तीसरे किडनी ट्रांसप्लांट से मिली नई जिंदगी, मां-बहन और पत्नी बनीं जीवनदाता

एक या दो बार नहीं, तीन बार किडनी ट्रांसप्लांट करवाना कितनी साहस भरा हो सकता है, इसका उदाहरण है- प्रसाद सिंह, जानें इनकी पूरी कहानी...

WrittenBy

Written By: Anju Rawat | Published : April 25, 2026 10:38 AM IST

WrittenBy

Medically Verified By: Dr. Suryabhan Bhalerao

“कहते हैं, अगर अपनों का साथ हो, तो रास्ते की हर चुनौती और कष्ट आसान लगने लगता है। इसका जीता-जागता उदाहरण हैं—प्रसाद सिंह और उनका परिवार।” ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि जब प्रसाद सिंह की किडनी फेल हुई, तो उनका परिवार हिम्मत बनकर खड़ा रहा और एक या दो बार नहीं, तीन बार किडनी ट्रांसप्लांट कराके उनके जीवन को नया मौका दिया। वैसे तो तीसरी बार किडनी ट्रांसप्लांट के मामले को बेहद दुर्लभ और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण माना जाता है। लेकिन, परिवार और अपनों का साथ हो तो हर चीज को आसानी से पार कर लिया जाता है।

दरअसल, कई बार ट्रांसप्लांट करा चुके मरीजों में इम्यून सेंसिटाइजेशन बढ़ जाता है। इस स्थिति में रिजेक्शन का खतरा भी ज्यादा बना रहता है। यानी शरीर के लिए तीसरी बार ट्रांसप्लांटेड किडनी को स्वीकार करना मुश्किल हो सकता है। लेकिन, प्रसाद सिंह की तीसरी किडनी ट्रांसप्लांट सफल रही और कुछ ही समय बाद किडनी से काम करना भी शुरू कर दिया।

किस-किस ने किया किडनी दान

1. मां ने किया किडनी दान

साल 2018 से प्रसाद सिंह में क्रॉनिक किडनी डिजीज का पता चला था। उनकी एक किडनी पूरी तरह से खराब हो गई थी और किडनी सही तरीके से काम नहीं कर रही थी। इस स्थिति में डॉक्टरों ने उन्हें किडनी ट्रांसप्लांट का सुझाव दिया। उसी साल में उनकी मां ने किडनी दान किया और प्रसाद सिंह का किडनी ट्रांसप्लांट किया गया।

2. किडनी दान कर बहन ने बचाई जान

लेकिन, साल 2022 में ही ट्रांसप्लांट की हुई किडनी फेल होने लगी और उसकी कार्यक्षमता कम होने लगी। इस स्थिति में फिर से डॉक्टरों ने किडनी ट्रांसप्लांट का सुझाव दिया। इस बार उनकी बहन ने किडनी दान की और उनके जीवन को एक नया मौका दिया। 2-3 साल तक प्रसाद सिंह को काफी आराम मिला और धीरे-धीरे वजह सामान्य जीवन जीने लगे।

3. पत्नी बनी जीवनरक्षक

उनके जीवन में साल 2025 में भी एक नया मोड़ आया, जब उनकी दूसरी किडनी भी बीके वायरस नामक दुर्लभ संक्रमण के कारण खराब हो गई। इस स्थिति में भी डॉक्टरों ने किडनी ट्रांसप्लांट की ही राय दी, क्योंकि खराब किडनी ट्रांसप्लांटेड किडनी को भी नुकसान पहुंचा सकती थी। इस दौरान उनकी पत्नी किडनी दान करके उन्हें फिर से एक नया जीवन दिया।

kidney transplant kidney transplant

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, साल 2018 में प्रसाद सिंह की एक किडनी खराब हो गई थी। फिर किडनी ट्रांसप्लांट किया गया है। दुख की बात तो यह है कि ट्रांसप्लांटेड किडनी भी साल 2022 में खराब हो गई और फिर उसे हटाकर दूसरी किडनी लगाई गई। अब ट्रांसप्लांटेड किडनी सही तरीके से काम करने लगी थी, तभी उनकी किडनी में संक्रमण हो गया और उसकी कार्यक्षमता कम होने लगी। जब उन्हें संक्रमण का पता चला तो वह पुणे के जुपिटर हॉस्पिटल गए और डॉक्टरों को अपनी पूरी मेडिकल हिस्ट्री बताई। इस स्थिति में डॉक्टरों ने उन्हें दो ऑप्शन बताए, पहला- जीवनभर डायलिसिस जारी रखा जाए। दूसरा- तीसरा किडनी ट्रांसप्लांट कराया जाए। जीवन के लिए संघर्ष करने का फैसला लेते हुए उन्होंने ट्रांसप्लांट चुना, जिसमें इस बार उनकी पत्नी ने किडनी दान की।

जुपिटर अस्पताल, पुणे के सीनियर मल्टी-ऑर्गन ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. सूर्यभान भालेराव बताते हैं, "यह केस बेहद ही नाजुक था, इसमें कोई भी गड़बड़ी मरीज की जान पर भारी पड़ सकती है। दरअसल, तीसरी बार किडनी ट्रांसप्लांट सामान्य प्रक्रिया की तुलना में कहीं अधिक जटिल होता है। जहां आमतौर पर किडनी ट्रांसप्लांट में 3 से 4 घंटे लगते हैं। वहीं, इस सर्जरी में लगभग 6 घंटे लगे थे। सभी चुनौतियों के बावजूद किडनी ट्रांसप्लांट सफल रहा। सर्जरी के तुरंत बाद ही किडनी ने काम करना भी शुरू कर दिया था।"

किडनी ट्रांसप्लांट से जुड़े सवाल-जबाव

जब किसी मरीज को किडनी ट्रांसप्लांट कराने की सलाह दी जाती है, तो उसके मन में कई सवाल होते हैं। इनमें से कुछ सवालों के जवाब जानने के लिए हमने  मल्टी-ऑर्गन ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. सूर्यभान भालेराव से बातचीत की-

सवाल- किडनी ट्रांसप्लांट के बाद क्या होता है?

