इस मौसम में ज्‍यादा होता है त्‍वचा के संक्रमण का खतरा, रहें सावधान

चिकित्सा शोधकर्ताओं ने साबित किया है कि त्‍वचा संबंधी अधिकांश संक्रमण ठंड के साथ-साथ मौसम में बदलाव के समय भी दिखाई देते हैं। इनमें स्किन में ड्राईनैस यानी त्‍वचा में खुश्‍की सबसे आम संकेत है।

WrittenBy

Written By: Yogita Yadav | Published : February 21, 2019 1:29 PM IST

मौसम बदल रहा है। यूरोप में इसे पोलन सीजन कहा जाता है जबकि दक्षिण एशिया में इसे बहार का मौसम कहा जा सकता है। इस दौरान फूलों पर नए पराग आने शुरू होते हैं, जिसे हवा में हर समय इन कणों की मौजूदगी रहती है। कुछ लोगों को इनसे एलर्जी होती है जबकि कुछ लोग सुहावने मौसम में सेहत के प्रति लापरवाह हो जाते हैं। जिसकी वजह से इन दिनों त्‍वचा का संक्रमण होने का जोखिम ज्‍यादा बढ़ जाता है। इससे बचने के लिए जरूरी है कि आप निम्‍न बातों का जरूर ध्‍यान रखें।

यह भी पढ़ेें - जानें कुछ लोगों को क्‍यों हो जाती है पराग कणों से एलर्जी

मौसम में बदलाव

चिकित्सा शोधकर्ताओं ने साबित किया है कि त्‍वचा संबंधी अधिकांश संक्रमण ठंड के साथ-साथ मौसम में बदलाव के समय भी दिखाई देते हैं। इनमें स्किन में ड्राईनैस यानी त्‍वचा में खुश्‍की सबसे आम संकेत है। इसके अलावा खुजली, घाव और छोटे-छोटे दाने भी हो सकते हैं।

यह भी पढ़ें – दिल रखना है दुरुस्‍त, तो कान को रखें साफ

ये है समस्‍या

दरअसल, समस्या की जड़ पराग में पायी जानेवाली प्रोटीन है। जिन लोगों को पराग से ऐलर्जी होती है, उनके शरीर का रोग-प्रतिरक्षा तंत्र कुछ खास किस्म के पराग की प्रोटीन को खतरा समझने लगता है। इसलिए जब उनके शरीर में ये पराग घुस आते हैं, तो ऐसा चक्र शुरू हो जाता है जिससे शरीर के ऊतकों में पायी जानेवाली मास्ट कोशिकाएँ फट जाती हैं और ये बड़ी तादाद में हिस्टामीन नाम का पदार्थ छोड़ती हैं।

यह भी पढ़ें - अकसर बढ़ जाता है ब्लड प्रेशर, तो इन पांच हर्ब्स को करें डायट में शामिल

नुकसान पहुंचाता है हिस्‍टामीन

हिस्टामीन की वजह से खून की नलियाँ फैल जाती हैं और उनमें से पदार्थों के आर-पार जाने का रास्ता खुल जाता है। इस वजह से बीमारियों से लड़नेवाली कोशिकाओं से भरा द्रव्य बहकर ज़ाया हो जाता है। आम तौर पर, जब शरीर को कोई चोट लगी होती है या संक्रमण रहता है, तो ये कोशिकाएँ शरीर की उस जगह पर पहुँच जाती हैं और वहां से वे नुकसान पहुंचाने वाले दुश्‍मनों को खत्म कर देती हैं। लेकिन जिन लोगों को ऐलर्जी होती है, उनमें पराग खतरे की गलत सूचना देता है। नतीजा, नाक बहने लगती है और उसमें खुजली होने लगती है, ऊतक फूल जाते हैं और आँखों से पानी आने लगता है।

तनाव

तनाव आमतौर पर त्वचा को प्रभावित करने के लिए जाना जाता है। तनाव से आपके शरीर में आपकी त्वचा पर सूजन की अधिक घटना हो सकती है जो आपकी त्वचा की बीमारी को और प्रभावित करती है। आपका डॉक्टर आपके तनाव को प्रबंधित करने के तरीकों में आपकी मदद कर सकता है ताकि यह आपकी त्वचा को और नुकसान न पहुंचाए।

इस तरह करें बचाव

अगर आपको यह महसूस होता है कि आपको किसी खास चीज से एलर्जी है तो उससे दूरी बनाकर रखना कही सबसे अच्‍छा उपाय है। इसके साथ ही मौसम में बदलाव को बहुत हल्‍के में न लें। मौसम अभी इतना भी गर्म नहीं हुआ है कि आप स्‍लीवलैस पहनने लगें। खासतौर से छोटे बच्‍चों को अभी पूरे ढके हुए कपड़े ही पहनाएं। सुबह-शाम सिर को ढककर रखना भी बहुत जरूरी है। खाने में अभी नेचुरल हर्ब्‍स का इस्‍तेमाल करते हैं। अदरक, हल्‍दी, इलायची ये वे मसाले हैं जो मौसमी संक्रमणों से बचाव करने में मदद करते हैं।

Add The Health Site as a Preferred Source Add The Health Site as a Preferred Source