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SCAD का मतलब होता है स्पॉन्टेनियस कोरोनरी आर्टरी डिसेक्शन। यह एक जानलेवा और काफी दुर्लभ स्थिति होती है जिसमें कोरोनरी आर्टरी दिल तक खून पहुंचाती है उसमें छेद हो जाता है या टियर ओपन हो जाता है। इस स्थिति में एक सामान्य हार्ट अटैक की तरह आर्टरीज (धमनियों) में प्लाक जमा होने की वजह से अटैक नहीं आता है बल्कि यह अचानक से आर्टिरियल वॉल में अलगाव या डिसेक्शन (विच्छेदन) होने के कारण होता है।
उम्र बढ़ने के साथ हार्ट अटैक का रिस्क ज्यादा हो जाता है इसलिए बूढ़े लोगों में और खास कर पुरुषों में हार्ट अटैक का रिस्क ज्यादा होता है। महिलाओं को स्पॉन्टेनियस कोरोनरी आर्टरी डिसेक्शन (SCAD) का खतरा ज्यादा होता है। यह जवान महिलाओं को खास कर 50 से कम उम्र की महिलाओं में ज्यादा होता है। वैसे तो इस स्थिति के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है, लेकिन कनेक्टिव टिश्यू डिसऑर्डर, अत्यधिक शारीरिक श्रम, इमोशनल स्ट्रेस, माइग्रेन आदि इस स्थिति के रिस्क फैक्टर हो सकते हैं।
इसका सबसे मुख्य लक्षण छाती में दर्द होना और असहज महसूस होना होता है और यह दर्द अचानक से होता है और काफी बढ़ता जाता है। यह दर्द बाद में जबड़े, गर्दन, कंधे और बाजू तक फैल जाता है और हार्ट अटैक जैसा लगता है। इसके साथ ही सांस कम आना, थकान होना, चक्कर आना और जी मिचलाना जैसे लक्षण आदि शामिल हैं। धड़कन तेज होना भी इस स्थिति का एक आम लक्षण है।
इस स्थिति को पहचान पाना काफी मुश्किल होता है क्योंकि इसमें व्यक्ति की हार्ट से जुड़ी बीमारियों की हिस्ट्री हो या न हो, यह जरूरी नहीं है।
SCAD का सटीक कारण तो अभी तक नहीं पता चला है लेकिन इससे जुड़े कुछ ऐसे रिस्क फैक्टर हैं जिन्हें पहचाना जा सकता है। जानें इसके रिस्क फैक्टर:
जेंडर SCAD में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। महिलाओं में इस स्थिति का रिस्क ज्यादा होता है। प्रेगनेंसी के साथ होने वाले हार्मोनल बदलाव या फिर पीरियड्स और ओरल कॉन्ट्रसेप्टिव का सेवन करने से इस स्थिति का रिस्क और ज्यादा बढ़ सकता है।
यह एक नॉन इन्फ्लेमेटरी स्थिति होती है जो आर्टिरियल वॉल को प्रभावित करती है। जिन लोगों के परिवार में एफएमडी की हिस्ट्री होती है उनको SCAD का रिस्क ज्यादा होता है।
अगर आपको बहुत ज्यादा गुस्सा आता है या फिर आप को ज्यादा इमोशनल स्ट्रेस है तो भी इस स्थिति का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा आप अपने शरीर को ज्यादा प्रेशर में रखते हैं जैसे ज्यादा एक्सरसाइज कर लेते हैं या फिर ज्यादा वेट लिफ्टिंग आदि कर लेते हैं तो इस की वजह से भी इस स्थिति का रिस्क बढ़ सकता है।
निष्कर्ष: इस स्थिति को पहचानने के लिए आपको रिस्क फैक्टर को ध्यान में रखने की जरूरत है और अगर आपको इसके रिस्क फैक्टर दिखने लगते हैं तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं।