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Written By: Editorial Team | Published : September 12, 2018 10:00 AM IST
हर बच्चे में एक उम्र तक अमूमन अंगूठा चूसने की आदत पाई जाती है।.© Shutterstock
हर बच्चे में एक उम्र तक अमूमन अंगूठा चूसने की आदत पाई जाती है। हालांकि आज तक इस बात को कोई समझ नहीं पाया कि बच्चे अपना अंगूठा क्यों चूसते हैं। लेकिन लगभग हर मां-बाप के पास बच्चों को अंगूठा न चूसने देने के सैकड़ों वजहें जरूर होती हैं, जैसे अंगूठा चूसने से पेट में गंदगी जाती है और वह बीमार हो सकता है या बच्चे का अंगूठा पतला हो जाता है और भी जानें क्या-क्या। लेकिन अमेरिका में हुए एक शोध के अनुसार अंगूठा चूसकर बच्चे अपनी सेहत बिगाड़ नहीं बल्कि बना रहे हैं। जीं हां इस शोध के अनुसार अंगूठा चूसने वाले बच्चे ज्यादा सेहतमंद रहते हैं।
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अंगूठा चूसने से कम होती है एलर्जी
इस चौंकाने वाले शोध के अनुसार जिन बच्चों में अंगूठा चूसने की आदत होती हैं, उनका शरीर बीमारियों से लड़ने में ज्यादा सक्षम हो जाता है। नाखून चबाने से गंदगी शरीर में जाती है। इस गंदगी में मौजूद कुछ तत्व बच्चों के शरीर में कई तरह के रोगाणुओं से लड़ने की शक्ति देते हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि शरीर कई तरह की एलर्जी से बच जाता है।
अध्ययनकर्ताओं ने कहा जिन बच्चों में इन दोनों बुरी आदतों की आदत है, तो उन्हे कई तरह की एलर्जी होने की संभावना कम हो जाती है। अध्ययन के मुताबिक, जीवन के शुरूआती पड़ाव में धूल या कीटाणओं से संपर्क होने का खतरा कम रहता है। हालांकि, इन दोनों से थोड़ा फायदा होता है। तो जरूरी नहीं है कि बच्चों को इन आदतों के प्रोत्साहित किया जाए। इस अध्ययन को पीडियाट्रिक्स पत्रिका में प्रकाशित किया गया था।
इंसानों में कई तरह की एलर्जियां देखी गयी हैं। किसी को पराग से एलर्जी होती है, तो किसी को मसालों से। ऐसे लोगों के शरीर में जब सांस के साथ पराग के कण या फिर मसाले जाते हैं, तो वे छींकने लगते हैं। कुछ लोगों को एलर्जी का असर त्वचा पर देखने को मिलता है। मिसाल के तौर पर मूंगफली खाने पर कुछ लोगों की त्वचा पर लाल चकत्ते पड़ जाते हैं। कई लोगों की त्वचा में पस पड़ जाती है। एलर्जी के और भी कई रूप हो सकते हैं। किसी खास तरह के परफ्यूम के कारण सांस लेने में दिक्कत आ सकती है। हालांकि दमे जैसी बीमारियों पर इसका कोई असर नहीं देखा गया।
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क्या कहता है शोध
हालांकि ये रिसर्च बच्चों में इन आदतों को बढ़ावा देने की सलाह नहीं दे रहा, लेकिन इसके सकारात्मक पहलूओं पर प्रकाश डाल रहा है। इससे प्रतिरक्षा तंत्र तो प्रभावित होता ही है साथ ही हाइपरएलर्जी से भी बच्चे बच जाते हैं। ये रिसर्च 5, 7, 9 और 11 की उम्र के 1000 न्यूजीलैंड के बच्चों में किया गया जिसमें बच्चों की आदतों को देखा गया। साथ ही त्वचा चुभन प्रयोग 13 से 32 साल के लोगों पर किया गया।
शोध में पाया गया कि 31 फीसदी बच्चे अंगूठा चूसते हैं या फिर नाखून खाते हैं। 13 साल के सभी बच्चों में से 45 फीसदी में एटॉपिक सिंड्रोम के लक्षण दिखें जबकि जिन बच्चों को मुंह की आदत थी उनमें 40 फीसदी बच्चों में ही ये सिंड्रोम था। जबकि जिन बच्चों को अंगूठा चूसने और नाखून खाने दोनों की ही आदत थी उनमें 31 फीसदी को ही ये बीमारी थी।
शोध में कहा गया है, "हम यह नहीं कह रहे हैं कि बच्चों को ऐसी आदतों के लिए प्रेरित करना चाहिए" लेकिन इतना तो साफ है कि जो बच्चे थोड़ी बहुत गंदगी में खेल कूद कर बड़े होते हैं, उनका शरीर बीमारियों से बेहतर रूप से लड़ पाता है।