थायराइड का पता लगाने के लिए कौन से टेस्ट होते हैं? हर व्यक्ति के लिए ये टेस्ट क्यों जरूरी है

किसी व्यक्ति के शरीर में जब थायराइड धीरे-धीरे बिगड़ता है, तो शुरू में इसके लक्षण साफ दिखाई नहीं देते है। कई बार लोग इसे सामान्य कमजोरी या ऑफिस और घर का तनाव मानकर इग्नोर कर देते हैं। इसलिए थायराइड का टेस्ट ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है।

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Written By: Dr. Anupam Biswas | Published : January 24, 2026 10:00 AM IST

जीवनशैली और खानपान के कारण भारत में तेजी से थायराइड जैसी बीमारी के मामले बढ़ रहे हैं। एक डेटा बताता है कि भारत में 10 करोड़ लोगों में से 4.2 करोड़ व्यक्ति थायराइड डिसऑर्डर से जूझ रहे हैं। आंकड़ों को सरल भाषा में कहें तो भारत में हर 10 में से 1 व्यक्ति को किसी न किसी प्रकार का थायराइड है। पुरुषों से ज्यादा महिलाएं थायराइड का शिकार हैं। सही समय पर जांच न होने के कारण भारत में थायराइड की समस्या तेजी से बढ़ रही है।

थायराइड क्या होता है?

थायराइड हमारे गले में मौजूद एक छोटी सी तितली के आकार की ग्रंथि होती है। ये ग्रंथि थायरोक्सिन (T4) और ट्राईआयोडोथायरोनिन (T3) नामक हार्मोन बनाती है। ये हार्मोन शरीर के मेटाबॉलिज्म को कंट्रोल करते हैं। अगर किसी व्यक्ति की थायराइड ग्रंथि सही तरीके से काम करती है तो वजन संतुलित रहता है। थायराइड हार्मोन हार्ट बीट, शरीर की एनर्जी और ब्रेन पावर को भी मैनेज करता है। किसी भी कारण से जब थायराइड हार्मोन में गड़बड़ी होती है, तो इससे शरीर का संतुलन बिगड़ जाता है। थायराइड हार्मोन का असंतुलन दिमाग को भी क्षमता प्रभावित करता है। जिससे व्यक्ति के सोचने, समझने और याद रखने की पावर भी कम होती है।

थायराइड कितने प्रकार का होता है

थायराइड मुख्य रूप से दो तरह का होता है -

हाइपोथायराइड (Hypothyroidism)- इस स्थिति में शरीर में थायराइड हार्मोन कम बनने लगते हैं।

हाइपरथायराइड (Hyperthyroidism)- ये स्थिति तब आती है जब किसी व्यक्ति का शरीर जरूरत से ज्यादा हार्मोन बढ़ने लगता है।

थायराइड टेस्ट क्यों जरूरी है?

किसी व्यक्ति के शरीर में जब थायराइड धीरे-धीरे बिगड़ता है, तो शुरू में इसके लक्षण साफ दिखाई नहीं देते है। कई बार लोग इसे सामान्य कमजोरी या ऑफिस और घर का तनाव मानकर इग्नोर कर देते हैं। भारत में थायराइड का टेस्ट न करवाने की वजह से लोगों को बहुत लंबे समय तक के बाद थायराइड का पता चलता है, जिससे इलाज में और थायराइड को रिवर्स करने में दिक्कत आती है।

थायराइड जैसे डिसऑर्डर का पता सही समय पर चल जाए, इसलिए साल में 2 बार थायराइड टेस्ट करवाना बहुत जरूरी है। थायराइड का टेस्ट करवाने से बीमारी सही समय पर बीमारी पकड़ में आती है। इससे हार्मोन असंतुलन कंट्रोल होता है। महिलाओं में थायराइड का टेस्ट करवाने से वजन और पीरियड्स की समस्या का पता समय के साथ चल जाता है। थायराइड टेस्ट करवाने से दिल और दिमाग की बीमारियों का खतरा घटाने में सहायक होता है।

थायराइड का पता लगाने के लिए कौन-कौन से टेस्ट किए जाते हैं?

मुख्य रूप से थायराइड का पता लगाने के लिए ब्लड टेस्ट किया जाता है। आइए आगे जानते हैं थायराइड का पता लगाने के लिए कौन-कौन से मेडिकल टेस्ट किए जाते हैं।

