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Written By: Yogita Yadav | Published : October 29, 2018 12:21 PM IST
अगर समय पर इलाज शुरू न किया जाए तो और कई सहायक बीमारियां जन्म ले सकती हैं। © Shutterstock.
विश्व में 29 अक्टूबर को विश्व सोरायसिस दिवस के रूप में मानाया जाता है। इस साल की ग्लोबल थीम में सोरायसिस के लक्षणों के महत्व पर जोर डाला गया है। दुनियाभर में सोरायसिस रोग से तीन फीसदी आबादी यानी करीब 12.50 करोड़ लोग प्रभावित हैं।
क्यों होती है यह बीमारी
रोग प्रतिरोधक प्रणाली की गड़बड़ी से सोरायसिस रोग होता है। इसका कास्मेटिक या त्वचा के प्रकार से कोई संबंध नहीं है, हालांकि इस बीमारी के होने के बाद इससे जुड़ी कई दूसरी बीमारियां और परेशानियां हो सकती हैं। सोरायसिस को अक्सर स्किन इंफेक्शन या कॉस्मेटिक प्रॉब्लम माना जाता है, जिसका आसानी से इलाज हो सकता है, लेकिन सोरायसिस इसके बिल्कुल उलट है। दरअसल, सोरायसिस रोग तभी होता है जब रोग प्रतिरोधक तंत्र स्वस्थ कोशिकाओं पर हमला करता है। इससे त्वचा की कई कोशिकाएं बढ़ जाती है, जिससे त्वचा पर सूखे और कड़े चकत्ते बन जाते हैं, क्योंकि त्वचा की कोशिकाएं त्वचा की सतह पर बन जाती हैं।
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सोरायसिस के लक्षण
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार अगर सोरायसिस के लक्षण शुरुआत में ही पहचान लिए जाएं तो इसका इलाज ज्यादा प्रभावशाली होता है। जबकि ज्यादातर लोग इसके स्किन इन्फेक्शन समझकर इसका अलग तरह से इलाज कर रहे होते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि 'त्वचा पर होने वाले अन्य रोगों से अलग सोरायसिस अति सक्रिय प्रतिरोधक प्रणाली से होता है, जिसमें शरीर की प्रतिरोधक प्रणाली ही स्वस्थ कोशिकाओं और ऊतकों पर हमला करती है। सोरायसिस के सामान्य लक्षणों में शरीर के प्रभावित सामान्य अंगों में खुजली होती है। त्वचा पर पपड़ी जैसी ऊपरी परत जम जाती है। शरीर में लाल-लाल धब्बे और चकत्ते हो जाते हैं। सोरायसिस का कोई संपूर्ण इलाज नहीं है, लेकिन सोरायसिस के लक्षणों की गंभीरता के बावजूद इसे काफी हद तक कंट्रोल किया या जा सकता है।'
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करते हैं ये गलती
सोरायसिस के लक्षणों को हम अपने समाज में गंभीरता से नहीं लेते। बीमारी को नजरअंदाज करने और सोरायसिस रोग के संबंध में जागरूरकता की कमी से समय पर रोग का पता नहीं चल पाता और इस बीमारी के इलाज में काफी रुकावट आती है। त्वचा और शरीर पर होने वाले दूसरे रोगों का तो इलाज है, लेकिन सोराइसिस का कोई इलाज नहीं है। इसलिए सोरायसिस के लक्षणों के प्रति जागरूक रहना बहुत आवश्यक है और इसके कुछ खास लक्षणों को देखकर रोग के इलाज की प्रक्रिया शुरू कर देनी चाहिए। सोरायसिस का समय से और प्रभावी ढंग से इलाज न किया गया तो कई दूसरी सहायक बीमारियों का जन्म हो सकता है।