आपके घर व बाहर मौजूद कई ऐसी चीजे हैं, जो आपके लिए लंग कैंसर का कारण बन सकती हैं।
लंग कैंसर सिर्फ स्मोकिंग से ही नहीं बल्कि कई अलग-अलग चीजों से हो सकता है और यहां तक कि कुछ चीजें तो हमारे घर व बाहर भी मौजूद होते हैं। इस लेख में कैंसर विशेषज्ञ से इस बारे में कुछ खास जानकारियां लेंगे।
इसमें कोई शक नहीं है कि धूम्रपान करना फेफड़ों में कैंसर के खतरे को बढ़ाता है, लेकिन धूम्रपान के अलावा भी कई ऐसे खतरे छिपे हुए हैं जो लंग कैंसर का कारण बन सकते हैं। जब हम लंग कैंसर के बारे में सोचते हैं, तो अक्सर हमारे दिमाग में सबसे पहले सिगरेट या धूम्रपान का ख्याल आता है। हालांकि ये दोनों काफी हद तक जुड़े हुए हैं, लेकिन दुनिया भर में बदलते हालात बताते हैं कि जो लोग धूम्रपान नहीं करते, उन पर भी इसका खतरा बढ़ता जा रहा है। पुणे के मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. मिनीश जैन, लंग कैंसर की सच्चाई, इसके छिपे हुए कारणों और इसकी जल्दी पहचान होने के महत्व को विस्तार से समझा रहे हैं। लंग कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसका धूम्रपान से बहुत गहरा संबंध है। वास्तव में, 85% 'नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर' और 90% से 100% 'स्मॉल सेल लंग कैंसर' सीधे तौर पर इसी आदत से जुड़े हैं।
डॉ. जैन बताते हैं, "अगर हम दुनिया से धूम्रपान खत्म कर सकें, तो लंग कैंसर के लगभग 85% मामले खत्म हो जाएंगे। इसके परिणामस्वरूप, दुनिया भर में कैंसर से होने वाली कुल मौतों में से लगभग 20% से 25% की कमी आ जाएगी।"
घर के अंदर और बाहर के प्रदूषण के छिपे हुए खतरे
विश्व स्तर पर अब लंग कैंसर कारण कई ऐसे भी हैं जो नए सामने आ रहे हैं जिन्हें इनडोर और आउटडोर यानी घर के अंदर व बाहर वाले प्रदूषण शामिल हैं। बाहरी प्रदूषण को 'क्लास 1 कार्सिनोजेन' (कैंसर पैदा करने वाला मुख्य तत्व) माना गया है। दिल्ली, पुणे और मुंबई जैसे कई शहरों में, सिर्फ सड़क पर होने का मतलब ही यह है कि आप लगभग 5 से 10 सिगरेट के बराबर धुआं अपने अंदर ले रहे हैं। यह कैंसर का एक प्रमुख कारण बन गया है।
कैंसर का एक और बहुत महत्वपूर्ण कारण 'सेकेंडहैंड स्मोक' (दूसरों के द्वारा छोड़ा गया धुआं) है। अगर आप किसी ऑफिस में हैं या अपनी सोसाइटी की लॉबी में हैं जहां किसी ने धूम्रपान किया है, तो वह धुआं आपको भी सीधा नुकसान पहुंचाता है।
घर के अंदर जलाई जाने वाली चीजें
घर के अंदर का प्रदूषण भी एक बहुत बड़ा खतरा है, जिसे अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है। हम घर पर जो कुछ भी जलाते हैं जैसे अगरबत्ती, मच्छर भगाने वाली कॉइल या खाना पकाते समय तेल से निकलने वाला धुआं आदि ये सभी चीजें बेहद हानिकारक होती हैं। हैरानी की बात यह है कि लंग कैंसर की शिकार होने वाली 60% से 80% महिलाएं वे होती हैं जो धूम्रपान नहीं करती हैं।
बहुत से युवा जो धूम्रपान नहीं करते, वे भी इन प्रदूषण वाले कारकों के कारण कैंसर का शिकार हो रहे हैं। विशेष रूप से, पीएम 2.5 (PM 2.5) फेफड़ों को पहले सूजन पैदा करके नुकसान पहुंचाता है, फिर डीएनए (DNA) को डैमेज करता है और अंत में कैंसर का कारण बनता है।
कैंसर की जल्दी पहचान और सही इलाज का महत्व
अगर आपको कैंसर का शुरुआती स्टेज, यानी स्टेज 1 में ही पता चल जाता है, तो इसके पूरी तरह से ठीक होने की 85% से 90% संभावना होती है। लेकिन, अगर उसी कैंसर का पता स्टेज 4 में चलता है, तो ठीक होने की संभावना सिर्फ 15% से 20% रह जाती है। हालांकि, अगर कैंसर के इलाज की बात करें तो कैंसर के प्रकार के अनुसार यह अलग-अलग हो सकता है जैसे -
1. स्मॉल सेल लंग कैंसर: यह ज्यादातर धूम्रपान करने वालों में पाया जाता है और इसका इलाज कीमोथेरेपी और इम्यूनोथेरेपी से किया जाता है।
2. नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर: इस प्रकार में कई उप-प्रकार (सब-वेरिएंट) होते हैं जैसे -
- एडेनोकार्सिनोमा
- स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा
- लार्ज सेल कार्सिनोमा
इनके लिए ईजीएफआर, एएलके, आरईटी (RET), आरओएस1 और एमईटी जैसे मार्करों की विस्तृत 'म्यूटेशनल जांच' की जाती है। ये सभी म्यूटेशन अलग-अलग तरह के इलाज और 'टारगेटेड थेरेपी' पर सकारात्मक असर दिखाते हैं।
डिसक्लेमर: इस लेख का उद्देश्य केवल लंग कैंसर से जुड़ी सही जानकारी देना है और इसमें दी गई किसी भी जानकारी का इस्तेमाल किसी भी बीमारी के इलाज के रूप में नहीं किया जाना चाहिए। इसके लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।