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Written By: Yogita Yadav | Updated : September 12, 2019 1:16 PM IST
अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन विभाग ने एक ऐसा टेस्ट विकसित किया है, जो बारह सप्ताह के दौरान ही जीका की पहचान कर लेगा। इससे उन गर्भवती महिलाओं को भी मदद मिलेगी, जिन्होंने हाल-फिलहाल में जीका संक्रमित इलाकों की यात्रा की है। © Shutterstock.
लगातार यात्रा में रहने वाले लोगों के लिए अच्छी खबर है। अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन विभाग ने एक ऐसा टेस्ट विकसित किया है, जो बारह सप्ताह के दौरान ही जीका (Tips to avoid Zika virus) की पहचान कर लेगा। इससे उन गर्भवती महिलाओं को भी मदद मिलेगी, जिन्होंने हाल-फिलहाल में जीका संक्रमित इलाकों की यात्रा की है। माना जा रहा है कि इससे जीका वायरस को फैलने से रोकने में काफी हद तक मदद मिल सकेगी।
जीका मच्छरों से फैलने वाला वायरस है। इसे फैलाने वाले मच्छर को एडीज मच्छर कहते है, ज्यादातर यह दिन में एक्टिव होते हैं। संक्रमित व्यक्ति से यह अन्यों में भी फैल सकता है। जिसके खून में वायरस मौजूद है, तो यह किसी अन्य व्यक्ति को काटकर वायरस फैला सकता है। मच्छरों के अलावा असुरक्षित शारीरिक संबंध और संक्रमित खून से भी जीका बुखार या वायरस फैल सकता है।
जीका वायरस से संक्रमित कई लोग खुद को बीमार महसूस नहीं करते। लेकिन इसके आम लक्षण डेंगू बुखार की ही तरह होते हैं। जैसे थकान, बुखार, लाल आंखे, जोड़ों में दर्द, सिरदर्द और शरीर पर लाल चकत्ते।
जीका की पहचान करने में यह नया टेस्ट काफी मददगार साबित होगा। एफडीए ने सुझाव दिया है कि इसका उपयोग सिर्फ उन पर किया जाए जो हाल ही में संक्रमित हुए हैं और जिन लोगों ने जीका प्रभावित क्षेत्रों में यात्रा की है। जीका की पुष्टि टेस्ट के साथ ही सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल ऐंड प्रिवेंशन की गाइडलाइन्स के आधार पर ही की जाने की बात एफडीए द्वारा की गई है।
जीका वायरस से बचने का अभी तक कोई टीका विकसित नहीं किया जा सका है। न ही कोई उपचार है। इस संक्रमण से पीड़ित लोगों को दर्द में आराम देने के लिए पैरासिटामॉल (एसिटामिनोफेन) दी जाती है। इसलिए बेहतर है कि इससे बचाव ही किया जाए। जीका वायरस को फैलाने वाले मच्छर से बचने के लिए वही उपाय हैं जो आप डेंगू से बचने के लिए करते आए हैं। जैसे मच्छरदानी का प्रयोग, पानी को ठहरने नहीं देना, आस-पास की साफ-सफाई, मच्छर वाले एरिया में पूरे कपड़े पहनना, मच्छरों को मारने वाली चीज़ों का इस्तेमाल और खून को जांचे बिना शरीर में ना चढ़वाना।
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