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बच्चेदानी में कैंसर की आखिरी स्टेज में दिखते हैं ये 5 लक्षण, कंसीव कर पाना हो जाता है मुश्किल

Bacchedani me cancer ke lakshan: बच्चेदानी में कैंसर होना महिलाओं में एक गंभीर समस्या होती है। जब कैंसर ज्यादा सीरियस हो जाता है तो कंसीव करने में दिक्कत आती है।

बच्चेदानी में कैंसर की आखिरी स्टेज में दिखते हैं ये 5 लक्षण, कंसीव कर पाना हो जाता है मुश्किल
VerifiedVERIFIED By: Dr Amit Upadhyay

Written by priya mishra |Published : February 28, 2025 4:08 PM IST

Symptoms of Uterus Cancer: बच्चेदानी का कैंसर महिलाओं में होने वाला एक गंभीर रोग है, जो कई बार शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करने की वजह से आखिरी स्टेज तक पहुंच जाता है। जब यह कैंसर एडवांस स्टेज में पहुंचता है, तो इसका असर संपूर्ण प्रजनन तंत्र पर पड़ता है, जिससे महिला के लिए कंसीव कर पाना लगभग असंभव हो जाता है। इसलिए यह ज़रूरी है कि महिलाएं समय रहते लक्षणों को पहचानें और उचित इलाज कराएं।

बच्चेदानी में कैंसर की आखिरी स्टेज में दिखने वाले 5  लक्षण

लगातार असामान्य रक्तस्राव: यदि महिला को रजोनिवृत्ति – मेनोपॉज के बाद अचानक से रक्तस्राव होने लगे या मासिक धर्म के बीच में अत्यधिक और अनियमित ब्लीडिंग हो रही हो, तो यह कैंसर का संकेत हो सकता है। अंतिम स्टेज में कैंसर शरीर के अन्य भागों में फैलने लगता है, जिससे ब्लीडिंग की समस्या गंभीर हो जाती है।

तेज़ और लगातार पेट व कमर में दर्द: बच्चेदानी में कैंसर के बढ़ने से पेट के निचले हिस्से और पीठ में लगातार दर्द बना रहता है। जब कैंसर एडवांस स्टेज में पहुंच जाता है, तो यह आस-पास के अंगों पर दबाव डालने लगता है, जिससे महिला को असहनीय दर्द महसूस होता है।

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पेशाब और मलत्याग में दिक्कत: कैंसर फैलने के कारण मूत्राशय और मलाशय पर प्रभाव पड़ सकता है, जिससे पेशाब करते समय जलन, दर्द, या बार-बार पेशाब आने की समस्या हो सकती है। कुछ महिलाओं को कब्ज़ या मल त्याग में परेशानी भी हो सकती है, क्योंकि कैंसर ग्रोथ आस-पास की नसों और अंगों को प्रभावित करती है।

तेजी से वजन घटना और कमजोरी: जब शरीर में कैंसर अंतिम चरण में पहुंच जाता है, तो यह मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करता है, जिससे अचानक वजन कम होने लगता है। कैंसर कोशिकाएं शरीर की ऊर्जा का उपयोग करने लगती हैं, जिससे महिला को अत्यधिक थकान और कमजोरी महसूस होती है।

पैरों और पेट में सूजन: एडवांस स्टेज में कैंसर लसीका ग्रंथियों (लिम्फ नोड्स) को प्रभावित करता है, जिससे शरीर में तरल पदार्थ इकट्ठा होने लगता है। इससे पैरों और पेट में सूजन आने लगती है। यदि किसी महिला को बिना किसी स्पष्ट कारण के पैरों में सूजन और भारीपन महसूस हो रहा है, तो इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए।

क्या करें यदि ये लक्षण दिखें?

यदि किसी महिला को उपरोक्त लक्षण लंबे समय तक महसूस हो रहे हैं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। कैंसर का पता लगाने के लिए पैप स्मीयर टेस्ट, बायोप्सी, अल्ट्रासाउंड, एमआरआई और सीटी स्कैन जैसे जांचों की आवश्यकता पड़ सकती है।

बचाव और जागरूकता है जरूरी

बच्चेदानी के कैंसर से बचाव के लिए महिलाओं को नियमित स्वास्थ्य जांच करवानी चाहिए। जीवनशैली में सुधार, संतुलित आहार, योग और नियमित व्यायाम करने से इस बीमारी के जोखिम को कम किया जा सकता है।

कैंसर कोई भी बीमारी हो, शुरुआती चरण में इसका इलाज आसान होता है। इसलिए किसी भी असामान्य लक्षण को नज़रअंदाज़ न करें और समय पर डॉक्टर से परामर्श लें। आपकी सतर्कता ही आपके अच्छे स्वास्थ्य की कुंजी है।

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Dr. Amit Upadhyay, Senior Consultant Haematologist and Oncologist at PSRI Hospital, New Delhi