, 2019 4:04 PM IST

एड्स (Fight with HIV/AIDS) दुनिया भर में एक बड़ी चिंता है। अब भी इसके मरीजों की संख्‍या बढ़ती जा रही है। सबसे दुखद है गर्भस्‍थ शिशुओं का इसकी चपेट में आना। पर भारत में स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रायल और दुनिया भर के संगठन इसके खिलाफ लड़ाई जारी रखे हुए हैं। भारत ने 2030 तक एड्स  (Fight with HIV/AIDS) को समाप्‍त करने का लक्ष्‍य रखा है। अगर आप भी चाहतें हैं कि यह लक्ष्‍य पूरा हो तो इन बातों का जरूर ध्‍यान रखें।

क्‍या है एड्स और एचआईवी  (Fight with HIV/AIDS)

इस सिन्ड्रोम में शरीर की बीमारियों से लड़ने की ताकत कमजोर हो जाती है, जिससे व्यक्ति बड़ी आसानी से किसी भी संक्रमण या अन्य बीमारी की चपेट में आ जाता है। सिन्ड्रोम के बढ़ने के साथ लक्षण और गंभीर होते चले जाते हैं।

क्‍या कहते हैं आंकड़ें  (Fight with HIV/AIDS)

नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (एनएसीओ) के नए आंकड़ों के मुताबिक, देश में 15 से 49 की उम्र के बीच हर 100 लोगों में एचआईवी/ए़ड्स की दर की मात्र 0.22 है। असल चिंता हर साल शामिल हो रहे 10 हजार नए मरीज को रोकने की है। फिलहाल करीब 21.4 लाख लोग एचआईवी पॉजीटिव के साथ जिंदगी जीने को मजबूर है। इस आबादी में करीब 3 फीसदी बच्चे एचाईवी-एड्स से प्रभावित हैं। 17 लाख लोग एचआईवी-एड्स जैसी गंभीर बीमारी से लड़ रहे हैं।

ये है सरकार का लक्ष्‍य  (Fight with HIV/AIDS)

स्वास्थ्य मंत्रालय 2030 तक एचआईवी-एड्स को समाप्त करने के सभी लक्ष्य तय करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए लगातार जागरुकता अभियान चलाए जा रहे हैं। खासतौर से ट्रांसजेंडर, सेक्स वर्कर, ड्रग लेने वाले लोगों और अन्य लोगों जैसी लक्षित आबादी तक पहुंच बनाना और उन्हें शिक्षित करना है।

पहचानें इसके लक्षण  (Fight with HIV/AIDS)

एचआईवी और एड्स के लक्षण कई बार बहुत देर से दिखाई देते हैं। जिसे विंडो पीरियड कहा जाता है। इसमें व्‍यक्ति के शरीर में संक्रमण तो होता है पर वह टेस्‍ट में भी नहीं आ पाता। फि‍र भी इसके कुछ सामान्‍य लक्षण हैं। जिनकी समझ आपको होनी चाहिए। 80 फीसदी मामलों में दो से छह सप्ताह के भीतर फ्लू जैसे लक्षण दिखने लगते हैं। इसे एक्यूट रेट्रोवायरल सिन्ड्रोम कहा जाता है। एचआईवी संक्रमण के लक्षण हैं बुखार, ठंड लगना, जोड़ों में दर्द, मांसपेशियों में दर्द, पसीना आना (खासतौर पर रात में),  ग्रंथियों का आकार बढ़ना, त्वचा पर लाल रैश,  थकान,  बिना किसी कारण के वजन में कमी।

एड्स से बचना है तो इन छोटी-छोटी बातों का रखें ध्‍यान  (Fight with HIV/AIDS)

असुरक्षित यौन संबंध इस बीमारी को फैलाने का सबसे बड़ा कारण है। इसलिए सरकार, स्‍वासथ्‍य मंत्रालय और इसके लिए प्रयासरत गैर सरकारी संगठनों का फोकस इसके प्रति लोगों को जागरुक करना है।

एक व्‍यक्ति से दूसरे व्‍यक्ति तक एचआईवी संक्रमण किसी भी बॉडी फ्लूड के कारण फैल सकता है। इसलिए किसी भी तरह के संपर्क में पूरी सावधानी बरतें।

एक-डेढ़ दशक पहले तक लोग नीडल और सिरींज की ओर इतना ध्‍यान नहीं देते थे। जबकि यह भी एचआईवी संक्रमण के फैलने का एक बड़ा कारण है। हमेशा इस बात का ध्‍यान रखें कि नई नीडल और सिरींज का ही इस्‍तेमाल करें।

एचआईवी पीडि़त मां से उसके गर्भस्‍थ शिशु में यह वायरस आसानी से पहुंच सकता है। पर इससे बचाव भी संभव है। इसलिए अपने चिकित्‍सक के परामर्श अनुसार दवा को पूरी तरह फॉलो करें। बीच में दवा रोक देने या भूल जाने से उपचार में बाधा उत्‍पन्‍न होती है।

कभी भी बिना टेस्‍ट के खून न चढ़वाएं। कितनी भी इमरजेंसी हो, इसमें हरगिज लापरवाही न बरतें। केवल एड्स ही नहीं बल्कि हेपेटा‍इटिस जैसी और भी कई बीमारियों का कारण संक्रमित रक्‍त हो सकता है।

यदि आप एचआईवी पॉजीटिव हैं, तो भी एड्स से बचाव का अवसर आपके पास है। आप संतुलित आहार, व्‍यायाम, सही दवाओं और उचित परामर्श से हेल्‍दी लाइफ जी सकते हैं।

डिप्रेशन को दूर करने के लिए स्विमिंग हो सकता है बेहतर विकल्प।

पानी पीनें में आप भी करते हैं ये गलतियां ? हो सकती हैं ये 6 परेशानियां।

Add The Health Site as a Preferred Source Add The Health Site as a Preferred Source