अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस: महिलाएं अपनी आंखों का कैसे रखें ध्यान?

International Women's Day: दुनिया भर में, मोतियाबिंद, बढ़ती उम्र से जुड़ी मैक्यूलर डिजनरेशन (एएमडी) और ड्राई आई (आंखों सूखापन) जैसी समस्याएं पुरुषों की तुलना में महिलाओं को अधिक होने की सम्भावना होती है।

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Written By: Atul Modi | Updated : March 7, 2023 6:01 PM IST

महिलाओं और सामान्य रूप से नारीत्व को सम्मान देने के लिए हर साल 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस दुनिया भर में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। जब दुनिया अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस को हमारे जीवन में उनके योगदान की सराहना के रूप में मना रही है, तो यह समझना महत्वपूर्ण है कि एक महिला को अपने स्वास्थ्य, विशेष रूप से आंखों की देखभाल में कितना महत्व देना चाहिए।

ज्यादातर महिलाओं को यह नहीं पता होता है कि उनकी जीवनशैली उनके आंखों के स्वास्थ्य को प्रभावित करती है। सामान्य तौर पर, वे अपनी नौकरी, अपने परिवार और अपने जीवन की देखभाल करने में इतने व्यस्त होती हैं उनके पास अपने खुद की आंखों के स्वास्थ्य के बारे में सोचने का समय नहीं होता है। हम ऐसे समय में रहते हैं जहां लोग आकर्षक दिखने और स्वास्थ्य और तंदुरूस्ती के रख-रखाव को लेकर अत्यधिक सचेत रहते हैं।

आंखों की बीमारियों से महिलाएं होती हैं ज्यादा प्रभावित

दरअसल, हम ऐसा इसलिए कह रहे क्योंकि, 'द लैंसेट ग्लोबल हेल्थ' में प्रकाशित हाल के अध्ययनों से पता चला है कि महिलाओं में अंधेपन का खतरा अधिक होता है। दुनिया भर में, मोतियाबिंद, बढ़ती उम्र से जुड़ी मैक्यूलर डिजनरेशन (एएमडी) और ड्राई आई (आंखों सूखापन) जैसी समस्याएं पुरुषों की तुलना में महिलाओं को अधिक होने की सम्भावना होती है।

इसके अलावा, हार्मोनल उतार-चढ़ाव के कारण महिलाएं ड्राई आई सिंड्रोम के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं, पोस्ट मेनोपॉज की अवस्था के बाद और गर्भवती महिलाओं में यह स्थिति बहुत आम होती है। इसके अलावा हम सभी महिलाओं के जीवन में मेकअप के महत्व से वाकिफ हैं।

दीपशिखा शर्मा, सीईओ, शार्प साईट आई हॉस्पिटल्स कहती हैं कि, यह महत्वपूर्ण है कि आंखों से सम्बंधित समस्याओं का जल्द पता लगाने में मदद करने के लिए महिलाएं को अपने आंखों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना होगा। हालांकि, शुरुआती चरण में उपचार समस्याओं की संभावना को कम कर सकता है और लक्षणों में काफी सुधार कर सकता है।

शुरुआती आई हेल्थ जेंडर गैप चिकित्सकों, शिक्षाविदों और उद्योग के लिए समान रूप से एक बड़ी चुनौती है और इसे बहुत ही अच्छी तरीके से संभालने की जरूरत है। अगर हमें जेंडर गैप को हटाना है, तो हम्हें एक बार ध्यान रखने की जरुरत है की कभी भी एक ही उपाय सभी के लिए फिट नहीं हो सकता है। हर महिला को आंखों की देखभाल करने के दौरान अलग-अलग बाधाओं का सामना करना पड़ता है।

हालांकि, बेहतर शिक्षा, जागरूकता फैलाना और आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग करना महत्वपूर्ण है। महिलाएं आंखों के देखभाल करते हुए दुनिया को मिसाल दे सकती हैं। अपना चश्मा गर्व से पहनें और लोगों को उनके आंखों की देखभाल के लिए जागरूक और सचेत करें।

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