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कार्बोहाइड्रेट एक जरूरी माइक्रोन्यूट्रिएन्ट होता है। विशेषज्ञों के मुताबिक 45 से 65 फीसदी कैलोरी कार्बोहाइड्रेट से मिलनी चाहिए। कार्बोहाइड्रेट ऊर्जा प्रदान करते हैं, जो फिजिकल एक्टिविटी, ब्रेन फंक्शन और अन्य अंगों के कामकाज के लिए जरूरी है। कुछ लोग कार्बोहाइड्रेट के सेवन से बचते हैं। आपको बता दें कि परिष्कृत अनाज, साबुत अनाज आदि का सेवन कम करने से आपके शरीर पर बुरे प्रभाव पड़ सकते हैं। मुंबई स्थित फोर्टिस हॉस्पिटल में न्यूट्रीशन थेरेपिस्ट जेई खमकरआपको बता रही हैं कि कार्बोहाइड्रेट का सेवन नहीं करने से आपको क्या-क्या परेशानियां हो सकती हैं।
1) थकान
कार्बोहाइड्रेट शरीर के लिए ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। इसके कम सेवन से आपको नुकसान हो सकता है। इसे नहीं खाने से आपको थकान, कमजोरी और चक्कर आना जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
2) कब्ज
फाइबर कार्बोहाइड्रेट का एक प्रकार है जो जठरांत्र संबंधी स्वास्थ्य में सहायता करता है और कब्ज को रोकने में मदद करता है। बहुत कम कार्बोहाइड्रेट खाने का मतलब है कि आप अपनी दैनिक फाइबर की आवश्यकता को पूरा नहीं कर रहे हैं, इससे कब्ज का खतरा बढ़ जाता है।
3) मूड स्विंग्स
कार्बोहाइड्रेट नहीं खाने से आपका दिमाग सेरोटोनिन को नियंत्रित करने से रोकता है। यह एक हार्मोन है, जो ब्लड प्लेटलेट्स और सीरम में मौजूद होता है। सेरोटोनिन की कम आपूर्ति मूड स्विंग और डिप्रेशन का कारण बनता है।
4) इम्युनिटी सिस्टम कमजोर होना
तरल पदार्थ की हानि से शरीर में विटामिन सी की हानि बढ़ जाती है। जाहिर है डिहाइड्रेटेड की वजह से आपका इम्युनिटी सिस्टम कमजोर हो सकता है और संक्रमण की संभावना बढ़ सकती है।
5) सोडियम का नुकसान
कार्बोहाइड्रेट के कारण खून में केटोन (कार्बनिक यौगिक) बढ़ जाता है जिससे शरीर में तरल पदार्थ और सोडियम आयोन (Na+) की हानि हो सकती है। इससे आपको मसल्स क्रैप्म, थकावट और सुस्ती हो सकती है।
6) मांसपेशियों को नुकसान
ऊर्जा उत्पादन के लिए जमा फैट और एमीनो एसिड का इस्तेमाल किया जाता है लेकिन कार्बोहाइड्रेट की कमी के कारण कार्बोहाइड्रेट नहीं मिल पाता है, जिससे मसल्स का नुकसान होता है और वजन घटने लगता है।
7) केटोसिस
केटोसिस एक नॉर्मल मेटाबोलिक प्रोसेस है। जब बॉडी को ऊर्जा के लिए पर्याप्त कार्बोहाइड्रेट नहीं मिल पाता है, तो यह जमा फैट को बर्न करने लगता है, इसके परिणामस्वरूप केटोन नामक एसिड का निर्माण होता है। इससे आपको सिरदर्द, मतली, मानसिक और सांस की बदबू और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई होती है।
8) एसिडोसिस
डायट में कार्बोहाइड्रेट की कम मात्रा एसिडोसिस के जोखिम कारकों में से एक है। जब शरीर के तरल पदार्थ में बहुत अधिक एसिड होता है, इसे एसिडोसिस कहा जाता है। इस स्थिति में थकान, भ्रम, भूख की कमी और हार्ट रेट में वृद्धि हो सकती है।
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अनुवादक – Usman Khan
चित्र स्रोत - Shutterstock