हर मरीज में एक जैसा नहीं बढ़ता अल्जाइमर , स्टडी में सामने आए 3 अलग पैटर्न

अगर आपको लगता है कि अल्जाइमर से पीड़ित हर एक मरीज में एक जैसे लक्षण दिखते हैं, तो आप गलत हो सकते हैं। ये हम नहीं, स्टडी कहती है। आइए जानते हैं इस स्टडी के बारे में-

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Written By: Kishori Mishra | Published : April 30, 2026 10:15 AM IST

अब तक लोगों में यही धारणा है कि अल्जाइमर डिजीज एक ऐसी बीमारी है, जिसमें मरीजों की याददाश्त कमजोर होने लगती है। साथ ही उनके सोचने-समझने की क्षमता भी कम होने लगती है। लेकिन हाल ही में एक नया रिसर्च सामने आया है, जो हमारी इस सोच को बदल सकता है। इस रिसर्च में वैज्ञानिकों ने देखा कि अल्जाइमर हर व्यक्ति में एक जैसा असर नहीं दिखाता, बल्कि इसके तीन अलग-अलग पैटर्न होते हैं।

कुछ मरीजों में लंबे समय तक नहीं दिखते कोई लक्षण

स्टडी में पाया गया कि कई लोगों को अल्जाइमर होने के बावजूद उनकी याददाश्त क्षमता, ध्यान देने की क्षमता और सोचने-समझने की शक्ति लंबे समय तक लगभग स्थिर बनी रही। यानी बीमारी होने के बावजूद मरीज मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ दिख सकता है। इस रिसर्च से साबित होता है कि हर मरीज में अल्जाइमर तेजी से नहीं बढ़ता है।

कुछ मरीजों में धीरे-धीरे कम होती है मानसिक क्षमता

दूसरे ग्रुप में ऐसे लोग शामिल थे, जिनमें समय के साथ धीरे-धीरे कॉग्निटिव फंक्शन कमजोर होने लगा। इन मरीजों में भूलने की समस्या, चीजों पर ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत और रोजमर्रा के फैसले लेने की क्षमता में धीरे-धीरे कमी देखी गई। यह अल्जाइमर के सामान्य तौर पर समझे जाने वाले पैटर्न जैसा था।

कुछ मरीजों की तेजी से बदलती है स्थिति

तीसरा ग्रुप सबसे गंभीर पाया गया। इनमें याददाश्त और मानसिक क्षमता में तेजी से गिरावट देखी की गई। ऐसे मरीजों में बीमारी कम समय में ज्यादा असर दिखाती है, जिससे उनकी रोजमर्रा की जिंदगी पर तेजी से प्रभावित हो सकती है।

ब्लड टेस्ट और ब्रेन स्कैन से पता चल सकता है किस मरीज में अल्जाइमर तेजी से बढ़ सकता है

स्टडी में रिसर्चर्स ने पाया कि जिन लोगों में Tau और P-tau217 जैसे बायोमार्कर का स्तर ज्यादा था, उनमें कॉग्निटिव गिरावट का खतरा अधिक देखा गया। साथ ही, दिमाग के हिप्पोकैम्पस का आकार छोटा होना भी तेजी से गिरावट का संकेत होता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ब्लड टेस्ट और ब्रेन स्कैन की मदद से करीब 70% तक यह अनुमान लगाया जा सकता है कि किस मरीज में बीमारी तेजी से बढ़ सकती है।

इलाज और रिसर्च के लिए क्यों अहम है यह खोज?

यह स्टडी इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि अब अल्जाइमर के इलाज में एक तरह का इलाज सबके लिए होता है, यह सोच बदल सकती है। डॉक्टर मरीज के बायोमार्कर और ब्रेन स्कैन देखकर यह समझ सकते हैं कि किस मरीज में यह बीमारी रफ्तार पकड़ सकती है। इससे इलाज अधिक पर्सनलाइज्ड और प्रभावी हो सकता है। साथ ही नई दवाओं के ट्रायल भी ज्यादा सटीक तरीके से डिजाइन किए जा सकेंगे।

क्या कहती है स्टडी?

रिसर्चर्स का साफ कहना है कि अल्जाइमर को सिर्फ एक बीमारी नहीं, बल्कि अलग-अलग पैटर्न में विकसित होने वाली बीमारी के रूप में समझने की जरूरत है। यह सोच भविष्य में अल्जाइमर की जल्दी पहचान, बेहतर इलाज और मरीजों की देखभाल के तरीके को बदल सकती है।

Disclaimer: अल्जाइमर का मतलब हर मरीज में एक जैसी याददाश्त की गिरावट नहीं है। कोई लंबे समय तक स्थिर रह सकता है, किसी में धीरे असर दिख सकता है और कुछ में बीमारी तेजी से बढ़ सकती है। यही इस नई स्टडी की सबसे बड़ी सीख है।

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