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सर्दियों में डायबिटीक फूट की समस्या से बचाव के लिए एक्सपर्ट के बताए इन महत्वपूर्ण टिप्स को जरूर करें फॉलो

सर्दियों के दौरान डायबिटीज फूट की देखभाल के टिप्स

मौसम ठंडा होने, नमी और ड्राइनेस में उतार-चढ़ाव से डायबिटीक फूट से संबंधित होने वाली समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है। आप सर्दियों में डायबिटीक फूट से बचे रहना चाहते हैं, तो एसएल रहेजा हॉस्पिटल, माहिम- फोर्टिस एसोशिएट के कन्सलटेंट डायबिटीक फूट सर्जन डॉ. अरुण बल के बताए इन महत्वपूर्ण टिप्स को जरूर अपनाएं। 

Written by Anshumala |Updated : January 27, 2022 9:38 AM IST

Diabetic foot care tips in Hindi: डायबिटीज (Diabetes) से ग्रस्त लोगों के लिए पैर की एक सामान्य समस्या भी संक्रमण या गंभीर जटिलताओं, एम्प्यूटेशन का कारण बन सकती है। ऐसे में डायबिटीक फूट (Diabetic foot care) की देखभाल बेहद महत्वपूर्ण है, विशेष रूप से सर्दियों के मौसम में। ऐसा इसलिए, क्योंकि सर्दियों में डायबिटीक फूट वालों को कम ब्लड सर्कुलेशन और सुन्नता (Numbness) की समस्या बढ़ जाती है, जो कई अन्य तरह की समस्याओं का कारण बन सकता है। मौसम ठंडा होने, नमी और ड्राइनेस में उतार-चढ़ाव से डायबिटीक फूट से संबंधित होने वाली समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है। लगभग 15% डायबिटीज के मरीज संक्रमण (Infection) या पैर के अल्सर (Foot Ulcer) से परेशान रहते हैं और हॉस्पिटल में इसका इलाज कराने को मजबूर हो जाते हैं। इस वजह से कई मामलों में एम्प्यूटेशन (Amputation) होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

ऐसे में इलाज से बेहतर है बचाव करना। आप सर्दियों में डायबिटीक फूट से बचे रहना चाहते हैं, तो एसएल रहेजा हॉस्पिटल, माहिम- फोर्टिस एसोशिएट के कन्सलटेंट डायबिटीक फूट सर्जन डॉ. अरुण बल (Dr. Arun Bal, Consultant-Diabetic Foot Surgeon, SL Raheja Hospital, Mahim-A Fortis Associate) के बताए कुछ महत्वपूर्ण टिप्स को जरूर अपनाएं। इससे डायबिटीक फूट के मरीज इस बीमारी से होने वाली जटिलताओं को काफी हद तक रोक सकते हैं।

सर्दियों में यूं करे डायबिटीक फूट की देखभाल

  1. अपने पैरों को जितना हो सके ड्राई रखने की कोशिश करें। दरअसल, आपके मोजों के कारण पैर और पैरों की उंगलियों के बीच जमा नमी बैक्टीरिया पनपने का कारण बन सकती है, जिससे संक्रमण हो सकता है।
  2. प्रतिदिन मॉइश्चराइजर का इस्तेमाल करें। ऐसा करने से त्वचा ड्राई नहीं होगी, उनमें खुजली नहीं होगी, वे फेटेंगे नहीं। लेकिन पैरों की उंगलियों के बीच मॉइस्चराइजर ना लगाएं, इससे फंगल संक्रमण हो सकता है। इसके अलावा, ध्यान रखें कि मधुमेह से जुड़े खराब सर्कुलेशन अक्सर मधुमेह रोगियों के पैरों में मॉइस्चराइजिंग ग्लैंड्स को कम कर देते हैं, जिससे उनके पैरों में गंभीर ड्राइनेस होने की संभावना बढ़ जाती है।
  3. अपने पैरों और पैरों की उंगलियों के बीच के सभी प्रेशर प्वाइंट की जांच करें। किसी भी तरह के डिस्चार्ज, रंग या गंध में बदलाव, दर्दनाक कॉर्न्स या त्वचा में दरार नजर आए, तो अलर्ट हो जाएं। डॉक्टर से तुरंत दिखाएं।
  4. डायबिटीज के मरीजों के लिए ड्राइनेस और पैरों में जलन की संभावना को कम करने का एक सुरक्षित तरीका है कि उस भाग को डायरेक्ट गर्मी ना लगने दिया जाए। डायबिटीज के कारण पैरों की तंत्रिका (Nerve) को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे सर्दियों में उन्हें गर्म रखना एक डायबिटीज के मरीज के लिए जटिल हो जाता है। दर्द और ऐंठन होने पर हॉट सोक (Hot Soak), हीटिंग पैड, कोल्ड पैक का उपयोग ना करें। साथ ही अपने पैरों को पानी में डुबाने से पहले हमेशा पानी के तापमान की जांच कर लें।
  5. मधुमेह रोगियों को अपने पैर गर्म पानी में नहीं रखना चाहिए। उन्हें पहले अपने हाथों या थर्मामीटर से नहाने के पानी की जांज कर लेनी चाहिए। इसके अलावा, पैरों पर किसी भी तरह के गर्म उपकरणों का उपयोग करने से बचें, जैसे एलेक्ट्रिक ब्लैंकेट्स, हीटेड शू इंसर्ट्स, हीटिंग पैड्स आदि।
  6. किसी भी क्लाइमेट में डायबिटीज के मरीजों को ऐंठन कम करने के लिए तलवों और अंगूठों को सपोर्ट करने वाले अच्छी क्वालिटी के जूते पहनने चाहिए। ठंड के मौसम में जुराबों की बनावट, क्वालिटी पर अधिक ध्यान दें, ताकि ठंड के दिनों में आपको चलने-फिरने में अधिक तकलीफ ना हो।
  7. चूंकि मधुमेह के रोगी पैर की समस्याओं के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होते हैं, इसलिए उन्हें पैरों से संबंधित इस समस्या से बचने के उपायों को जानने के लिए नियमित रूप से फूट और एंकल सर्जन से संपर्क करते रहना चाहिए।
  8. डायबिटीक फूट केयर में अपने ब्लड शुगर को कंट्रोल रखना भी बेहद जरूरी है। पैर ही ऐसा भाग होता है, जहां डायबिटीज के लक्षण सबसे पहले नजर आते हैं। अपने रक्त शर्करा को नियंत्रित करने के लिए चिकित्सक की सलाह जरूर लें।

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