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Written By: Jitendra Gupta | Published : August 5, 2022 1:18 PM IST
खून में मौजूद ये प्रोटीन बढ़ाता है कैंसर और डायबिटीज का खतरा! जानें नाम और कितना बढ़ जाता है खतरा
डॉक्टरों ने रक्त में एक ऐसे प्रोटीन की पहचान की है, जो किसी व्यक्ति में डायबिटीज और कैंसर से होने वाली मौत के शुरुआती संकेतों की पहचान करने में सक्षम साबित हो सकता है। स्वीडन और चीन के शोधकर्ताओं ने 4500 से ज्यादा उम्रदराज व्यक्तियों के दो दशकों के हेल्थ रिकॉर्ड्स का विश्लेषण किया। ये लोग मैल्मो डाइट पर थे और इसमें कैंसर स्टडी का भी विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों में प्रोस्टैसिन (prostasin) नाम के प्रोटीन का उच्च स्तर था उन्हें डायबिटीज का दोगुना खतरा था, खासकर उन लोगों की तुलना में, जिनके रक्त में इस प्रोटीन की मात्रा कम थी।
इस अध्ययन में शामिल हुए कुछ लोगों को पहले से डायबिटीज थी, इसलिए वैज्ञानिकों ने उन लोगों में इस प्रोटीन की जांच की, जिन्हें ये बीमारी नहीं थी और बाद में डायबिटीज का पता चला। जिन लोगों के रक्त में प्रोस्टैसिन का उच्च स्तर था उन लोगों में डायबिटीज का खतरा 76 फीसदी ज्यादा पाया गया है।
चीन स्थित नान्जिंग यूनिवर्सिटी मेडिकल स्कूल से जुड़े एक अस्पताल में हुए इस अध्ययन के मुख्य लेखक डॉ. शुई बाओ का कहना है कि प्रोस्टैसिन, डायबिटीज के लिए एक नया खतरनाक मार्कर साबित हो सकता है। इतना ही नहीं ये कैंसर से होने वाली मौतों में, विशेषकर जिनका ब्लड शुगर हाई रहता है उनमें भी ये खतरनाक साबित हो सकता है।
प्रोस्टैसिन, शरीर में कई भूमिका निभाता है जैसे ब्लड प्रेशर और ब्लड वॉल्यूम को नियंत्रित करना और ये ट्यूमर की ग्रोथ को बढ़ाने में भी मदद करता है, जिसकी वजह से हाई ब्लड शुगर बढ़ जाता है। टाइप-2 डायबिटीज कुछ प्रकार के कैंसर को बढ़ानेका भी काम करती है, जिसमें पैंक्रयाटिक, लिवर, बाउल और एंडोमैटिरियल ट्यूमर शामिल है।
प्रोस्टैसिन और डायबिटीज के बीच संबंधों का पता लगाने के बाद शोधकर्ताओं ने ये पता लगाने की कोशिश की आखिर क्या प्रोटीन का उच्च स्तर कैंसर के बढ़े हुए खतरे से जुड़ा हुआ है या नहीं। शोधकर्ताओं का कहना है कि जिन लोगों में प्रोस्टैसिन लेवल का उच्च स्तर होता है उनमें कैंसर का खतरा 43 फीसदी तक ज्यादा होता है, खासकर उन लोगों की तुलना में जिनके रक्त में प्रोस्टैसिन का लेवल कम पाया जाता है।
अध्ययन में शामिल जिन लोगों का प्रोस्टैसिन और ब्लड शुगर लेवल दोनों ही ज्यादा पाया गया, उन लोगों में कैंसर से मरने का खतरा बहुत ज्यादा था। प्रोस्टैसिन सघनता का बढ़ना नार्मल ब्लड शुगर व्यक्ति में मौत का खतरा 24 फीसदी तक बढ़ा देता है जबकि जिन लोगों में हाई ब्लड शुगर होता है उनमें ये खतरा 139 फीसदी तक ज्यादा होता है। अध्ययन के लेखकों के मुताबिक, इसलिए हर व्यक्ति को इन सब बातों पर ध्यान देना चहिए।