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Written By: Jitendra Gupta | Published : February 16, 2021 10:46 AM IST
इस 1 चीज को सूंघने से 90 फीसदी कम हो जाता है कोरोना का खतरा, पढ़ें खतरा कम करने वाली 4 चीजें
देशभर में वैक्सीनेशन का काम शुरू हो चुका है और पूरे देश में डॉक्टर, नर्स, सेना व कोरोनाकोरोना मरीजों की देखरेख में जुटे लोगों सहित सभी फ्रंटलाइन वर्कर्स को वैक्सीन दी जा रही है। हालांकि इस बात का ख्याल रखने की जरूरत है कि जब तक वैक्सीनेशन का काम पूरा नहीं हो जाता तब तक विशेष रूप से सावधानी बरतने की जरूरत है। अगर आप कोरोना के लक्षणों को कम करने के अन्य तरीके ढूंढ रहे हैं तो एक नया तरीका सामने आया है। जी हां, एक अध्ययन में इस बात का खुलासा हुआ है कि अस्थमा और सीओपीडी के इलाज में प्रयोग होने वाला इनहेलर कोरोना के लक्षणों की गंभीरता को कम करने का नया तरीका है। आइए जानते हैं इससे जुड़ी जरूरी जानकारी।
NIHR Oxford Biomedical Research Centre (BRC) द्वारा किए गए एक अध्ययन के मुताबिक, बुडीसोनाइड ( budesonide) कोरोना की गंभीरता को 90 फीसदी तक कम करने में प्रभावी पाया गया है। इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने 146 लोगों से प्राप्त डेटा का विश्लेषण किया। इन लोगों में से आधे लोगों को 800 माइक्रोग्राम डोज दिन में दो बार इनहेल करने के लिए दिया गया। बाकी के आधे लोगों को 28 दिनों तक प्लेसबो दिया गया। अध्ययन में ये पाया गया कि जिन लोग इनहेलर लिया उन्हें तत्काल देखभाल की आवश्यकता 90 प्रतिशत तक कम हो गई साथ ही उन्हें अन्य लोगों की तुलना में कम दिन तक बुखार रहा साथ ही लंबे समय तक रहने वाले लक्षण भी कम दिखाई दिए।
एक्सपर्ट का कहना है कि बीमारी के बाद होने वाली समस्या ज्यादा समय तक रहती है और ये इनहेलर बाद के लक्षणों को रोकने में मदद कर सकता है। हालांकि ये अध्ययन ऑब्जर्वेशन से प्रेरित है क्योंकि महामारी के शुरुआती महीनों के दौरान कुछ ही क्रॉनिक अस्थमा रोगी अस्पताल में भर्ती हुए थे, जो कि अपेक्षा के ठीक विपरित था। इस अध्ययन के बाद विशेषज्ञों ने पाया कि ऐसा उनके कॉर्टिकोस्टेरॉइड इनहेलर्स के उपयोग के कारण था, जो इन रोगियों में श्वसन संबंधी गंभीर प्रभावों को रोकता है।
बुडीसोनाइड के अलावा, बाजार में कई ऐसी दवाएं भी हैं, जो कोरोना से लड़ने में मदद का दावा करती हैं। कनाडा में हुए हाल ही के एक अध्ययन के अनुसार, कोल्चिसिन नाम की एंटी-इंफ्लेमेटरी गाउट दवा भी कोरोनावायरस के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकती है और मृत्यु दर में कटौती कर सकती है।
नोटः अध्ययन की अभी तक समीक्षा नहीं हुई है।
एक अध्ययन में पाया गया है कि एस्पिरिन लेने वाले रोगियों में एस्पिरिन न लेने वाले लोगों की तुलना में कोरोना के लक्षण कम गंभीर होते हैं।
बीते साल दिसंबर में हुए एक अध्ययन के अनुसार, नेजल स्प्रे भी कोरोना वायरस के प्रभाव को कम कर सकता है। Xlear नाम का नेजल स्प्रे केवल 25 मिनट में एक्टिव कोरोना वायरस की मात्रा को कम करने में मदद गार साबित पाया गया है।
कोरोना संक्रमित रोगियों में रक्त का थक्का बनना एक सामान्य प्रक्रिया है, जो लगभग एक तिहाई गंभीर रूप से प्रभावित रोगियों को प्रभावित करती है। इसलिए ब्लड थिनर कोरोना की जटिलताओं को कम करने का एक आसान तरीका साबित हो सकता है।
(निष्कर्षः ये अध्ययन ऑब्जर्वेशन पर आधारित है, जिसकी समीक्षा होना बाकी है।)
(सोर्सः TOI)
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