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Written By: Kishori Mishra | Published : August 24, 2020 5:36 PM IST
आंसू रोकने से शरीर पर पड़ता है विपरीत प्रभाव, जानिए इससे होने वाली परेशानियां
Hold Back Tear : क्या आप जानते हैं कि व्यक्ति कब रोता है? अगर नहीं, तो आपको बता दें कि व्यक्ति कभी भी चिंता होने पर, बहुत अधिक खुश होने पर और बैचेनी होने पर रोता है। रोना तब शुरूहोता है, जब हमारा दिमाग हमारे शरीर के स्ट्रेस को सक्रिय करता है। हालांकि, मस्तिष्क द्वारा रोने वाली प्रक्रिया पर अबतक ज्यादा अध्ययन नहीं हुए हैं, लेकिन हम सभी उस अनुभूति से वाकिफ हैं जिसे हम महसूस करते हैं। आज हम आपको इस लेख के जरिए बताएंगे कि आंसू रोकने पर हमारे शरीर पर क्या विपरीत प्रभाव (Hold Back Tear) पड़ता है।
हार्वर्ड हेल्थ पब्लिशिंग के अनुसार, जब भी आप रोते हैं या फिर आंसू निकलने की प्रक्रिया शुरू होती है, तो तनाव प्रतिक्रिया एमीगडाला (amygdala) के लिए अपना काम करना शुरू कर देती है। यह एक तरह का भावना का एहसास है, जो मस्तिष्क के अंदर का ग्रे पदार्थ होता है। एमिगडाला, हाइपोथैलेमस (hypothalamus) को संकेत भेजता है, जो शरीर के अन्य अंगों को उनके अनुसार कार्य करने के लिए कहता है। यह हमारी पिट्यूटरी ग्लैंड को बताता है कि कुछ तनाव है, जो ग्रंथि को एड्रेनोकोर्टिकोट्रोपिक हार्मोन रिलीज करने के लिए ट्रिगर करता है। इसके बाद यह हार्मोंने एड्रीनल ग्लैंड के पास जाता है, जो किडनी से ठीक ऊपर स्थित होता है और यह कॉर्टिसोल, स्ट्रेस हार्मोन को छोड़ने का कारण बनता है। अगर आप आंसू रोकते हैं तो (Hold Back Tear) क्या होता है?
जब कोई व्यक्ति आंसू रोकने की कोशिश करता है, तो उसका सहानुभूति तंत्रिका तंत्र उसके हृदय गति और आपके दिल की मांसपेशियों के संकुचन की गति को तेज कर देता है। जब आपकी बड़ी ब्लज वाहिका पतली हो जाती है, तो यह ब्लड की मात्रा को अधिक बढ़ा देती है, जो शरीर के इन हिस्सों में पंप हो जाता है और इस वजह से आपका ब्लड सर्कुलेशन बढ़ जाता है।
अब हम इंटेंस भावनाओं को अनुभव करते हैं, तो हमारा शरीर अपने आप इसे रिलीज करने लगता है, इस वजह से सांस में तकलीफ या फिर सांस तेज होने का अनुभव हो सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि जब हम स्ट्रेस में होते हैं, तो फेफड़ों और नाक के बीच का वायुमार्ग तंग हो जाता है।
कुछ लोग बहुत से विभिन्न कारणों की वजह से रोने की इच्छा महसूस करते हैं। आंकड़ों के अनुसार, हर महीने अमेरिकी महिलाएं 3.5 बार रोती हैं, जबकि 2010 में अमेरिकी पुरुष पर किए गए अध्ययन के अनुसार, हर महीने लगभग 1.9 बार रोते हैं। आंकड़ों के अनुसार, अमेरिकी महिलाओं को मुकाबले चीन की महिलाएं अधिक रोती हैं।
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