गर्भवती महिलाओं के लिए ओस्टियोपोरोसिस के खतरे, लक्षण और बचाव

अगर आप हाल ही में मां बनी है तो डाइट में अधिक से अधिक मात्रा में कैल्सियम युक्त चीजों का सेवन करें!

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Written By: Editorial Team | Published : August 31, 2017 4:26 PM IST

हम सभी अच्छी तरह जानते हैं कि उम्र बढ़ने के साथ ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा काफी बढ़ जाता है। हालांकि आज के समय में कम उम्र की महिलायें भी इस बीमारी की शिकार हो रही हैं खासतौर पर प्री-मेनोपॉज दौर से गुजर रही महिलाएं।  प्री-मेनोपॉज से मतलब उन महिलाओं से है जिनके पीरियड नियमित रूप से आ रहे हैं और वह अभी मेनोपॉज के दौर में नहीं पहुंची है।  मुंबई स्थित एस एल रहेजा हॉस्पिटल के कंसल्टेंट ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉक्टर अभिजीत काले इस आर्टिकल में यंग महिलाएं और गर्भवती महिलाओं में होने वाले ऑस्टियोपोरोसिस के लक्षण और उसके होने की संभावना के बारे में बता रहे हैं।

युवा महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा क्यों है : आपको बता दें कि इस समय अधिकतर महिलाएं अपना वजन कम करने के लिए बहुत ही सीमित मात्रा में खाना खाती हैं जिस वजह से ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा काफी बढ़ जाता है। इसमें गर्भवती महिलाएं भी शामिल है क्योंकि उनके गर्भ में पल रहे बच्चे को कैल्शियम की बहुत जरूरत होती है और अगर ऐसे में आपका खानपान सीमित है तो आपके शरीर में कैल्शियम की कमी हो सकती है। यही कारण है कि अधिकतर गर्भवती महिलाएं या ब्रेस्ट फीडिंग के दौर से गुजर रही महिलाएं ऑस्टियोपोरोसिस के शिकार हो जाती हैं इसलिए जरूरी है कि अपने खानपान में कैल्शियम युक्त चीजों का सेवन बढ़ा दे।

ओस्टियोपोरोसिस के प्रमुख लक्षण :

  • पीठ में दर्द होना
  • उम्र बढ़ने के साथ शरीर के विकास में रुकावट
  • हल्की चोट पर भी हड्डी टूटने का खतरा

इस आर्टिकल में हम आपको बता रहे हैं कि प्रेगनेंसी, ब्रेस्टफीडिंग या प्री मेनोपॉज के दौरान कैसे अपनी हड्डियों को हेल्दी बनाये रखें।

कैल्शियम : प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में कैल्शियम की जरूरत काफी बढ़ जाती है और अगर इस दौरान आप अपने खान-पान में कैल्शियम युक्त चीजों का सेवन कम करती हैं तो शरीर में कैल्शियम की कमी हो सकती है। नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस ने अपने शोध में बताया कि गर्भवती महिलाओं को रोजाना 1000 मिलीग्राम कैल्सियम का सेवन करना चाहिए। इसी तरह यंग महिलाओं को जो हाल ही में मां बनी है उन्हें रोजाना 1300 मिलीग्राम कैल्शियम का सेवन करना चाहिए। साथ ही साथ अपने डायट में लो फैट डेयरी प्रोडक्ट्स, ताजी हरी सब्जियां, मछली और बादाम जैसे कैल्शियम युक्त चीजों का सेवन बढ़ा देना चाहिए।

एक्सरसाइज : प्रेगनेंसी के दौरान सभी डॉक्टर महिलाओं को यह सलाह देते हैं कि वह रोजाना एक्सरसाइज जरूर करें। हालांकि ये एक्सरसाइज किसी की देखरेख में ही करना चाहिये। अमेरिकन कॉलेज ऑफ ऑब्सट्रेशियन एंड गायनोकोलॉजिस्ट ने बताया की प्रेगनेंसी के दौरान एक्सरसाइज करने से पीठ में दर्द, कब्ज,पेट फूलना और सूजन जैसी समस्याओं से राहत मिलती है। इसके अलावा इसे करने से आपका मूड भी अच्छा रहता है और नींद भी अच्छी आती है। इसलिए रोजाना कम से कम आधे घंटे व्यायाम जरूर करें।

हेल्दी लाइफस्टाइल : ऐसी गर्भवती महिलाएं जो धूम्रपान करती हैं उन्हें प्रेगनेंसी के दौरान धूम्रपान पूरी तरह बंद कर देना चाहिए। आपको बता दें कि धूम्रपान करने से बच्चे का विकास रुक सकता है और उसके फेफड़े और दिल पर बुरा असर पड़ता है। इसी तरह जो महिलाएं अल्कोहल का सेवन करती हैं उन्हें भी प्रेगनेंसी के पीरियड में अल्कोहल से पूरी तरह परहेज करना चाहिए। अपने लाइफस्टाइल में लाए इन बदलावों को करने से आपका स्वास्थ्य दिन प्रतिदिन और बेहतर होता जाता है और आप तमाम तरह की बीमारियों से बची रहती हैं।

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अनुवादक: Anoop Singh

चित्र स्रोत: Shutterstock