  1. TSH टेस्ट (Thyroid Stimulating Hormone)- थायराइड का पता लगाने के लिए सबसे पहले TSH टेस्ट किया जाता है। इस टेस्ट में पिट्यूटरी ग्लैंड से निकलने वाला हार्मोन को माना जाता है। TSH टेस्ट के जरिए पता चलता है थायराइड सही काम कर रहा है या नहीं। इस टेस्ट में ज्यादा TSH आता है तो ये  हाइपोथायराइड होता है। वहीं, दूसरी तरफ थायराइड लेवल कम होता है तो ये हाइपरथायराइड की ओर इशारा करवाते हैं। जब कोई व्यक्ति उसको थायराइड डिसऑर्डर है या नहीं इसका पता लगाने के लिए डॉक्टर के पास जाता है, तो डॉक्टर TSH टेस्ट ही करवाते हैं।
  2. T3 टेस्ट (Triiodothyronine)- T3 टेस्ट  आपके शरीर में थायराइड हार्मोन की मात्रा कितनी है, इस बात को दर्शाता है। इस टेस्ट के जरिए डॉक्टर थायराइड के साथ-साथ शरीर की एनर्जी और मेटाबॉलिज्म को जानने की कोशिश करते हैं। TSH टेस्ट के बाद ये टेस्ट इसलिए किया जाता है ताकि हाइपरथायराइड की पुष्टि की जा सके।
  3. T4 टेस्ट (Thyroxine)- ये भी थायराइड हार्मोन को मापता है। इस टेस्ट के जरिए एक्टिव हार्मोन को मापा जाता है। जिन लोगों का थायराइड गंभीर रूप से में पहुंच चुका होता है, उनके लिए ये टेस्ट ज्यादा महत्वपूर्ण होता है।
  4. Anti-TPO टेस्ट- डॉक्टर Anti-TPO टेस्ट करवाने की सलाह तब देते हैं, जब उन्हें मरीज में ऑटोइम्यून थायराइड का पता लगाना होता है। ये टेस्ट हाशिमोटो डिजीज और ग्रेव्स डिजीज में जरूरी हो जाता है। Anti-TPO टेस्ट महिलाओं के मुकाबले पुरुषों में ज्यादा उपयोगी हो जाता है।
  5. थायराइड प्रोफाइल टेस्ट- विभिन्न प्रकार के थायराइड का पता लगाने के लिए थायराइड प्रोफाइल टेस्ट किया जाता है। थायराइड प्रोफाइल टेस्ट एक पूरा पैकेज होता है। इसमें TSH, T3, T4, Free T3 और Free T4 की जांच की जाती है। थायराइड डिसऑर्डर, थायराइड का प्रकार कौन सा है ये सब जानने के लिए थायराइड प्रोफाइल टेस्ट उचित माना जाता है।
  6. थायराइड अल्ट्रासाउंड- थायराइड ग्रंथि का पता लगाने के लिए थायराइड अल्ट्रासाउंड भी किया जाता है। इस अल्ट्रासाउंड गांठ, सूजन या ट्यूमर की जानकारी देता है। ये टेस्ट डॉक्टर आखिरी स्टेज में करवाने की सलाह देते हैं।

थायराइड टेस्ट कैसे किया जाता है?

थायराइड का टेस्ट करने के लिए सबसे पहले हाथ से ब्लड सैंपल लिया जाता है।

आमतौर पर थायराइड टेस्ट खाली पेट करना ही बेहतर होता है।

थायराइड के लिए ब्लड टेस्ट देने के बाद 24 घंटे के भीतर पूरी रिपोर्ट मिल जाती है।

थायराइड टेस्ट कब करवाना चाहिए?

  1. किस व्यक्ति को थायराइड टेस्ट कब करवाना चाहिए ये पूरी तरह से व्यक्ति की स्थिति पर निर्भर करता है। अगर कोई व्यक्ति सामान्य है, उसे किसी प्रकार की बीमारी नहीं है, वो कोई दवा नहीं ले रहा है तो उसे साल में 1 बार थायराइड प्रोफाइल टेस्ट करवाना चाहिए। लेकिन ध्यान रहे कि जिन लोगों के परिवार में थायराइड है, लेकिन वो सही हैं तो उन्हें साल में 2 बार थायराइड टेस्ट करवाना चाहिए।
  2. जो लोग थायराइड की दवा रहे हैं, उन्हें हर 3 से 6 महीने में एक बार थायराइड टेस्ट जरूर करवाना चाहिए। थायराइड के मरीजों को डॉक्टर की सलाह पर ही थायराइड का टेस्ट करवाना चाहिए।
  3. प्रेग्नेंट महिलाओं को बच्चे की सुरक्षा के लिए हर ट्राइमेस्टर में एक बार थायराइड टेस्ट जरूर करवाना चाहिए। कुछ मामलों में प्रेग्नेंसी के दौरान 6 सप्ताह के भीतर भी थायराइड टेस्ट करवाने की सलाह दी जाती है। प्रेग्नेंसी में आपको कब- कब थायराइड टेस्ट की जरूरत है, इस बारे में अपने डॉक्टर से बात करें।

महिलाओं के लिए क्यों जरूरी है थायराइड टेस्ट

पूरे एक जीवन काल में पुरुषों से ज्यादा महिलाओं के शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं। यही कारण है थायराइड टेस्ट महिलाओं के लिए ज्यादा जरूरी होता है। महिलाओं को पीरियड्स में गड़बड़ी, प्रेग्नेंसी कंसीव करने में समस्या, पीसीओएस का खतरा न हो इसलिए साल में 1 बार थायराइड का टेस्ट उनके लिए ज्यादा जरूरी हो जाता है। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की रिपोर्ट बताती है कि पुरुषों के मुकाबले भारतीय महिलाओं में मानसिक तनाव और आयोडीन की कमी या अधिकता के कारण थायराइड की परेशानी ज्यादा होती है। भारतीय महिलाओं में 10 में से 3 थायराइड के मामले आयोडीन की कमी या अधिकता की वजह से होते हैं।

थायराइड को कंट्रोल कैसे करें

  •  दवा नियमित लें
  •  हेल्दी डाइट अपनाएं
  •  योग और एक्सरसाइज करें
  •  तनाव कम करें
  •  डॉक्टर से नियमित जांच

इन उपायों को अपनाकर आप थायराइड को कंट्रोल कर सकते हैं।

Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

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