जवाब- बार-बार किडनी ट्रांसप्लांट कराने से शरीर में संक्रमण का खतरा काफी बढ़ जाता है। इन लोगों को बार-बार संक्रमण हो सकता है। भले ही तीसरी बार किडनी ट्रांसप्लांट की सफलता के पीछे डॉक्टरों का हाथ है। लेकिन, प्रसाद सिंह के हिम्मत और साहस भी एक मिसाल और प्रेरणा है। उनकी मां, बहन और पत्नी ने भी उनका साथ दिया और उनके जीवन की कठिन चुनौतियों को मिलकर पार किया।

सवाल- किडनी ट्रांसप्लांट कितनी बार करवा सकते हैं?

जवाब- हर केस अलग होता है और उसी आधार पर तय किया जाता है कि एक व्यक्ति का किडनी ट्रांसप्लांट कितनी बार किया जा सकता है। किडनी ट्रांसप्लांट सिर्फ एक बार तक सीमित नहीं है। अगर पहली ट्रांसप्लांट की गई किडनी किसी वजह से काम करना बंद कर देती है, तो मरीज दोबारा किडनी ट्रांसप्लांट करवा सकता है। इतना ही नहीं, कुछ मरीजों में तीसरा ट्रांसप्लांट भी संभव हो जाता है। लेकिन, हर बार मरीज की उम्र, शारीरिक स्थिति, संक्रमण का जोखिम, डोनर की उपलब्धता और शरीर की इम्यून प्रतिक्रिया को ध्यान में रखकर ही इसका निर्णय लिया जाता है।

सवाल- किडनी ट्रांसप्लांट कराने में कितना खर्चा आता है?

जवाब- भारत में किडनी ट्रांसप्लांट का खर्च अस्पताल, शहर और मरीज की स्थिति पर निर्भर करता है। आमतौर पर यह खर्च लगभग 5 लाख से 12 लाख रुपये या उससे ज्यादा तक हो सकता है। इसमें सर्जरी, अस्पताल में भर्ती, जांच, डोनर की स्क्रीनिंग और शुरुआती दवाओं का खर्च शामिल होता है। ट्रांसप्लांट के बाद मरीज को जीवनभर इम्यूनोसप्रेसेंट दवाएं लेनी पड़ सकती हैं।

सवाल- क्या बार-बार किडनी ट्रांसप्लांट कराना रिस्की होता है?

जवाब- जी हां, बार-बार किडनी ट्रांसप्लांट कराना रिस्की हो सकता है। इससे शरीर में संक्रमण, ब्लीडिंग और ऑर्गन रिजेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। खासकर, अगर मरीज को डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या हृदय संबंधी समस्याएं हैं तो जटिलताएं ज्यादा बढ़ सकती हैं। अगर मरीज का हृदय, फेफड़े और अन्य अंग सुरक्षित हैं, तो किडनी ट्रांसप्लांट किसी भी उम्र के लोग करा सकते हैं।

सवाल- किडनी ट्रांसप्लांट कराने के बाद क्या सावधानी बरतनी होती है?

जवाब- किडनी ट्रांसप्लांट के बाद मरीज को इम्यूनोसप्रेसेंट दवाएं नियमित रूप से लेनी जरूरी होती हैं, ताकि शरीर नई किडनी को रिजेक्ट न करें। साफ-सफाई का पूरा ख्याल रखना जरूरी होता है, किसी भी बीमारी से संक्रमित लोगों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। बैलेंस डाइट, पर्याप्त पानी, ब्लड प्रेशर और शुगर की नियमित जांचकरानी जरूरी है। धूम्रपान और शराब से बचना चाहिए। बुखार, सूजन, पेशाब में कमी या कमजोरी जैसे लक्षण महसूस होने पर डॉक्टर से मिलना चाहिए।

सवाल- क्या एक साथ दोनों किडनी फेल हो सकती है?

जवाब- हां, दोनों किडनी एक साथ फेल हो सकती हैं। खासकर, जब मरीज को लंबे समय से डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, क्रॉनिक किडनी डिजीज, गंभीर संक्रमण या कुछ ऑटोइम्यून बीमारियां हों। कई बार किडनी धीरे-धीरे खराब होती है और मरीज को शुरुआती लक्षण पता नहीं चल पाते हैं। जब दोनों किडनियों की कार्यक्षमता बहुत कम हो जाती है, तब शरीर में विषैले पदार्थ जमा होने लगते हैं और डायलिसिस या ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए पैरों में सूजन, पेशाब में बदलाव, थकान और सांस फूलना जैसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

Add The Health Site as a Preferred Source Add The Health Site as a Preferred Source

Disclaimer: The content on TheHealthSite.com is only for informational purposes. It is not at all professional medical advice. Always consult your doctor or a healthcare specialist for any questions regarding your health or a medical condition.