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Colorectal cancer से बचाव के लिए स्क्रीनिंग क्यों है जरूरी? डॉक्टर बता रहे हैं किस उम्र से करानी चाहिए जांच

Colorectal cancer : मार्च का महीना कोलोरेक्टल कैंसर अवेयरनेस मंथ के तौर पर मनाया जाता है। इस मौके पर डॉ. मनदीप बता रहे हैं कोलोरेक्टल कैंसर से बचाव के लिए स्क्रीनिंग जरूरी क्यों है?

Colorectal cancer से बचाव के लिए स्क्रीनिंग क्यों है जरूरी? डॉक्टर बता रहे हैं किस उम्र से करानी चाहिए जांच
VerifiedMedically Reviewed By: Dr. Mandeep Singh

Written by Ashu Kumar Das |Published : March 14, 2026 12:00 PM IST

Timely diagnosis and Screening of Colorectal cancer : कोलोरेक्टल कैंसर यानी बड़ी आंत और मलाशय से जुड़ा कैंसर दुनिया भर में तेजी से बढ़ते कैंसर के मामलों में शामिल है। वैश्विक स्तर पर बढ़ते कोलोरेक्टल के मामलों को देखते हुए मार्च का महीना कोलोरेक्टल कैंसर अवेयरनेस मंथ के तौर पर मनाया जाता है। इस खास मौके पर डॉ. मनदीप सिंह बता रहे हैं कोलोरेक्टल कैंसर की स्क्रीनिंग क्यों जरूरी होती है और कोलोरेक्टल कैंसर की स्क्रीनिंग किस उम्र में करवानी (Colorectal cancer ka Test kis Umr mein Karna Chaiye) चाहिए?

कोलोरेक्टल कैंसर की स्क्रीनिंग क्यों जरूरी है?

डॉ. मनदीप सिंह बताते हैं कि कोलोरेक्टल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी अक्सर धीरे-धीरे विकसित होती है और शुरुआती चरणों में इसके लक्षण स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देते है। इसी वजह से कई बार मरीज को तब तक पता नहीं चलता जब तक बीमारी आगे के चरण में न पहुंच जाए।

ऐसे में नियमित स्क्रीनिंग इस कैंसर को समय रहते पहचानने और इलाज शुरू करने में मदद करती है।

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कोलोरेक्टल कैंसर की स्क्रीनिंग से क्या होता है?

हमारे साथ खास बातचीत में डॉ. मनदीप सिंह बताते हैं कि कोलोरेक्टल कैंसर आमतौर पर आंत में बनने वाले छोटे-छोटे पॉलिप्स से शुरू होता है। ये पॉलिप्स शुरू में सामान्य होते हैं, लेकिन समय के साथ इनमें कैंसर विकसित हो सकता है। स्क्रीनिंग टेस्ट के जरिए इन पॉलिप्स को शुरुआती अवस्था में ही पहचान कर हटाया जा सकता है, जिससे कैंसर बनने की संभावना काफी हद तक कम हो जाती है। यही कारण है कि हम समय-समय पर लोगों को कोलोरेक्टल कैंसर की स्क्रीनिंग करवाने की सलाह देते हैं।

कोलोरेक्टल कैंसर की स्क्रीनिंग का फायदा क्या है?

कोलोरेक्टल कैंसर की स्क्रीनिंग का फायदा यह है कि अगर कैंसर शुरुआती स्टेज में ही पकड़ में आ जाए तो इसका इलाज अधिक प्रभावी और सफल हो सकता है। शुरुआती चरण कोलोरेक्टल कैंसर की पहचान होने पर इलाज के अन्य विकल्प मौजूद होते हैं। इससे बीमारी का इलाज काफी आसान हो जाता है। वहीं, कोलोरेक्टल कैंसर का पता देरी से चलने पर इसका इलाज काफी मुश्किल हो जाता है और मरीज की जान बचाना मुश्किल होता है

किस उम्र में करवानी चाहिए कोलोरेक्टल कैंसर की स्क्रीनिंग?

  1. डॉक्टर बताते हैं कि सामान्य तौर पर 45 वर्ष की उम्र से कोलोरेक्टल कैंसर की स्क्रीनिंग शुरू करवानी चाहिए।
  2. अगर किसी व्यक्ति के परिवार में कोलोरेक्टल कैंसर का इतिहास रहा है या जिन्हें आंत से जुड़ी पुरानी बीमारियां जैसे इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज है, तो उन्हें 30 से 35 साल की उम्र से ही कोलोरेक्टल कैंसर की स्क्रीनिंग करवानी चाहिए।

कोलोरेक्टल कैंसर से बचाव के लिए क्या करें?

  1. कोलोरेक्टल कैंसर से बचाव के लिए स्वस्थ जीवन शैली का होना बहुत जरूरी है। इसलिए खानपान को सीमित करें। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
  2. खाने में संतुलित आहार और फाइबर युक्त भोजन को तवज्जो दें।
  3. खाने के साथ-साथ रोजाना 30 मिनट किसी प्रकार की एक्सरसाइज जरूर करें।
  4. धूम्रपान और अत्यधिक शराब के सेवन से दूरी बनाकर ही रखें।

इसके साथ ही नियमित स्वास्थ्य जांच और डॉक्टर की सलाह के अनुसार स्क्रीनिंग कराना कोलोरेक्टल कैंसर से बचाव और समय पर इलाज के लिए बेहद जरूरी माना जाता है।

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Disclaimer : प्र‍िय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्‍य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसल‍िए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए ज‍िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।